क़ुरआन का पृष्ठ 448 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 448 25 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 23, हिज़्ब 45 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में पृष्ठ 448

25
आयतें
23
जुज़
45
हिज़्ब
1
सूरह

पृष्ठ 448 में सूरह

الصافات · जुज़ 23
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जुज़ 23
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سورة الصافات
जुज़ 23 30.0% (107/357)
हिज़्ब 45 53.5% (107/200)

يَقُولُ أَءِنَّكَ لَمِنَ ٱلْمُصَدِّقِينَ ﴿52﴾

और (मुझसे) कहा करता था कि क्या तुम भी क़यामत की तसदीक़ करने वालों में हो

أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَدِينُونَ ﴿53﴾

(भला जब हम मर जाएँगे) और (सड़ गल कर) मिट्टी और हव्ी (होकर) रह जाएँगे तो क्या हमको दोबारा ज़िन्दा करके हमारे (आमाल का) बदला दिया जाएगा

قَالَ هَلْ أَنتُم مُّطَّلِعُونَ ﴿54﴾

(फिर अपने बेहश्त के साथियों से कहेगा)

فَٱطَّلَعَ فَرَءَاهُ فِى سَوَآءِ ٱلْجَحِيمِ ﴿55﴾

तो क्या तुम लोग भी (मेरे साथ उसे झांक कर देखोगे) ग़रज़ झाँका तो उसे बीच जहन्नुम में (पड़ा हुआ) देखा

قَالَ تَٱللَّهِ إِن كِدتَّ لَتُرْدِينِ ﴿56﴾

(ये देख कर बेसाख्ता) बोल उठेगा कि खुदा की क़सम तुम तो मुझे भी तबाह करने ही को थे

وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّى لَكُنتُ مِنَ ٱلْمُحْضَرِينَ ﴿57﴾

और अगर मेरे परवरदिगार का एहसान न होता तो मैं भी (इस वक्त) तेरी तरह जहन्नुम में गिरफ्तार किया गया होता

أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ ﴿58﴾

(अब बताओ) क्या (मैं तुम से न कहता था) कि हम को इस पहली मौत के सिवा फिर मरना नहीं है

إِلَّا مَوْتَتَنَا ٱلْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ ﴿59﴾

और न हम पर (आख़ेरत) में अज़ाब होगा

إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ ﴿60﴾

(तो तुम्हें यक़ीन न होता था) ये यक़ीनी बहुत बड़ी कामयाबी है

لِمِثْلِ هَـٰذَا فَلْيَعْمَلِ ٱلْعَـٰمِلُونَ ﴿61﴾

ऐसी (ही कामयाबी) के वास्ते काम करने वालों को कारगुज़ारी करनी चाहिए

أَذَٰلِكَ خَيْرٌۭ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ ٱلزَّقُّومِ ﴿62﴾

भला मेहमानी के वास्ते ये (सामान) बेहतर है या थोहड़ का दरख्त (जो जहन्नुमियों के वास्ते होगा)

إِنَّا جَعَلْنَـٰهَا فِتْنَةًۭ لِّلظَّـٰلِمِينَ ﴿63﴾

जिसे हमने यक़ीनन ज़ालिमों की आज़माइश के लिए बनाया है

إِنَّهَا شَجَرَةٌۭ تَخْرُجُ فِىٓ أَصْلِ ٱلْجَحِيمِ ﴿64﴾

ये वह दरख्त हैं जो जहन्नुम की तह में उगता है

طَلْعُهَا كَأَنَّهُۥ رُءُوسُ ٱلشَّيَـٰطِينِ ﴿65﴾

उसके फल ऐसे (बदनुमा) हैं गोया (हू बहू) साँप के फन जिसे छूते दिल डरे

فَإِنَّهُمْ لَـَٔاكِلُونَ مِنْهَا فَمَالِـُٔونَ مِنْهَا ٱلْبُطُونَ ﴿66﴾

फिर ये (जहन्नुमी लोग) यक़ीनन उसमें से खाएँगे फिर उसी से अपने पेट भरेंगे

ثُمَّ إِنَّ لَهُمْ عَلَيْهَا لَشَوْبًۭا مِّنْ حَمِيمٍۢ ﴿67﴾

फिर उसके ऊपर से उन को खूब खौलता हुआ पानी (पीप वग़ैरह में) मिला मिलाकर पीने को दिया जाएगा

ثُمَّ إِنَّ مَرْجِعَهُمْ لَإِلَى ٱلْجَحِيمِ ﴿68﴾

फिर (खा पीकर) उनको जहन्नुम की तरफ यक़ीनन लौट जाना होगा

إِنَّهُمْ أَلْفَوْا۟ ءَابَآءَهُمْ ضَآلِّينَ ﴿69﴾

उन लोगों ने अपन बाप दादा को गुमराह पाया था

فَهُمْ عَلَىٰٓ ءَاثَـٰرِهِمْ يُهْرَعُونَ ﴿70﴾

ये लोग भी उनके पीछे दौड़े चले जा रहे हैं

وَلَقَدْ ضَلَّ قَبْلَهُمْ أَكْثَرُ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿71﴾

और उनके क़ब्ल अगलों में से बहुतेरे गुमराह हो चुके

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِم مُّنذِرِينَ ﴿72﴾

उन लोगों के डराने वाले (पैग़म्बरों) को भेजा था

فَٱنظُرْ كَيْفَ كَانَ عَـٰقِبَةُ ٱلْمُنذَرِينَ ﴿73﴾

ज़रा देखो तो कि जो लोग डराए जा चुके थे उनका क्या बुरा अन्जाम हुआ

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ﴿74﴾

मगर (हाँ) खुदा के निरे खरे बन्दे (महफूज़ रहे)

وَلَقَدْ نَادَىٰنَا نُوحٌۭ فَلَنِعْمَ ٱلْمُجِيبُونَ ﴿75﴾

और नूह ने (अपनी कौम से मायूस होकर) हमें ज़रूर पुकारा था (देखो हम) क्या खूब जवाब देने वाले थे

وَنَجَّيْنَـٰهُ وَأَهْلَهُۥ مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ ﴿76﴾

और हमने उनको और उनके लड़के वालों को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी

بسم الله الرحمن الرحيم गुरु 17 जुमादा अल-अव्वल
الخميس 17 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 18 / 29.5
रोशनी 89%
12 दिनों में अमावस्या
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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