क़ुरआन का पृष्ठ 528 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 528 24 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 27, हिज़्ब 53 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में पृष्ठ 528

24
आयतें
27
जुज़
53
हिज़्ब
2
सूरह

पृष्ठ 528 में सूरह

النجم · जुज़ 27
जुज़ 27
पृष्ठ 528
سورة النجم
जुज़ 27 30.8% (123/399)
हिज़्ब 53 62.8% (123/196)

وَأَنَّهُۥ خَلَقَ ٱلزَّوْجَيْنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰ ﴿٤٥﴾

और ये कि वही नर और मादा दो किस्म (के हैवान) नुत्फे से जब (रहम में) डाला जाता है

مِن نُّطْفَةٍ إِذَا تُمْنَىٰ ﴿٤٦﴾

पैदा करता है

وَأَنَّ عَلَيْهِ ٱلنَّشْأَةَ ٱلْأُخْرَىٰ ﴿٤٧﴾

और ये कि उसी पर (कयामत में) दोबारा उठाना लाज़िम है

وَأَنَّهُۥ هُوَ أَغْنَىٰ وَأَقْنَىٰ ﴿٤٨﴾

और ये कि वही मालदार बनाता है और सरमाया अता करता है,

وَأَنَّهُۥ هُوَ رَبُّ ٱلشِّعْرَىٰ ﴿٤٩﴾

और ये कि वही योअराए का मालिक है

وَأَنَّهُۥٓ أَهْلَكَ عَادًا ٱلْأُولَىٰ ﴿٥٠﴾

और ये कि उसी ने पहले (क़ौमे) आद को हलाक किया

وَثَمُودَا۟ فَمَآ أَبْقَىٰ ﴿٥١﴾

और समूद को भी ग़रज़ किसी को बाक़ी न छोड़ा

وَقَوْمَ نُوحٍۢ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ هُمْ أَظْلَمَ وَأَطْغَىٰ ﴿٥٢﴾

और (उसके) पहले नूह की क़ौम को बेशक ये लोग बड़े ही ज़ालिम और बड़े ही सरकश थे

وَٱلْمُؤْتَفِكَةَ أَهْوَىٰ ﴿٥٣﴾

और उसी ने (क़ौमे लूत की) उलटी हुई बस्तियों को दे पटका

فَغَشَّىٰهَا مَا غَشَّىٰ ﴿٥٤﴾

(फिर उन पर) जो छाया सो छाया

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكَ تَتَمَارَىٰ ﴿٥٥﴾

तो तू (ऐ इन्सान आख़िर) अपने परवरदिगार की कौन सी नेअमत पर शक़ किया करेगा

هَـٰذَا نَذِيرٌۭ مِّنَ ٱلنُّذُرِ ٱلْأُولَىٰٓ ﴿٥٦﴾

ये (मोहम्मद भी अगले डराने वाले पैग़म्बरों में से एक डरने वाला) पैग़म्बर है

أَزِفَتِ ٱلْـَٔازِفَةُ ﴿٥٧﴾

कयामत क़रीब आ गयी

لَيْسَ لَهَا مِن دُونِ ٱللَّهِ كَاشِفَةٌ ﴿٥٨﴾

ख़ुदा के सिवा उसे कोई टाल नहीं सकता

أَفَمِنْ هَـٰذَا ٱلْحَدِيثِ تَعْجَبُونَ ﴿٥٩﴾

तो क्या तुम लोग इस बात से ताज्जुब करते हो और हँसते हो

وَتَضْحَكُونَ وَلَا تَبْكُونَ ﴿٦٠﴾

और रोते नहीं हो

وَأَنتُمْ سَـٰمِدُونَ ﴿٦١﴾

और तुम इस क़दर ग़ाफ़िल हो तो ख़ुदा के आगे सजदे किया करो

فَٱسْجُدُوا۟ لِلَّهِ وَٱعْبُدُوا۟ ۩ ﴿٦٢﴾

और (उसी की) इबादत किया करो (62) सजदा

ٱقْتَرَبَتِ ٱلسَّاعَةُ وَٱنشَقَّ ٱلْقَمَرُ ﴿١﴾

क़यामत क़रीब आ गयी और चाँद दो टुकड़े हो गया

وَإِن يَرَوْا۟ ءَايَةًۭ يُعْرِضُوا۟ وَيَقُولُوا۟ سِحْرٌۭ مُّسْتَمِرٌّۭ ﴿٢﴾

और अगर ये कुफ्फ़ार कोई मौजिज़ा देखते हैं, तो मुँह फेर लेते हैं, और कहते हैं कि ये तो बड़ा ज़बरदस्त जादू है

وَكَذَّبُوا۟ وَٱتَّبَعُوٓا۟ أَهْوَآءَهُمْ ۚ وَكُلُّ أَمْرٍۢ مُّسْتَقِرٌّۭ ﴿٣﴾

और उन लोगों ने झुठलाया और अपनी नफ़सियानी ख्वाहिशों की पैरवी की, और हर काम का वक्त मुक़र्रर है

وَلَقَدْ جَآءَهُم مِّنَ ٱلْأَنۢبَآءِ مَا فِيهِ مُزْدَجَرٌ ﴿٤﴾

और उनके पास तो वह हालात पहुँच चुके हैं जिनमें काफी तम्बीह थीं

حِكْمَةٌۢ بَـٰلِغَةٌۭ ۖ فَمَا تُغْنِ ٱلنُّذُرُ ﴿٥﴾

और इन्तेहा दर्जे की दानाई मगर (उनको तो) डराना कुछ फ़ायदा नहीं देता

فَتَوَلَّ عَنْهُمْ ۘ يَوْمَ يَدْعُ ٱلدَّاعِ إِلَىٰ شَىْءٍۢ نُّكُرٍ ﴿٦﴾

तो (ऐ रसूल) तुम भी उनसे किनाराकश रहो, जिस दिन एक बुलाने वाला (इसराफ़ील) एक अजनबी और नागवार चीज़ की तरफ़ बुलाएगा

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