क़ुरआन का रुकू 529 पढ़ें

रुकू 529 सूरह Al-Ala (आयत 1 से 19) से है। इसमें 19 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 529

19
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.19
आयतें

रुकू 529 में सूरह

الأعلى · जुज़ 30
पृष्ठ 591
रुकू 529
سورة الطارق
जुज़ 30 48.9% (276/564)
हिज़्ब 60 0.0% (0/288)

سَبِّحِ ٱسْمَ رَبِّكَ ٱلْأَعْلَى ﴿١﴾

ऐ रसूल अपने आलीशान परवरदिगार के नाम की तस्बीह करो

ٱلَّذِى خَلَقَ فَسَوَّىٰ ﴿٢﴾

जिसने (हर चीज़ को) पैदा किया

وَٱلَّذِى قَدَّرَ فَهَدَىٰ ﴿٣﴾

और दुरूस्त किया और जिसने (उसका) अन्दाज़ा मुक़र्रर किया फिर राह बतायी

وَٱلَّذِىٓ أَخْرَجَ ٱلْمَرْعَىٰ ﴿٤﴾

और जिसने (हैवानात के लिए) चारा उगाया

فَجَعَلَهُۥ غُثَآءً أَحْوَىٰ ﴿٥﴾

फिर ख़ुश्क उसे सियाह रंग का कूड़ा कर दिया

سَنُقْرِئُكَ فَلَا تَنسَىٰٓ ﴿٦﴾

हम तुम्हें (ऐसा) पढ़ा देंगे कि कभी भूलो ही नहीं

إِلَّا مَا شَآءَ ٱللَّهُ ۚ إِنَّهُۥ يَعْلَمُ ٱلْجَهْرَ وَمَا يَخْفَىٰ ﴿٧﴾

मगर जो ख़ुदा चाहे (मन्सूख़ कर दे) बेशक वह खुली बात को भी जानता है और छुपे हुए को भी

وَنُيَسِّرُكَ لِلْيُسْرَىٰ ﴿٨﴾

और हम तुमको आसान तरीके की तौफ़ीक़ देंगे

فَذَكِّرْ إِن نَّفَعَتِ ٱلذِّكْرَىٰ ﴿٩﴾

तो जहाँ तक समझाना मुफ़ीद हो समझते रहो

سَيَذَّكَّرُ مَن يَخْشَىٰ ﴿١٠﴾

जो खौफ रखता हो वह तो फौरी समझ जाएगा

وَيَتَجَنَّبُهَا ٱلْأَشْقَى ﴿١١﴾

और बदबख्त उससे पहलू तही करेगा

ٱلَّذِى يَصْلَى ٱلنَّارَ ٱلْكُبْرَىٰ ﴿١٢﴾

जो (क़यामत में) बड़ी (तेज़) आग में दाख़िल होगा

ثُمَّ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحْيَىٰ ﴿١٣﴾

फिर न वहाँ मरेगा ही न जीयेगा

قَدْ أَفْلَحَ مَن تَزَكَّىٰ ﴿١٤﴾

वह यक़ीनन मुराद दिली को पहुँचा जो (शिर्क से) पाक हो

وَذَكَرَ ٱسْمَ رَبِّهِۦ فَصَلَّىٰ ﴿١٥﴾

और अपने परवरदिगार का ज़िक्र करता और नमाज़ पढ़ता रहा

بَلْ تُؤْثِرُونَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا ﴿١٦﴾

मगर तुम लोग दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह देते हो

وَٱلْـَٔاخِرَةُ خَيْرٌۭ وَأَبْقَىٰٓ ﴿١٧﴾

हालॉकि आख़ोरत कहीं बेहतर और देर पा है

إِنَّ هَـٰذَا لَفِى ٱلصُّحُفِ ٱلْأُولَىٰ ﴿١٨﴾

बेशक यही बात अगले सहीफ़ों

صُحُفِ إِبْرَٰهِيمَ وَمُوسَىٰ ﴿١٩﴾

इबराहीम और मूसा के सहीफ़ों में भी है

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