क़ुरआन का रुकू 538 पढ़ें

रुकू 538 सूरह Al-Alaq (आयत 1 से 19) से है। इसमें 19 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 538

19
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.19
आयतें

रुकू 538 में सूरह

العلق · जुज़ 30
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سورة العلق
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ٱقْرَأْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلَّذِى خَلَقَ ﴿1﴾

(ऐ रसूल) अपने परवरदिगार का नाम लेकर पढ़ो जिसने हर (चीज़ को) पैदा किया

خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ مِنْ عَلَقٍ ﴿2﴾

उस ने इन्सान को जमे हुए ख़ून से पैदा किया पढ़ो

ٱقْرَأْ وَرَبُّكَ ٱلْأَكْرَمُ ﴿3﴾

और तुम्हारा परवरदिगार बड़ा क़रीम है

ٱلَّذِى عَلَّمَ بِٱلْقَلَمِ ﴿4﴾

जिसने क़लम के ज़रिए तालीम दी

عَلَّمَ ٱلْإِنسَـٰنَ مَا لَمْ يَعْلَمْ ﴿5﴾

उसीने इन्सान को वह बातें बतायीं जिनको वह कुछ जानता ही न था

كَلَّآ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَيَطْغَىٰٓ ﴿6﴾

सुन रखो बेशक इन्सान जो अपने को ग़नी देखता है

أَن رَّءَاهُ ٱسْتَغْنَىٰٓ ﴿7﴾

तो सरकश हो जाता है

إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلرُّجْعَىٰٓ ﴿8﴾

बेशक तुम्हारे परवरदिगार की तरफ (सबको) पलटना है

أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يَنْهَىٰ ﴿9﴾

भला तुमने उस शख़्श को भी देखा

عَبْدًا إِذَا صَلَّىٰٓ ﴿10﴾

जो एक बन्दे को जब वह नमाज़ पढ़ता है तो वह रोकता है

أَرَءَيْتَ إِن كَانَ عَلَى ٱلْهُدَىٰٓ ﴿11﴾

भला देखो तो कि अगर ये राहे रास्त पर हो या परहेज़गारी का हुक्म करे

أَوْ أَمَرَ بِٱلتَّقْوَىٰٓ ﴿12﴾

(तो रोकना कैसा)

أَرَءَيْتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰٓ ﴿13﴾

भला देखो तो कि अगर उसने (सच्चे को) झुठला दिया और (उसने) मुँह फेरा

أَلَمْ يَعْلَم بِأَنَّ ٱللَّهَ يَرَىٰ ﴿14﴾

(तो नतीजा क्या होगा) क्या उसको ये मालूम नहीं कि ख़ुदा यक़ीनन देख रहा है

كَلَّا لَئِن لَّمْ يَنتَهِ لَنَسْفَعًۢا بِٱلنَّاصِيَةِ ﴿15﴾

देखो अगर वह बाज़ न आएगा तो हम परेशानी के पट्टे पकड़ के घसीटेंगे

نَاصِيَةٍۢ كَـٰذِبَةٍ خَاطِئَةٍۢ ﴿16﴾

झूठे ख़तावार की पेशानी के पट्टे

فَلْيَدْعُ نَادِيَهُۥ ﴿17﴾

तो वह अपने याराने जलसा को बुलाए हम भी जल्लाद फ़रिश्ते को बुलाएँगे

سَنَدْعُ ٱلزَّبَانِيَةَ ﴿18﴾

(ऐ रसूल) देखो हरगिज़ उनका कहना न मानना

كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَٱسْجُدْ وَٱقْتَرِب ۩ ﴿19﴾

और सजदे करते रहो और कुर्ब हासिल करो (19) (सजदा)

بسم الله الرحمن الرحيم सोम 7 जुमादा अल-अव्वल
الاثنين 7 جمادى الأولى
التربيع الأول पहली तिमाही दिन 7.8 / 29.5
रोशनी 55%
7 दिनों में पूर्णिमा
الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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