सूरह Al-Mutaffifin पढ़ें

सूरह Al-Mutaffifin (المطففين) क़ुरआन की एक मक्की सूरह है जिसमें 36 आयतें हैं। हमारे इंटरैक्टिव उपकरणों से इस सूरह को पढ़ें, सुनें और हिफ़्ज़ करें।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

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सूरह Al-Mutaffifin अंकों में

कालानुक्रमिक अवतरण क्रम
अवतरण क्रमांक 86 / 114
(मक्की)
172
शब्द
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अक्षर
-74.2% औसत से
2
पढ़ने का मिनट
36
आयतें
-34.2% औसत से

मुख्य शब्दों की आवृत्ति

الله 0
رب 5

सबसे अधिक आवृत्त अक्षर

ل
76
#1
ن
70
#2
و
68
#3
ا
64
#4
م
63
#5
المطففين · जुज़ 30
सूरह Al-Mutaffifin पढ़ें
سورة الإنفطار
जुज़ 30 31.2% (176/564)
हिज़्ब 59 63.8% (176/276)

وَيْلٌۭ لِّلْمُطَفِّفِينَ ﴿١﴾

नाप तौल में कमी करने वालों की ख़राबी है

ٱلَّذِينَ إِذَا ٱكْتَالُوا۟ عَلَى ٱلنَّاسِ يَسْتَوْفُونَ ﴿٢﴾

जो औरें से नाप कर लें तो पूरा पूरा लें

وَإِذَا كَالُوهُمْ أَو وَّزَنُوهُمْ يُخْسِرُونَ ﴿٣﴾

और जब उनकी नाप या तौल कर दें तो कम कर दें

أَلَا يَظُنُّ أُو۟لَـٰٓئِكَ أَنَّهُم مَّبْعُوثُونَ ﴿٤﴾

क्या ये लोग इतना भी ख्याल नहीं करते

لِيَوْمٍ عَظِيمٍۢ ﴿٥﴾

कि एक बड़े (सख्त) दिन (क़यामत) में उठाए जाएँगे

يَوْمَ يَقُومُ ٱلنَّاسُ لِرَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٦﴾

जिस दिन तमाम लोग सारे जहाँन के परवरदिगार के सामने खड़े होंगे

كَلَّآ إِنَّ كِتَـٰبَ ٱلْفُجَّارِ لَفِى سِجِّينٍۢ ﴿٧﴾

सुन रखो कि बदकारों के नाम ए अमाल सिज्जीन में हैं

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا سِجِّينٌۭ ﴿٨﴾

तुमको क्या मालूम सिज्जीन क्या चीज़ है

كِتَـٰبٌۭ مَّرْقُومٌۭ ﴿٩﴾

एक लिखा हुआ दफ़तर है जिसमें शयातीन के (आमाल दर्ज हैं)

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿١٠﴾

उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

ٱلَّذِينَ يُكَذِّبُونَ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ ﴿١١﴾

जो लोग रोजे ज़ज़ा को झुठलाते हैं

وَمَا يُكَذِّبُ بِهِۦٓ إِلَّا كُلُّ مُعْتَدٍ أَثِيمٍ ﴿١٢﴾

हालॉकि उसको हद से निकल जाने वाले गुनाहगार के सिवा कोई नहीं झुठलाता

إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ءَايَـٰتُنَا قَالَ أَسَـٰطِيرُ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿١٣﴾

जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं तो कहता है कि ये तो अगलों के अफसाने हैं

كَلَّا ۖ بَلْ ۜ رَانَ عَلَىٰ قُلُوبِهِم مَّا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ ﴿١٤﴾

नहीं नहीं बात ये है कि ये लोग जो आमाल (बद) करते हैं उनका उनके दिलों पर जंग बैठ गया है

كَلَّآ إِنَّهُمْ عَن رَّبِّهِمْ يَوْمَئِذٍۢ لَّمَحْجُوبُونَ ﴿١٥﴾

बेशक ये लोग उस दिन अपने परवरदिगार (की रहमत से) रोक दिए जाएँगे

ثُمَّ إِنَّهُمْ لَصَالُوا۟ ٱلْجَحِيمِ ﴿١٦﴾

फिर ये लोग ज़रूर जहन्नुम वासिल होंगे

ثُمَّ يُقَالُ هَـٰذَا ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ﴿١٧﴾

फिर उनसे कहा जाएगा कि ये वही चीज़ तो है जिसे तुम झुठलाया करते थे

كَلَّآ إِنَّ كِتَـٰبَ ٱلْأَبْرَارِ لَفِى عِلِّيِّينَ ﴿١٨﴾

ये भी सुन रखो कि नेको के नाम ए अमाल इल्लीयीन में होंगे

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا عِلِّيُّونَ ﴿١٩﴾

और तुमको क्या मालूम कि इल्लीयीन क्या है वह एक लिखा हुआ दफ़तर है

كِتَـٰبٌۭ مَّرْقُومٌۭ ﴿٢٠﴾

जिसमें नेकों के आमाल दर्ज हैं

يَشْهَدُهُ ٱلْمُقَرَّبُونَ ﴿٢١﴾

उसके पास मुक़र्रिब (फ़रिश्ते) हाज़िर हैं

إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ لَفِى نَعِيمٍ ﴿٢٢﴾

बेशक नेक लोग नेअमतों में होंगे

عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ يَنظُرُونَ ﴿٢٣﴾

तख्तों पर बैठे नज़ारे करेंगे

تَعْرِفُ فِى وُجُوهِهِمْ نَضْرَةَ ٱلنَّعِيمِ ﴿٢٤﴾

तुम उनके चेहरों ही से राहत की ताज़गी मालूम कर लोगे

يُسْقَوْنَ مِن رَّحِيقٍۢ مَّخْتُومٍ ﴿٢٥﴾

उनको सर ब मोहर ख़ालिस शराब पिलायी जाएगी

خِتَـٰمُهُۥ مِسْكٌۭ ۚ وَفِى ذَٰلِكَ فَلْيَتَنَافَسِ ٱلْمُتَنَـٰفِسُونَ ﴿٢٦﴾

जिसकी मोहर मिश्क की होगी और उसकी तरफ अलबत्ता शायक़ीन को रग़बत करनी चाहिए

وَمِزَاجُهُۥ مِن تَسْنِيمٍ ﴿٢٧﴾

और उस (शराब) में तसनीम के पानी की आमेज़िश होगी

عَيْنًۭا يَشْرَبُ بِهَا ٱلْمُقَرَّبُونَ ﴿٢٨﴾

वह एक चश्मा है जिसमें मुक़रेबीन पियेंगे

إِنَّ ٱلَّذِينَ أَجْرَمُوا۟ كَانُوا۟ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ يَضْحَكُونَ ﴿٢٩﴾

बेशक जो गुनाहगार मोमिनों से हँसी किया करते थे

وَإِذَا مَرُّوا۟ بِهِمْ يَتَغَامَزُونَ ﴿٣٠﴾

और जब उनके पास से गुज़रते तो उन पर चशमक करते थे

وَإِذَا ٱنقَلَبُوٓا۟ إِلَىٰٓ أَهْلِهِمُ ٱنقَلَبُوا۟ فَكِهِينَ ﴿٣١﴾

और जब अपने लड़के वालों की तरफ़ लौट कर आते थे तो इतराते हुए

وَإِذَا رَأَوْهُمْ قَالُوٓا۟ إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ لَضَآلُّونَ ﴿٣٢﴾

और जब उन मोमिनीन को देखते तो कह बैठते थे कि ये तो यक़ीनी गुमराह हैं

وَمَآ أُرْسِلُوا۟ عَلَيْهِمْ حَـٰفِظِينَ ﴿٣٣﴾

हालॉकि ये लोग उन पर कुछ निगराँ बना के तो भेजे नहीं गए थे

فَٱلْيَوْمَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مِنَ ٱلْكُفَّارِ يَضْحَكُونَ ﴿٣٤﴾

तो आज (क़यामत में) ईमानदार लोग काफ़िरों से हँसी करेंगे

عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ يَنظُرُونَ ﴿٣٥﴾

(और) तख्तों पर बैठे नज़ारे करेंगे

هَلْ ثُوِّبَ ٱلْكُفَّارُ مَا كَانُوا۟ يَفْعَلُونَ ﴿٣٦﴾

कि अब तो काफ़िरों को उनके किए का पूरा पूरा बदला मिल गया

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 18 रबी अल-अव्वल
الثلاثاء 18 ربيع الأول
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 19.2 / 29.5
रोशनी 79%
10 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ