फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह पर हदीसें

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«फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह» पर 1144 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह पर हदीसों की सूची

ह़सन (नमाज़) की क़जा नहीं करेगी। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की बीवियाँ निफ़ास की दशा में चालीस रात तक बैठी रहतीं, लेकिन अल्लाह के नबी (सल्लल् सह़ीह़ यह एक ऐसी चीज़ है, जिसे अल्लाह ने आदम की बेटियों पर लिख दी है। तुम वह सारे कार्य करती जाओ, जो दूसरे हाजी करते हैं। हाँ, पाक होने से पहले अल्लाह के घर स़ह़ीह़ ऐ औरतो! तुम सदक़ा किया करो, क्योंकि मैंने जहन्नम के अंदर तुम्हारी संख्या अधिक देखी है।" औरतों ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! ऐसा क्यों है? आपने उत्तर दिय सह़ीह़ वह अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हैं कि आपने उस व्यक्ति के बारे में, जो अपनी पत्नी से माहवारी के दिनों में संभोग करे, फ़रमाय सह़ीह़ यहूदियों का मामला यह था कि जब उनके बीच किसी स्त्री को माहवारी आती, तो न उसके साथ खाते- पीते और न घरों में साथ रहते थे स़ह़ीह़ हम (मासिक धर्म से) पाक होने के बाद मटमैले और पीले रंग के पानी को कुछ शुमार नहीं करती थीं। स़ह़ीह़ तुम उतने दिन नमाज़ से रुकी रहो, जितने दिन तुम्हारा मासिक धर्म तुम्हें नमाज़ से रोकता था, फिर स्नान कर लिया करो। ह़सन ऐ अल्लाह के रसूल! मैं एक ऐसी स्त्री हूँ, जिसे लंबे समय तक अत्यधिक मात्रा में मासिक धर्म का रक्त आता है। अतः, इस संबंध में आपकी क्या राय है? इसने मुझे सह़ीह़ सुब्हानल्लाह! यह शैतान की ओर से है। वह एक टब में बैठ जाए और जब पानी के ऊपर पीलापन देखे, तो ज़ुहर तथा अस्र के लिए एक स्नान करे और मग़रिब तथा इशा के लिए ह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर हसन) इन्होंने उसे मार डाला है, अल्लाह इनका विनाश करे! जब इन्हें पता नहीं था, तो इन्होंने किसी से पूछ क्यों नहीं लिया? क्योंकि न जानने का इलाज पूछना ही है। सह़ीह़ तुमने सुन्नत को पा लिया और तुम्हारी नमाज़ तुम्हारे लिए काफ़ी हो गई सह़ीह़ पवित्र मिट्टी मुसलमान के लिए वज़ू का साधन है, चाहे दस साल ही क्यों न हो जाए। फिर जब तुझे पानी मिल जाए, तो उसे अपने शरीर पर बहा ले, क्योंकि यही उत्तम ह सह़ीह़ मेरी सहायता रोब के द्वारा की गई है, मुझे धरती की कुंजियाँ दी गई हैं, मुझे अहमद नाम दिया गया है, मेरे लिए मिट्टी को पवित्रता प्राप्त करने का साधन बनाया सह़ीह़ हमें लोगों पर तीन बातों में फ़ज़ीलत दी गई है। हमारी सफ़ों को फ़रिश्तों की सफ़ों की तरह बनाया गया है, हमारे लिए पूरी ज़मीन को मस्जिद बनाया गया है तथा ज सह़ीह़ मैं तथा अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) एक ही बर्तन से जनबात (संभोग के बाद) का स्नान कर लेते थे। हम दोनों के हाथ बारी- बारी उससे पानी लेते थ सह़ीह़ नहीं, तुम्हारे लिए बस इतना काफ़ी है कि अपने सर पर तीन चुल्लू पानी डाल लो और फिर अपने शरीर पर पानी बहा लो, इससे तुम पवित्र हो जाओगी सह़ीह़ मैंने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए स्नान का पानी रखा सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब जनाबत का स्नान करते तो पहले दोनों हाथों को धोते, फिर दाएँ हाथ से बाएँ हाथ पर पानी डालते और अपनी शर्मगाह क सह़ीह़ जब तुममें से कोई अपनी पत्नी से एक बार संभोग करने के बाद दोबारा करना चाहे, तो दोनों के बीच वज़ू कर ले ह़सन जिसने जुमे के दिन वज़ू किया, उसने सुन्नत पर अमल किया और अच्छा किया तथा जिसने स्नान किया, उसका यह कार्य उससे बेहतर है। स़ह़ीह़ जुमे के दिन हर व्यस्क व्यक्ति पर स्नान करना अनिवार्य है तथा यह कि वह दातुन करे और मिल सके तो ख़ुशबू भी लगाए। सह़ीह़ पुरुष का पानी मोटा तथा सफ़ेद होता है और स्त्री का पानी पतला तथा पीला होता है, दोनों में से जो भी प्रभावी रहे या आगे रहे, (बच्चे के अंदर) उसी की समरूपक सह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल! आपका उस व्यक्ति के बारे में क्या ख़्याल है, जिसे उसकी पत्नी से जल्दी हटा दिया जाए और उसका वीर्य न निकला हो, उसे क्या करना है? अल्लाह सह़ीह़ पेशाब (के छींटों) से बचो, क्योंकि आम तौर से क़ब्र का अज़ाब उसी के कारण होता है सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने गोबर तथा हड्डी से इस्तिंजा करने से मना किया है और कहा है: यह दोनों चीज़ें पवित्रता प्रदान नहीं करतीं स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब शौच के स्थान से निकलते, तो कहते : "غُفْرَانَكَ" अर्थात, ऐ अल्लाह! मैं तुझसे क्षमा का प्रार्थी हूँ। सह़ीह़ आपने हमें इस बात से मना किया है कि हम पाखाना तथा पेशाब के समय क़िबले की ओर मुँह करें, दाएँ हाथ से इस्तिंजा करें, तीन से कम पत्थरों से इस्तिंजा करें या सह़ीह़ "दो लानत के कामों से बचो।" लोगों ने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! ये दो लानत के काम क्या हैं? आपने फ़रमाया: जो लोगों के रास्ते या उनके साये में पाखाना करे सह़ीह़ थू, थू! इसे फेंक दो, क्या तुम नहीं जानते कि हम सदक़े की चीज़ नहीं खाते? सह़ीह़ ज़माना घूमकर आज फिर उसी हालत पर आ गया है, जो हालत उस दिन थी, जिस दिन अल्लाह ने आसमान व ज़मीन को पैदा किया था। साल के बारह महीने हैं, जिनमें चार महीने स़ह़ीह़ जब रमज़ान का महीना आता है, तो जन्नत के द्वार खोल दिए जाते हैं, जहन्नम के द्वार बंद कर दिए जाते हैं और शैतानों को बेड़ियों में जकड़ दिया जाता है। ह़सन अगर तुम महीने के तीन रोज़े रखो, तो (चाँद की) तेरहवीं, चौदहवीं और पंद्रहवीं तारीख़ों को रखो सह़ीह़ जब नमाज़ के लिए अज़ान कही जाती है, तो शैतान हवा निकालता हुआ पीठ फेरकर भाग खड़ा होता है; ताकि अज़ान की आवाज़ न सुन सके सह़ीह़ क्या अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हर महीने तीन रोज़े रखा करते थे? उन्होंने उत्तर दिया: हाँ स़ह़ीह़ क़यामत के दिन अज़ान देने वालों की गर्दनें सबसे ऊँची होंगी। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आशूरा के दिन (मुहर्रम की दसवीं तारीख़ को) रोज़ा रखा सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने यात्री के लिए तीन दिन तीन रात और ठहरे हुए व्यक्ति के लिए एक दिन एक रात निर्धारित की है सह़ीह़ कहो : السلام على أهل الديار من المؤمنين والمسلمين، ويرحم الله المستقدمين منا والمستأخرين، وإنا إن شاء الله بكم للاحقون अर्थात, इस स्थान में निवास करने सह़ीह़ जिबरील (अलैहिससलाम) उतरे और मेरी इमामत की, तो मैंने उनके पीछे नमाज़ पढ़ी, फिर उनके पीछे नमाज़ पढ़ी, फिर उनके पीछे नमाज़ पढ़ी, फिर उनके पीछे नमाज़ पढ़ी सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) (कभी- कभी) जनाबत की हालत में पानी छूए बिना सो जाते थे सह़ीह़ जुमे के दिन फ़रिश्ते मस्जिद के द्वार पर खड़े हो जाते हैं और सिलसिलेवार मस्जिद में आने वालों के नाम लिखते जाते हैं सह़ीह़ मदीने की गुज़रगाहों पर फरिश्ते नियुक्त हैं, यहाँ न ताऊन प्रवेश कर सकता है, न दज्जाल सह़ीह़ जब सूरज का किनारा दिखाई दे, तो नमाज़ पढ़ना बंद कर दो, यहाँ तक कि वह पूरे तौर पर ज़ाहिर हो जाए और जब सूरज का किनारा ग़ायब हो जाए, तो नमाज़ पढ़ना बंद कर सह़ीह़ मुझे कुछ पत्थर ला दो; उनसे मुझे इस्तिंजा करना है, मगर हड्डी तथा गोबर न लाना सह़ीह़ उसकी क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, जब भी शैतान तुम्हें (ऐ उमर!) किसी रास्ते पर चलता हुआ देखता है, तो तुम्हारा रास्ता छोड़ कर कोई और रास्ता अपना लेत सह़ीह़ मेरी उम्मत की मौत नेज़े के आघात तथा ताऊन (चेचक) से होगी सह़ीह़ जब आदम की संतान सजदे वाली आयत पढ़ती है और सजदा करती है, तो शैतान रोता हुआ दूर हट जाता है, वह कहता है: हाय मेरी बरबादी! आदम की संतान को सजदे का आदेश दि सह़ीह़ ज़ुहर का समय, सूरज ढलने से आदमी का साया उसके क़द के बराबर होने यानी अस्र का समय प्रवेश करने तक रहता है, अस्र का समय सूरज में पीलापन आने तक रहता है, मग सह़ीह़ हम अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ मगरिब की नमाज़ पढ़ते थे और जब हममें से कोई वापस जाता (और तीर फैंकता) तो वह तीर के गिरने की जगहों को सह़ीह़ यही इस नमाज़ का उत्तम समय है, यदि मैं अपनी उम्मत को कठिनाई में न डाल रहा होता तो सह़ीह़ सुबह की नमाज़ सुबह होने के बाद ही पढ़ो; क्योंकि इससे तुम्हें अधिक नेकी मिलती है, या कहा कि इससे नेकी अधिक मिलती है सह़ीह़ जिसने सूरज निकलने से पहले सुबह की एक रकात पाई, उसने सुबह की नमाज़ पा ली और जिसने सूरज डूबने से पहले अस्र की एक रकत पाई, उसने अस्र की नमाज़ पा ली स़ह़ीह़ कोई स्त्री दो दिन की दूरी के सफर पर उस समय तक न निकले, जब तक उसके साथ उसका पति या कोई महरम (ऐसा रिश्तेदार जिसके साथ कभी शादी न हो सकती हो) न हो स़ह़ीह़ तीन समय ऐसे हैं, जिनमें अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमें नमाज़ पढ़ने अथवा अपने मुर्दों को दफ़नाने से मना करते थे सह़ीह़ किसी को रात या दिन के जिस भाग में चाहे, इस घर का तवाफ़ (परिक्रमा) करने या इसमें नमाज़ पढ़ने से न रोको सह़ीह़ फ़ज्रें दो हैं: जहाँ तक उस फ़ज्र की बात है, जो भेड़िए की दुम की तरह प्रकट होती है, तो न उसमें (फ़ज्र की) नमाज़ पढ़ना हलाल है और न उससे सहरी करना हराम सह़ीह़ तुममें से जो लोग उपस्थित हैं, वे अनुपस्थित लोगों को यह बात पहुँचा दें कि फ़ज्र के बाद दो रकातों के सिवा कोई नमाज़ न पढ़ो सह़ीह़ यह, अल्लाह ने चाहा तो, एक सच्चा स्वप्न है, अतः तुम बिलाल के साथ खड़े हो जाओ और जो कुछ देखा है, उसे बताओ, वह उन शब्दों द्वारा अज़ान दे, क्योंकि उसकी आव सह़ीह़ सुन्नत यह है कि अज़ान देने वाला फ़ज्र की अज़ान में 'हय्या अलल-फ़लाह' के बाद 'अस-सलातु ख़ैरुम-मिनन-नौम' (नमाज़ नींद से बेहतर है) कहे सह़ीह़ मैंने बिलाल (रज़ियल्लाहु अनहु) को देखा कि अबतह की ओर निकले और अज़ान दी। जब 'हय्या अलस-सलाह', 'हय्या अलल-फ़लाह' तक पहुँचे, तो अपनी गर्दन को दाएँ और बाए
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
سبحان الله अल्लाह की पवित्रता है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद