जिसने अमानत की क़सम खाई, वह हममें से नहीं है।
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हदीस वर्णनकर्ता: इस ह़दीस़ को अबू दावूद और अह़मद ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: जिसने अमानत की क़सम खाई, वह हममें से नहीं है।
हदीस की व्याख्या: जिसने अमानत की क़सम खाई, वह हममें से नहीं है।
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अमानत की क़सम खाने से मना और सावधान किया है तथा बताया है कि ऐसा करने वाला हम में से नहीं है।
सीख: जिसने अमानत की क़सम खाई, वह हममें से नहीं है।
- अल्लाह को छोड़ किसी और की क़सम खाना हराम है, जिसमें अमानत की क़सम खाना भी है। अमानत की क़सम खाना छोटा शिर्क है।
- अमानत के अंदर अनुसरण, इबादत, किसी के पास सुरक्षा के लिए रखा गया सामान, नक़दी और अमान देना आदि शामिल हैं।
- क़सम उसी समय मान्य होगी, जब अल्लाह की, उसके किसी नाम की या उसके किसी गुण की खाई जाए।
- ख़त्ताबी कहते हैं : यह नापसंदीदगी इस बिना पर हो सकती है कि शरीयत ने अल्लाह और उसके गुणों की क़सम खाने का आदेश दिया है और अमानत उसका गुण नहीं, बल्कि उसका आदेश और उसकी ओर से अनिवार्य किया हुआ एक कार्य है। अतः इससे मना कर दिया गया, क्योंकि यह अल्लाह के आदेशों और उसके अनिवार्य किए हुए कार्यों को उसके नामों एवं गुणों के समान बताने जैसा है।
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मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
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अल्लाह की महिमा और स्तुति है