तहारत (पवित्रता प्राप्त करना) पर हदीसें

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«तहारत (पवित्रता प्राप्त करना)» पर 132 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

तहारत (पवित्रता प्राप्त करना) पर हदीसों की सूची

ह़सन (नमाज़) की क़जा नहीं करेगी। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की बीवियाँ निफ़ास की दशा में चालीस रात तक बैठी रहतीं, लेकिन अल्लाह के नबी (सल्लल् सह़ीह़ वह अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हैं कि आपने उस व्यक्ति के बारे में, जो अपनी पत्नी से माहवारी के दिनों में संभोग करे, फ़रमाय सह़ीह़ यहूदियों का मामला यह था कि जब उनके बीच किसी स्त्री को माहवारी आती, तो न उसके साथ खाते- पीते और न घरों में साथ रहते थे स़ह़ीह़ हम (मासिक धर्म से) पाक होने के बाद मटमैले और पीले रंग के पानी को कुछ शुमार नहीं करती थीं। स़ह़ीह़ तुम उतने दिन नमाज़ से रुकी रहो, जितने दिन तुम्हारा मासिक धर्म तुम्हें नमाज़ से रोकता था, फिर स्नान कर लिया करो। ह़सन ऐ अल्लाह के रसूल! मैं एक ऐसी स्त्री हूँ, जिसे लंबे समय तक अत्यधिक मात्रा में मासिक धर्म का रक्त आता है। अतः, इस संबंध में आपकी क्या राय है? इसने मुझे सह़ीह़ सुब्हानल्लाह! यह शैतान की ओर से है। वह एक टब में बैठ जाए और जब पानी के ऊपर पीलापन देखे, तो ज़ुहर तथा अस्र के लिए एक स्नान करे और मग़रिब तथा इशा के लिए ह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर हसन) इन्होंने उसे मार डाला है, अल्लाह इनका विनाश करे! जब इन्हें पता नहीं था, तो इन्होंने किसी से पूछ क्यों नहीं लिया? क्योंकि न जानने का इलाज पूछना ही है। सह़ीह़ तुमने सुन्नत को पा लिया और तुम्हारी नमाज़ तुम्हारे लिए काफ़ी हो गई सह़ीह़ पवित्र मिट्टी मुसलमान के लिए वज़ू का साधन है, चाहे दस साल ही क्यों न हो जाए। फिर जब तुझे पानी मिल जाए, तो उसे अपने शरीर पर बहा ले, क्योंकि यही उत्तम ह सह़ीह़ मेरी सहायता रोब के द्वारा की गई है, मुझे धरती की कुंजियाँ दी गई हैं, मुझे अहमद नाम दिया गया है, मेरे लिए मिट्टी को पवित्रता प्राप्त करने का साधन बनाया सह़ीह़ हमें लोगों पर तीन बातों में फ़ज़ीलत दी गई है। हमारी सफ़ों को फ़रिश्तों की सफ़ों की तरह बनाया गया है, हमारे लिए पूरी ज़मीन को मस्जिद बनाया गया है तथा ज सह़ीह़ मैं तथा अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) एक ही बर्तन से जनबात (संभोग के बाद) का स्नान कर लेते थे। हम दोनों के हाथ बारी- बारी उससे पानी लेते थ सह़ीह़ नहीं, तुम्हारे लिए बस इतना काफ़ी है कि अपने सर पर तीन चुल्लू पानी डाल लो और फिर अपने शरीर पर पानी बहा लो, इससे तुम पवित्र हो जाओगी सह़ीह़ मैंने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए स्नान का पानी रखा सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब जनाबत का स्नान करते तो पहले दोनों हाथों को धोते, फिर दाएँ हाथ से बाएँ हाथ पर पानी डालते और अपनी शर्मगाह क सह़ीह़ जब तुममें से कोई अपनी पत्नी से एक बार संभोग करने के बाद दोबारा करना चाहे, तो दोनों के बीच वज़ू कर ले ह़सन जिसने जुमे के दिन वज़ू किया, उसने सुन्नत पर अमल किया और अच्छा किया तथा जिसने स्नान किया, उसका यह कार्य उससे बेहतर है। सह़ीह़ पुरुष का पानी मोटा तथा सफ़ेद होता है और स्त्री का पानी पतला तथा पीला होता है, दोनों में से जो भी प्रभावी रहे या आगे रहे, (बच्चे के अंदर) उसी की समरूपक सह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल! आपका उस व्यक्ति के बारे में क्या ख़्याल है, जिसे उसकी पत्नी से जल्दी हटा दिया जाए और उसका वीर्य न निकला हो, उसे क्या करना है? अल्लाह सह़ीह़ पेशाब (के छींटों) से बचो, क्योंकि आम तौर से क़ब्र का अज़ाब उसी के कारण होता है सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने गोबर तथा हड्डी से इस्तिंजा करने से मना किया है और कहा है: यह दोनों चीज़ें पवित्रता प्रदान नहीं करतीं स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब शौच के स्थान से निकलते, तो कहते : "غُفْرَانَكَ" अर्थात, ऐ अल्लाह! मैं तुझसे क्षमा का प्रार्थी हूँ। सह़ीह़ आपने हमें इस बात से मना किया है कि हम पाखाना तथा पेशाब के समय क़िबले की ओर मुँह करें, दाएँ हाथ से इस्तिंजा करें, तीन से कम पत्थरों से इस्तिंजा करें या सह़ीह़ "दो लानत के कामों से बचो।" लोगों ने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! ये दो लानत के काम क्या हैं? आपने फ़रमाया: जो लोगों के रास्ते या उनके साये में पाखाना करे सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने यात्री के लिए तीन दिन तीन रात और ठहरे हुए व्यक्ति के लिए एक दिन एक रात निर्धारित की है सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) (कभी- कभी) जनाबत की हालत में पानी छूए बिना सो जाते थे सह़ीह़ मुझे कुछ पत्थर ला दो; उनसे मुझे इस्तिंजा करना है, मगर हड्डी तथा गोबर न लाना सह़ीह़ जब कोई व्यक्ति अपने जूतों से गंदी रौंदे, तो उन्हें पाक करने वाली वस्तु मिट्टी है। ह़सन नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मुसाफ़िर के लिए तीन दिन तथा तीन रात एवं घर पर रहने वाले के लिए एक दिन एवं एक रात इस बात की छूट दी है कि जब वह वज़ू क सह़ीह़ ऐ आइशा ! मेरी आंखें तो सो जाती हैं मगर मेरा दिल नहीं सोता। सह़ीह़ क्या आप मुझ से अल्लाह के -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के रोग के संबंध में नहीं बताएंगीं? उन्होंने कहाः क्यों नहीं, जब आप बीमार थे तो आप ने पूछाः क्या लो स़ह़ीह़ इन्हें रहने दो; क्योंकि मैंने इन्हें वज़ू की हालत में पहने थे। सह़ीह़ एक दिन मैं हफ़सा के घर की छत पर चढ़ा, तो देखा कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) शाम (प्रांत) की ओर मुँह करके तथा काबा की ओर पीठ करके शौच कर रहे हैं। स़ह़ीह़ यह एक रग का रक्त है। केवल उतने ही दिन नमाज़ छोड़ो, जितने दिन इससे पहले माहवारी आया करती थी। फिर स्नान कर लो और नमाज़ पढ़ो। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम) शौच के लिए जाते, तो मैं और मेरे जैसा एक और लड़का पानी का बरतन और एक छोटी-सी बरछी लेकर साथ हो जाते। तब आप उस स़ह़ीह़ जब तुममें से कोई वज़ू करे, तो अपनी नाक में पानी डालकर नाक झाड़े, और जो ढेलों से इस्तिंजा (शौच या मूत्र से पवित्रता अर्जन) करे, वह बेजोड़ (विषम) संख्या सह़ीह़ एक देहाती आया और मस्जिद के एक किनारे में पेशाब करने लगा सह़ीह़ उम्मे हबीबा (रज़ियल्लाहु अंहा) सात साल तक इस्तिहाज़ा (वह रक्त जो स्त्री को माहवारी के अतिरिक्त बीमारी के कारण आता है) का शिकार रहीं। अतः, रसूलुल्लाह ( सह़ीह़ तुममें से कोई ठहरे हुए पानी में, जो बहता न हो, पेशाब न करे कि फिर उससे नहाए भी। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक आदमी को देखा, जिसने लोगों के साथ नमाज़ नहीं पढ़ी थी और सबसे अलग था। आपने फ़रमायाः "ऐ अमुक, आख़िर क्या स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब रात में सोकर उठते, तो अपने मुँह को मिसवाक से रगड़कर साफ़ करते। स़ह़ीह़ मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ मौजूद था। आप एक ऐसी जगह पहुँचे, जहाँ लोग कूड़ा-करकट फेंका करते हैं और आपने खड़े होकर पेशाब किया। सह़ीह़ मैं जुंबी -अपवित्र- था। अतः मुझे अच्छा नहीं लगा कि अपवित्रता की अवस्था में आपके पास बैठूँ! तो आपने फरमायाः सुबहानल्लाह! मोमिन नापाक -अपवित्र- नहीं होत स़ह़ीह़ ''जब तुम शौच के लिए जाओ, तो पेशाब तथा पाखाना करते समय न क़िबला की ओर मुँह करो, न उसकी ओर पीठ ही करो; बल्कि पूरब अथवा पश्चिम की ओर मुँह कर लो।'' स़ह़ीह़ तुममें से कोई व्यक्ति पेशाब करते समय अपने लिंग को दाएँ हाथ से न पकड़े तथा दाएँ हाथ से इस्तिंजा (पेशाब-पाखाना से पवित्रता प्राप्त) न करे एवं कुछ पीते स स़ह़ीह़ जब तुममें से किसी के बरतन में से कुत्ता पी ले, तो वह उसे सात बार धोए। स़ह़ीह़ पाँच चीज़ें (मानव) प्रकृति (का हिस्सा) हैं ; ख़त्ना करना, नाभी के नीचे के बाल मूँडना, मूँछें छोटी करना, नाख़ून काटना और बग़ल के बाल उखाड़ना। स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब शौचालय जाते, तो कहते : "اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الخُبُثِ وَالخَبَائِثِ" (ऐ अल्लाह! मैं नापाक जिन स़ह़ीह़ मूँछें कतरवाओ और दाढ़ी बढ़ाओ। स़ह़ीह़ जब कोई मुस्लिम या मोमिन बंदा वज़ू करता है और अपना चेहरा धोता है, तो उसके चेहरे से वह सारे गुनाह पानी के साथ या पानी की अंतिम बूँद के साथ निकल जाते हैं स़ह़ीह़ जनाबत (स्वप्नदोष, सह्वास या किसी भी कारणवश वीर्यस्खलन हो जाने से होने वाली अपवित्रता से पवित्र होने) का स्नान करने का तरीक़ा स़ह़ीह़ जिसने मेरे इस वज़ू की तरह वज़ू किया और उसके बाद दो रकात नमाज़ पढ़ी, जिसमें उसने अपने जी में कोई बात न की, अल्लाह उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर देता है स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब जनाबत का स्नान करते, तो अपने दोनों हाथों को धोते, फिर नमाज़ के वज़ू की तरह वज़ू करते, फिर स्नान करते स़ह़ीह़ मैं एक ऐसा व्यक्ति था, जिसे बहुत ज़्यादा मज़ी (चिपचिपा सफ़ेद तरल जो पेशाब के रास्ते से) आती थी। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दामाद होने सह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल, अल्लाह हक़ बात से शर्माता नहीं है। यदि स्त्री का स्वप्नदोष हो जाए, तो क्या उसपर स्नान है? अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सह़ीह़ जब तुम वस्त्र धारण करो अथवा वज़ू करो तो दाहिने ओर से प्रारंभ करो सह़ीह़ क़यामत के दिन मोमिन का ज़ेवर वहाँ तक पहुँचेगा, जहाँ तक वज़ू का पानी का पहुँचेगा। सह़ीह़ मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के कपड़े से जनाबत को धो देती, फिर आप नमाज़ के लिए नकल जाते, जबकि पानी का निशान आपके कपड़े पर दिखाई पड़ता। स़ह़ीह़ उन्हें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की तरह वज़ू करके दिखाया
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.6 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद