अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सजदे की हालत में यह दुआ किया करते थे : “हे अल्ला…
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सजदे की हालत…
हदीस की व्याख्या: अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सजदे की हालत…
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सजदे में यह दुआ किया करते थे : "اللهم اغفر لي ذنبي" यानी ऐ अल्लाह! मेरे सारे गुनाहों को क्षमा कर दे, उनपर पर्दा डाल दे और मुझे उनके कुप्रभावों से बचाए रख। "كله" सारे गुनाह, "دِقّه" छोटे और कम गुनाह "وجِلّه" तथा बड़े और अधिक गुनाह "وأوله" पहले गुनाह, "وآخره" अंतिम गुनाह और बीच के सारे गुनाह "علانيته وسره" खुले और छुपे गुनाह, जिन्हें तेरे सिवा कोई नहीं जानता।
सीख: अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सजदे की हालत…
- इब्न-ए-क़ैयिम कहते हैं : छोटे और बड़े, कम और ज़्यादा, पहले और बाद के तथा छुपे और खुले तमाम गुनाहों से व्यापक अंदाज़ में क्षमा इसलिए माँगी गई है, ताकि सभी गुनाहों से तौबा हो जाए। बंदा जिन्हें जानता है उनसे भी और जिन्हें नहीं जानता उनसे भी।
- कहा गया है : आपने 'الجِلّ' से पहले 'الدِّق' का ज़िक्र इसलिए किया है कि माँगने वाला माँगते समय दर्जा-ब-दर्जा आगे बढ़ता है। दूसरी बात यह है कि बड़े गुनाह आम तौर पर छोटे गुनाहों पर आग्रह एवं उनके बारे में लापरवाही के नतीजे ही में सामने आते हैं। इसलिए हम कह सकते हैं कि छोटे पाप ही बड़े पापों का ज़रिया हैं और ज़रिया का ज़िक्र पहले किया जाना चाहिए।
- इन्सान को विनम्रता के साथ अल्लाह से छोटे-बड़े सभी पापों के लिए क्षमा माँगनी चाहिए।
- नववी कहते हैं : इस हदीस में बार-बार दुआ करने और दुआ के शब्दों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने की प्रेरणा दी गई है, यद्यपि उसके कुछ शब्द कुछ से बेनियाज़ कर देते हों।
श्रेणियाँ :
दुआओं तथा अज़कार पर आधारित फ़िक़्ह
· नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ज़िक्र का तरीक़ा
· फ़ज़ीलतें तथा आदाब
بسم الله الرحمن الرحيم
मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
سبحان الله وبحمده
अल्लाह की महिमा और स्तुति है