शरई आदाब पर हदीसें

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«शरई आदाब» पर 192 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

शरई आदाब पर हदीसों की सूची

स़ह़ीह़ मुसलमान वह है, जिसकी ज़बान और हाथ से मुसलमान सुरक्षित रहें और मुहाजिर वह है, जो अल्लाह की मना की हुई चीज़ें छोड़ दे। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने (खाने के बाद) उँगलियों तथा प्लेट को चाट लेने का आदेश दिया है तथा फ़रमाया है: तुम नहीं जानते कि भोजन के कि इसकी सनद सह़ीह़ है। तुम्हारे यहाँ रोज़ेदार इफ़तार किया करें, तुम्हारा खाना नेक लोग खाएँ और फ़रिश्ते तुम्हारे लिए दुआ करें सह़ीह़ अल्लाह ज्ञान को लोगों से छीनकर नहीं उठाएगा, बल्कि वह ज्ञान को बंदों से उलेमा को मौत देकर उठाएगा सह़ीह़ तुमने स्वप्नफल कुछ सही बताया है और कुछ ग़लत। सह़ीह़ कुरआन के संबंध में वाद-विवाद न करो, क्योंकि इसके विषय में वाद-विवाद करना कुफ़्र है। सह़ीह़ उन लोगों के समीप अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से अधिक प्रिय कोई भी नहीं था, (इसके बावजूद) वह लोग आप को देख कर खड़े नहीं होते थे क्योंकि व सह़ीह़ नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मेरी देखभाल के लिए तशरीफ लाये । न ख़च्चर पर सवार थे, और न घोड़े पर (बल्कि पैदल तशरीफ लाये) । सह़ीह़ फ़लाँ नमाज़ को फ़लाँ समय में पढ़ो और फ़लाँ नमाज़ को फ़लाँ समय में पढ़ो,जब नमाज़ का समय हो जाए तो तुम में से एक व्यक्ति अज़ान दे तथा तुम में से जो क़ुर सह़ीह़ जब तुम में से कोई खाना खा चुके, तो अपना हाथ चाटे अथवा चटवाए बिना साफ़ किए। स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हमें सात बातों का आदेश दिया है और सात जीचों से रोका है सह़ीह़ अल्लाह के रसूल- सल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने सोने की एक अँगूठी बनवाई। सह़ीह़ हर वह पेय पदार्थ हराम है, जिसमें नशा हो। सह़ीह़ शराब हराम की गई, वह पाँच वस्तुओं से बनती थीः अंगूर, खजूर, मधु, गेहूँ और जौ से। स़ह़ीह़ न रेशम पहनो और न दीबाज (मोटे रेशमी वस्त्र)। न सोने-चाँदी के बरतन में पियो और न उनकी थाली में खाओ। क्योंकि यह वस्तुएँ दुनिया में उन (काफ़िरों) के लिए ह स़ह़ीह़ जिसने दुनिया में रेशमी वस्त्र पहना, वह उसे आख़िरत में नहीं पहनेगा। सह़ीह़ यदि कोई व्यक्ति तुम्हारी अनुमति के बिना तुम्हें झाँके और तुम कंकड़ मारकर उसकी आँख फोड़ दो, तो तुम्हें कोई गुनाह न होगा सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दो अथवा तीन अथवा चार अंगुल समान रेशम पहनने की अनुमति दी है सह़ीह़ क्या मैं तुम्हें उन तीन व्यक्तियों के बारे में न बताऊँ? उनमें से एक ने अल्लाह की शरण ली, तो अल्लाह ने उसे अपनी शरण दे दी। दूसरा शरमाया, तो अल्लाह ने भ सह़ीह़ आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया कि कह लिया करोः اللهم فاطِرَ السماوات والأرض عالم الغيبِ والشهادة، ربَّ كُلِّ شَيءٍ ومَلِيكَه، أَشْهد أن لا إ स़ह़ीह़ इन्हें रहने दो; क्योंकि मैंने इन्हें वज़ू की हालत में पहने थे। स़ह़ीह़ जब कोई अपने भाई से मोहब्बत रखे, तो उसे बता दे कि वह उससे मोहब्बत रखता है। सह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हममें से कोई जनाबत (नापाकी) की अवस्था में सो सकता है? आपने फ़रमायाः हाँ, जब तुममें से कोई वज़ू कर ले, तो सो सकता है। स़ह़ीह़ जब तुममें से कोई वज़ू करे, तो अपनी नाक में पानी डालकर नाक झाड़े, और जो ढेलों से इस्तिंजा (शौच या मूत्र से पवित्रता अर्जन) करे, वह बेजोड़ (विषम) संख्या सह़ीह़ जो अल्लाह पर तथा क़यामत के दिन पर ईमान रखता हो, वह अतिथि का सम्मान करने के मामले में उसका हक़ अदा करे। सहाबा ने कहाः उसका हक़ क्या है, ऐ अल्लाह के रसू सह़ीह़ मैं तेरे धर्म, तेरी अमानत और तेरे अंतिम कर्मों को अल्लाह के हवाले करता हूँ। सह़ीह़ मैंने अपने मन में सोचा कि आज मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का द्वारपाल बनने का सौभाग्य प्राप्त करूँगा। इतने में अबू बक्र (रज़ियल्लाहु स़ह़ीह़ तुममें से कोई व्यक्ति पेशाब करते समय अपने लिंग को दाएँ हाथ से न पकड़े तथा दाएँ हाथ से इस्तिंजा (पेशाब-पाखाना से पवित्रता प्राप्त) न करे एवं कुछ पीते स सह़ीह़ अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपनी सवारी की पीठ पर नफ़ल नमाज़ पढ़ लिया करते थे, चाहे आपका मुँह जिधर भी होता। आप अपने सिर से इशारा करते थे। सह़ीह़ नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के समय में मैं छोटा च्चा था, और मुझे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की कुछ बातें याद होती थीं, परन्तु, उन्हें बयान करने से सह़ीह़ अतः, जो भी बंदा प्लेग से ग्रस्त हो जाय और धैर्य के साथ तथा सवाब की आशा में अपने नगर में ठहरा रहे, तथा यह विश्वास रखे कि उसे वही पहुँच सकता है, जो अल्ल ह़सन जब तुममें से कोई सभा में आए, तो सलाम करे और जब सभा से निकलना चाहे तो सलाम करे, क्योंकि पहला सलाम दूसरे से अधिक हक़दार नहीं है। सह़ीह़ लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों से मिलकर सह़ीह़) जब हम लोग नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आते, तो जिसको मजलिस के अंत में जहाँ स्थान मिलता, वहीं बैठ जाता। सह़ीह़ सबसे अधिक मजलिस वह है, जो ज़्यादा कुशादा अर्थात चौड़ा हो। स़ह़ीह़ जब तुममें से कोई व्यक्ति ऐसा सपना देखे, जो उसे अच्छा लगे, तो (जान ले कि) यह सपना अल्लाह की ओर से है। अतः उसपर अल्लाह की प्रशंसा करे और उसे (लागों को) स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब छींकते, तो अपना हाथ या कपड़ा अपने मुँह पर रख लेते और अपनी आवाज़ धीमी (या नीची) रखते। सह़ीह़ जब तुम वस्त्र धारण करो अथवा वज़ू करो तो दाहिने ओर से प्रारंभ करो स़ह़ीह़ एक व्यक्ति ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास बाएँ हाथ से खाना खाया, तो आपने कहा : "दाएँ हाथ से खा।" वह बोला : मैं इसकी ताक़त नहीं रखता। सह़ीह़ यह कौन होता है मुझपर क़सम उठाने वाला कि मैं अमुक व्यक्ति को क्षमा नहीं करूँगा? मैंने उसे क्षमा कर दिया और तेरे कर्मों को व्यर्थ कर दिया। सह़ीह़ जब तुममें से कोई छींके, तो 'अल-हम्दु लिल्लाह' (सारी प्रशंसा अल्लाह की हैं) कहे और उसका भाई अथवा उसका साथी 'यरहमुकल्लाह' (अल्लाह तुझपर दया करे) कहे। फि ह़सन जो किसी बीमार व्यक्ति का हाल जानने जाता है या अपने किसी भाई से अल्लाह के लिए मिलने जाता है, तो एक पुकारने वाला उसे यह कहकर पुकारता है कि तुझे मुबारक ह सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब कोई बात कहते, तो तीन बार कहते, ताकि आपकी बात को ठीक से समझ लिया जाए और जब किसी समूह के पास जाते और उन्हें सलाम करते, ह़सन तुम केवल ईमान वाले के साथ रहो और तुम्हारा खाना केवल सदाचारी व्यक्ति खाए। सह़ीह़ कोई बंदा एक बात करता है और उसमें सोच-विचार नहीं करता, जिसके कारण वह जहन्नम के गढ़े में उससे कहीं अधिक दूर जा गिरता है, जितनी दूरी पूरब और पश्चिम के बी सह़ीह़ जब खाते समय अल्लाह का नाम न लिया जाए तो उस खाने में शैतान शामिल हो जाता है। वही इस बच्ची को लाया था, ताकि इसके माध्यम से खाने में शरीक हो जाए। अतः, मै स़ह़ीह़ जब तुममें से कोई अपने भाई से मिले, तो उसे सलाम करे। फिर, अगर दोनों के बीच पेड़, दीवार या पत्थर आ जाए और वह उससे (दोबारा) मिले, तो फिर उसे सलाम करे। सह़ीह़ जब अल्लाह ने आदम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को पैदा किया तो कहा कि जाओ और उन (बैठे हुए फ़रिश्तों) को सलाम करो और सुनो कि वे क्या उत्तर देते हैं, क्यों सह़ीह़ जब दुनिया की समाप्ति का समय निकट आ जाएगा तो मोमिन का स्वप्न मुश्किल ही से झूठा निकलेगा। तथा मोमिन का स्वप्न नबुव्वत (ईशदौत्य) के छयालीस भागों में से ए सह़ीह़ जब आदम की संतान सुबह करती है, तो उसके शरीर के सारे अंग ज़बान से विनम्रतापूर्वक कहते हैंः हमारे बारे में अल्लाह से डर। हम तो तुझसे ही संबद्ध हैं; तू सी सह़ीह़ ऐ अबू बत्न, हम केवल शांति स्थापित करने के लिए जाते हैं और इसी लिए हर मिलने वाले को सलाम करते हैं। स़ह़ीह़ अच्छा सपना अल्लाह की ओर से है और बुरा सपना शैतान की ओर से। अतः जब तुम में से कोई व्यक्ति डरावना सपना देखे, तो तीन बार बाएँ ओर थुत्कारे और उस सपने की ब ह़सन एक व्यक्ति अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया और कहा : 'अस्सलामु अलैकुम' (आपपर शांति अवतरित हो)। आपने उसके सलाम का उत्तर दिया और वह ब स़ह़ीह़ मैंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! मुक्ति क्या है? आपने उत्तर दिया : "अपनी ज़बान पर नियंत्रण रखो, अपने घर के अंदर ही रहा करो और अपने गुनाहों पर रोया करो। दोनों रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़ बंदा अल्लाह तआला को प्रसन्न करने वाली कोई बात करता है और उसे कोई महत्व नहीं देता, परन्तु उसके कारण अल्लाह उसकी श्रेणियों को बढ़ा देता है। इसी तरह, बंद सह़ीह़ लोगों में अल्लाह से सबसे निकट वह व्यक्ति है, जो उन्हें सलाम करने में पहल करे सह़ीह़ सबसे बड़ी झूठी बातों में से यह है कि आदमी अपने पिता के अलावा किसी और से संबंध जोड़े या अपनी आँख को वह दिखाए जो उसने देखा न हो या अल्लाह के रसूल- सल्लल सह़ीह़ एक व्यक्ति ने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आने की अनुमति माँगी, तो फ़रमायाः उसे आने दो, वह अपने क़बीले का बहुत बुरा व्यक्ति है स़ह़ीह़ मुझे कोई ऐसा कर्म बताएँ कि उसे करूँ, तो जन्नत में दाखिल हो जाऊँ। फ़रमाया : "अल्लाह की इबादत करो, किसी को उसका साझी न बनाओ, फ़र्ज़ नमाज़ कायम करो, फ़र् स़ह़ीह़ एक मुसलमान के दूसरे मुसलमान पर पाँच अधिकार हैं; सलाम का उत्तर देना, बीमार व्यक्ति का हाल जानने के लिए जाना, जनाज़े के पीछे चलना, निमंत्रण स्वीकार करना सह़ीह़ हम दूध में से अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का हिस्सा उठाकर रख लेते थे। आप रात को आते और धीरे से सलाम करते ताकि सोने वाला तो न जागे, परन्तु
بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 16.6 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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