अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के गुण तथा आचरण पर हदीसें

इस्लाम > Hi > हदीस > अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के गुण तथा आचरण

«अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के गुण तथा आचरण» पर 100 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के गुण तथा आचरण पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ एक खुजूर का तना था, जिसपर खड़े होकर अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जुमा का प्रवचन देते थे। फिर जब मिंबर रखा गया तो हमने उस तने से दस माह की सह़ीह़ मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ जा रहा था और आपके शरीर पर एक मोटे किनारे वाली नजरानी चादर थी। इसी बीच, आपको एक देहाती मिला और बड़ सह़ीह़ निश्चय अल्लाह ने मुझे एक शरीफ़ बंदा बनाया है। मुझे अभिमानी और विद्वेषी नहीं बनाया है। सह़ीह़ मेरे पास जो माल होगा, उसे तुम लोगों से बचाकर नहीं रखूँगा। लेकिन याद रखो, जो माँगने से बचेगा, अल्लाह उसे माँगने से बचाएगा, जो बेनियाज़ी दिखाएगा, अल्लाह सह़ीह़ मेरा और तुम्हार उदाहरण उस व्यक्ति की तरह है, जिसने आग जलाई, तो टिड्डे तथा पतिंगे उसमें गिरने लगे और वह उन्हें उससे रोकने लगे। (बिलकुल उसी तरह) मैं तुम सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक क़ब्र पर मुर्दे को दफ़नाए जाने के बाद नमाज़ पढ़ी और चार तकबीरें कहीं। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जुमा के दिन फ़ज्र की नमाज़ में "الم تَنْزِيلُ السَّجْدَةَ" और هَلْ أتى" على الإنسان" पढ़ते थे। स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह! जो व्यक्ति मेरी उम्मत की कोई ज़िम्मेवारी हाथ में ले, फिर वह उन्हें कठिनाई में डाले, तो तू उसे कठिनाई में डाल। और जो मेरी उम्मत की कोई ज़िम्म सह़ीह़ जो दया नहीं करता, उसपर दया नहीं की जाती। सह़ीह़ ऐ जिबरील, मुहम्मद के पास जाओ और बता दो कि हम आपको आपकी उम्मत के बारे में प्रसन्न कर देंगे और आपको नाराज़ नहीं होने देंगे। सह़ीह़ एक महिला अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास एक बुनी हुई धारीदार चादर लेकर आईं सह़ीह़ मदीने की दासियों में से कोई दासी नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का हाथ पकड़ लेती और आपको जहाँ चाहती, ले जाती। सह़ीह़ मुझे मेरी चादर ला दो। देखो, यदि मेरे पास इस काँटेदार पेड़ के समान भी जानवर होते, तो मैं उन्हें तुम्हारे बीच बाँट देता। फिर तुम मुझे कंजूस एवं झूठा तथा सह़ीह़ उसे छोड़ दो और उसके पेशाब पर एक डोल पानी बहा दो। क्योंकि तुम आसानी पैदा करने के लिए भेजे गए हो। तुम्हें सख़्ती करने के लिए नहीं भेजा गया है। सह़ीह़ इन लोगों ने मुझे दो ही विकल्प दिए : या तो वे ज़िद और हठ के साथ माँगते रहें या फिर मुझे कंजूस कहें। जबकि मैं कंजूस नहीं हूँ। सह़ीह़ तुम्हारे पति के निकट तुम्हारे मान-सम्मान में कोई कमी नहीं है। यदि तुम चाहो, तो मैं तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा। और अगर तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा, तो सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मीठी चीज़ें और मधु पसंद करते थे। सामान्यतः जब अस्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो एक-एक कर अपनी पत्नियों के पास जाते सह़ीह़ जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी यात्रा में निकलने का इरादा करते, तो अपनी पत्नियों के बीच क़ुरआ अंदाज़ी करते और जिसका नाम निकलता उसे सह़ीह़ मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ नमाज़ पढ़ा करता था, तो आपकी नमाज़ भी संतुलित हुआ करती थी और आपका ख़ुतबा भी। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- लगातार कई-कई रात भूखे पेट गुज़ार देते और आपके घर वालों को भी रात का खाना नसीब नहीं होता। उनकी रोटी अधिकतर जौ सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक यहूदी से खाने की वस्तु ख़रीदी और उसके पास अपना लोहे का कवच गिरवी रख दिया। स़ह़ीह़ कुछ लोगों को क्या हो गया है कि वह इस प्रकार की बात करने लगे हैं। मैं तो नमाज़ भी पढ़ता हूँ और सोता भी हूँ। कभी रोज़ा रखता हूँ, कभी नहीं भी रखता। औरतों स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सब लोगों से ज़्यादा दानी थे। खासकर रमज़ान में जब जिबरील अलैहिस्सलाम से आपकी मुलाक़ात होती तो और अधिक दानी हो ज स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सबसे उत्तम चरित्र के इनसान थे। सह़ीह़ एक यहूदी लड़का अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सेवा किया करता था। सह़ीह़ यदि मुझे बकरी के पाये तथा बाँह का गोश्त खाने के लिए बुलाया जाए तो स्वीकार कर लूँगा सह़ीह़ मैंने किसी मोटे और महीन रेशम को नहीं छुआ है, जो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के हाथ से अधिक मुलायम हो स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को जब भी दो चीज़ों में से किसी एक का चयन करना होता, तो आप हमेशा दोनों में से अधिक आसान का चयन करते, जब तक कि सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कभी किसी को अपने हाथ से नहीं मारा। इसी तरह किसी महिला तथा दास पर भी हाथ नहीं उठाया। यह और बात है कि अल्ला स़ह़ीह़ नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब फ़ज्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो अपनी नमाज़ की जगह पर बैठे रहते, यहाँ तक कि सूरज अच्छी तरह निकल आता स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह! मैं तो बस एक मनुष्य हूँ। अतः, जिस किसी मुसलमान को मैंने बुरा-भला कहा हो, उसपर लानत भेजी हो या उसे कोड़े मारे हों, तो तू इसे उसके लिए शुद्धि स़ह़ीह़ मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के घर वालों ने एक दिन में कभी दो बार पेट भरकर भोजन नहीं किया, परंतु उनमें से एक बार का भोजन अनिवार्य रूप से खजूर होता स़ह़ीह़ जब से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मदीना तशरीफ लाए, आपके घर वालों ने तीन दिन तक लगातार कभी गेहूँ की रोटी पेट भरकर नहीं खाई। यहां तक कि आप दुनिय स़ह़ीह़ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का बिस्तर चमड़े का था और उसकी भराई खजूर की छाल की थी स़ह़ीह़ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपनी मृत्यु के समय न कोई दिरहम छोड़ा, न दीनार, न कोई ग़ुलाम और न लौंडी, और न कोई चीज़, सिवाय अपने सफेद ख़च्चर, सह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की आवाज़ दुर्बल सुनी है, जिससे महसूस हो रहा है कि आप भूखे हैं। क्या तुम्हारे पास कुछ है? स़ह़ीह़ बेशक मुझे लानत करने वाला बनाकर नहीं भेजा गया, बल्कि मुझे दया बनाकर भेजा गया है। सह़ीह़ मैं सोया हुआ था कि इसने मेरी तलवार मुझपर उठा ली। मेरी आँख खुली, तो तलवार उसके हाथ में चमक रही थी। उसने मुझसे कहा : तुम्हें मुझेस कौन बचाएगा? मैंने कहा सह़ीह़ क्या अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आपके लिए क्षमायाचना की है? उन्होंने कहा : हाँ, और तुम्हारे लिए भी! फिर यह आयत पढ़ी : {अपने गुनाहों क स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का चरित्र क़ुरआन था।
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
حسبنا الله ونعم الوكيل अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद