फ़ज़ीलतें तथा आदाब पर हदीसें

इस्लाम > Hi > हदीस > फ़ज़ीलतें तथा आदाब

«फ़ज़ीलतें तथा आदाब» पर 744 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

फ़ज़ीलतें तथा आदाब पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ ऐ अल्लाह! मैं आग (जहन्नम) के फ़ितने, आग (जहन्नम) की यातना और मालदारी तथा निर्धनता की बुराई से तेरी शरण माँगता हूँ। स़ह़ीह़ क्या मैं तुम दोनों को उससे बेहतर चीज़ न बताऊँ, जो तुमने माँगा है? जब तुम अपने बिस्तर में जाओ (अथवा सोने का स्थान ग्रहण करो) तो तैंतीस बार 'सुबहानल्लाह स़ह़ीह़ तुम सुबह-शाम तीन बार 'क़ुल हुवल्लाहु अह़द', 'क़ुल अऊज़ु बि-रब्बिल फ़लक़' और 'क़ुल अऊज़ु बि-रब्बिन्नास' पढ़ लिया करो। यह तीन सूरतें तुम्हारे लिए हर चीज स़ह़ीह़ जिसने तीन बार यह दुआ पढ़ी : उस अल्लाह के नाम के साथ, जिसके नाम के साथ ज़मीन व आसमान में कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचाती और वह सब कुछ सुनने वाला सब कुछ ह़सन हरदम अल्लाह का भय रखो और हर ऊँचाई पर चढ़ते समय 'अल्लाहु अकबर' कह लिया करो। स़ह़ीह़ भूखे को खाना खिलाओ, बीमार की देखभाल करो और क़ैदी को रिहा कराओ। ह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर हसन) आलिम को आबिद के मुक़ाबले में वही श्रेष्ठता प्राप्त है, जो मुझे तुम्हारे एक साधारण व्यक्ति के मुक़ाबले में प्राप्त है। ह़सन एक व्यक्ति ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हममें से कोई अपने भाई अथवा अपने दोस्त से मिलते समय उसके लिए झुक जाए? फ़रमायाः नहीं। उसने कहाः क्या उसे गले स स़ह़ीह़ तुम कहते रहा करो : لا إله إلا الله وحده لا شريك له، الله أكبر كبيرًا، والحمد لله كثيرًا، وسبحان الله رب العالمين، ولا حول ولا قوة إلا بالله العزيز الح सह़ीह़ मालदार व्यक्ति का कर्ज़ अदा करने में टाल-मटोल करना ज़ुल्म है और अगर तुममें से किसी को किसी मालदार के पीछे लगा दिया जाए तो वह पीछे लग जाए। सह़ीह़ मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! मुझे कोई दुआ सिखा दीजिए। आपने फ़रमायाः कहोः اللهم إني أعوذ بك من شر سمعي، ومن شر بصري، ومن شر لساني، ومن شر قلبي، ومن شر सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब सोने का इरादा करते तो अपना दायाँ हाथ अपने गाल के नीचे रख लेते, फिर कहतेः اللَّهُمَّ قِني عذابك يوم تبعث ع सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब पहली रात का चाँद देखते तो फ़रमातेः "اللّهمَّ أهِلَّهُ عليْنا بالأمْن والإيمان، وَالسَّلامَةِ وَالإسلامِ، ر ह़सन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का एक नित्यकार्य यह था कि जब एक तिहाई रात गुज़र जाती तो खड़े होते और कहतेः ऐ लोगो! अल्लाह को याद करो। सह़ीह़ अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहु) के पास एक गुलाम था, जो उन्हें प्रत्येक दिन अपनी कमाई का कुछ भाग दे दिया करता था और अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहु) उसमें से खा सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ऊँटनी अ़ज़बा से कोई आगे नहीं जा सकता था दोनों रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़ जब हम किसी ऊँचे स्थान पर चढ़ते , तो अल्लाहु अकबर कहते और जब ढलान पर आते तो सुबहानल्लाह कहा करते थे सह़ीह़ ऐ लोगो! स्वंय अपने आप पर दया करो। तुम किसी बहरे तथा ग़ायब को नहीं बुला रहे हो, वह तुम्हारे साथ है और वह बहुत ही सुनने वाला और समीप है सह़ीह़ वह व्यक्ति जन्नत में प्रवेश नहीं करेगा, जिस के दिल में रत्ती बराबर भी अहंकार होगा स़ह़ीह़ सुबहानल्लाह, अल-हम्दु लिल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह और अल्लाहु अकबर कहना, मेरे निकट उन सारी चाज़ों की तुलना में अधिक उत्तम है, जिनपर सूरज निकलता है। सह़ीह़ जब यमन से कुछ लोग आए, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः यमन वाले तुम्हारे पास आए हैं सह़ीह़ अल्लाह ने अपने नबी को आवाज़ को सुरीली बनाने की जिस प्रकार अनुमति दी है किसी और वस्तु की नहीं दी सह़ीह़ जब कोई मुस्लिम प्रातः किसी बीमार मुस्लिम की इयादत (कुशल- मंगल लेना) करता है, तो सत्तर हज़ार फ़रिश्ते उस के लिए रहमत की प्रार्थना करते हैं सभी सनदों के आधार पर स़़ह़ीह़ जब दो मुसलमान आपस में मिलते हैं और मुसाफ़हा करते हैं, तो उनके अलग होने से पहले-पहले उनको क्षमा कर दिया जाता है। स़ह़ीह़ प्रत्येक फ़र्ज नमाज़ के पश्चात कही जाने वाली तसबीहों को कहने वाले -या उनका पालन करने वाले- नाकाम नहीं होंगे। अर्थात 33 बार सुबहानल्लाह, 33 बार अल-हम्द सह़ीह़ जिसने ऐसा ज्ञान प्राप्त किया, जिससे अल्लाह की खुशी प्राप्त की जाती है ह़सन जो ज्ञान प्राप्त करने के पथ पर चलता है, अल्लाह उसके लिए जन्नत का रास्ता आसान कर देता है सह़ीह़ जिससे ज्ञान से संबंधित कुछ पूछा गया और उस ने उसे छिपा लिया, तो उसे क़यामत के दिन आग की लगाम पहनाई जाएगी सह़ीह़ जो ला इलाहा इल्ललाह वल्लाहु अकबर कहता है, अल्लाह उसकी पुष्टि करता है और कहता हैः मेरे सिवा कोई सत्य पुज्य नहीं और मैं ही सबसे महान हूँ स़ह़ीह़ जिसने सूरा बक़रा की अंतिम दो आयतें रात में पढ़ लीं, वह उसके लिए काफ़ी हो जाती हैं। ह़सन जो अल्लाह की किताब का कोई एक अक्षर पढ़ेगा, उसे एक नेकी मिलेगी और नेकी दस गुणा तक दी जाती है सह़ीह़ जो क़ुरआन को मधुर आवाज़ से न पढ़े, वह हम में से नहीं है सह़ीह़ जब अल्लाह किसी समुदाय को अज़ाब में लिप्त करना चाहता है, तो प्रत्येक व्यक्ति को उस यातना से ग्रस्त करता है, फिर हर एक अपने कर्मों के अनुसार उठाया जाएगा स़ह़ीह़ समस्त इंसानों के दिल, रहमान (अल्लाह) की दो उँगलियों के बीच एक दिल की तरह हैं कि वह उसे जिस प्रकार चाहता है, उलटता-पलटता रहता है। सह़ीह़ जहन्नम तथा जन्नत में तर्क-वितर्क हुआ, तो जन्नत ने कहा : मेरे भीतर केवल दुर्बल एवं निर्धन लोग ही प्रवेश करेंगे। जबकि जहन्नम ने कहा : मेरे भीतर ज़ालिम औ सह़ीह़ अबू सालेह हमें आदेश दिया करते थे कि जब हममें से कोई सोने का इरादा करे, दाहिने करवट पर सोए। दोनों रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़ लोग सोने चाँदी के खदान की तरह खदान हैं। जो लोग जाहिलियत में बेहतर थे, वे इस्लाम में भी बेहतर हैं, यदि इस्लाम की समझ प्राप्त कर लें। सारे प्राण एकत्र स इसकी सनद ह़सन है। मैं अनस बिन मालिक -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- के साथ कुछ मजूसियों के पास बैठा हुआ था कि चाँदी के एक बर्तन में फालूदा लाया गया, तो उन्होंने नहीं खाया। स़ह़ीह़ जिसने यह कहकर क़सम खाई कि लात तथा उज़्ज़ा की क़सम, वह 'ला इलाहा इल्लल्लाह' कहे और जिसने अपने साथी से कहा कि आओ हम जुआ खेलें, वह सद्क़ा करे। दोनों रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़ हम रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की अगवानी के लिए बच्चों के साथ सनिय्यतुल वदा तक गए। सह़ीह़ फ़रिश्ते अभी तक उनपर अपने परों से छाया किए हुए हैं। सह़ीह़ यह दया है, जिसे अल्लाह -तआला- ने अपने बंदों के दिलों में रखा है और अल्लाह अपने उन बंदों पर दया करता है, जो दूसरों पर दया करते हैं। सह़ीह़ तुम एक ऐसे व्यक्ति हो, जिसके अंदर जाहिलयत की कुछ बातें पाई जाती हैं। वे तुम्हारे भाई और दास हैं। उन्हें अल्लाह ने तुम्हारे नियंत्रण में रखा है। अतः, ज स़ह़ीह़ क्या तुम जानते हो कि निर्धन कौन है? सह़ीह़ उस अल्लाह की क़सम, जिसके हाथ में मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की जान है, मुझे आशा है कि जन्नत में तुम्हारी संख्या आधी होगी। इसका कारण यह है कि ज शवाहिद के आधार पर सह़ीह़ उनके पास वापस जाओ और उनसे अनुमति माँगो। यदि दोनों अनुमति दे दें, तो जिहाद में शामिल हो, वरना उनकी बात मानो तथा उनकी सेवा करो। सह़ीह़ जब बंदा मुझसे एक बित्ता क़रीब आता है, तो मैं उससे एक हाथ क़रीब आता, जब वह मुझसे एक हाथ क़रीब आता है, तो मैं उससे दोनों हाथों को फैलाकर जितनी दूरी बनती सह़ीह़ जब क़यामत का दिन होगा, तो अल्लाह प्रत्येक मुस्लिम के हवाले एक यहूदी अथवा ईसाई को करेगा और कहेगा : यह जहन्नम से तुम्हारी छुड़ाई है। सह़ीह़ जल्द ही तुम लोग इमारत और सरदारी की लालच करोगे। जबकि क़यामत के दिन तुम्हें उसकी वजह से नदामत और शर्मिंदगी होगी। दूध पिलाने वाली अच्छी होती है और दूध छु स़ह़ीह़ एक व्यक्ति रास्ते में जा रहा था कि उसने रास्ते में कांटेदार टहनी देखी, तो उसने उसे हटा दिया। अल्लाह ने उसके इस काम को पसंद किया और उसे माफ कर दिया। स़ह़ीह़ पवित्रता आधा ईमान है, अल-हम्दु लिल्लाह तराज़ू को भर देता है, सुबहानल्लाह और अल-हम्दु लिल्लाह दोनों मिलकर आकाश एवं धरती के बीच के खाली स्थान को भर देते स़ह़ीह़ क्या तुम इस बात की गवाही नहीं देते कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं? स़ह़ीह़ बंदों पर अल्लाह का अधिकार यह है कि बंदे उसकी इबादत करें और किसी को उसका साझी न बनाएँ। जबकि अल्लाह पर बंदों का अधिकार यह है कि अल्लाह किसी ऐसे व्यक्ति स़ह़ीह़ जो इस हाल में मरा कि किसी को अल्लाह का साझी नहीं बनाया, वह जन्नत में प्रवेश करेगा और जो इस हाल में मरा कि किसी को अल्लाह का साझी बनाता रहा, वह जहन्नम स़ह़ीह़ शैतान तुम में से किसी व्यक्ति के पास आता है और कहता है : इस चीज़ को किसने पैदा किया? इस चीज़ को किसने पैदा किया? यहाँ तक कि वह कहता है : तेरे रब को कि ह़सन अमल छह प्रकार के हैं और लोग चार प्रकार के हैं। रही बात छह आमाल की, तो उनमें से दो प्रकार के अमल वाजिब करने वाले हैं, दो प्रकार के अमल बराबर-बराबर हैं, स़ह़ीह़ मुझसे इस्लाम के बारे में एक ऐसी बात कहें, जिसके बारे में मुझे किसी और से पूछने की ज़रूरत न पड़े। आपने फ़रमाया : "तुम कहो कि मैं अल्लाह पर ईमान लाया और स़ह़ीह़ क़यामत की निशानियों में से कुछ निशानियाँ यह हैं कि ज्ञान उठा लिया जाए, अज्ञान अधिक हो जाए, व्यभिचार अधिक हो जाए, मदिरा पीने का चलन अधिक हो जाए, पुरुष स़ह़ीह़ क़यामत उस समय तक क़ायम नहीं होगी, जब तक इस तरह की हालत पैदा न हो जाए कि एक व्यक्ति किसी की क़ब्र के पास से गुज़रे और कहे कि काश! इसके स्थान पर मैं होत स़ह़ीह़ अल्लाह क़यामत के दिन मेरी उम्मत से एक व्यक्ति को चुनकर सारी सृष्टियों के सामने उपस्थित करेगा
بسم الله الرحمن الرحيم गुरु 17 जुमादा अल-अव्वल
الخميس 17 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.7 / 29.5
रोशनी 91%
12 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद