धर्म, शुभचिंतन का नाम है

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: धर्म, शुभचिंतन का नाम है

عَنْ أَبِي رُقَيَّةَ تَمِيمِ بْنِ أَوْسٍ الدَّارِيِّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «الدِّينُ النَّصِيحَةُ» قُلْنَا: لِمَنْ؟ قَالَ: «لِلهِ وَلِكِتَابِهِ وَلِرَسُولِهِ وَلِأَئِمَّةِ الْمُسْلِمِينَ وَعَامَّتِهِمْ».

हदीस की व्याख्या: धर्म, शुभचिंतन का नाम है

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि दीन का आधार निष्ठा और सत्य पर है। हर काम बिल्कुल उसी तरह होना चाहिए, जिस तरह अल्लाह ने वाजिब किया है। कोई कोताही या धोखा नहीं होना चाहिए। चुनांचे अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा गया कि यह निष्टा एवं सच्चाई किसके प्रति होनी चाहिए, तो आपने कहा : 1- उच्च एवं महान अल्लाह के प्रति। इसका अर्थ यह है कि केवल उसी की इबादत की जाए, किसी को उसका साझी न बनाया जाए, उसके पालनहार तथा पूज्य होने तथा उसके नामों एवं गुणों पर विश्वास रखा जाए, उसके आदेश का सम्मान किया जाए और उसपर ईमान लाने का आह्वान किया जाए। 2- अल्लाह की किताब पवित्र क़ुरआन के प्रति : इसका मतलब यह है कि क़ुरआन को अल्लाह की वाणी माना जाए, उसे अल्लाह की अंतिम तथा पिछली तमाम शरीयतों को निरस्त करने वाली किताब माना जाए, उसे उचित सम्मान दिया जाए, उसकी तिलावत की जाए, उसकी सुदृढ़ आयतों पर अमल किया जाए, उसकी अस्पष्ट आयतों को स्वीकार किया जाए, उसकी आयतों का ग़लत अर्थ बताने वालों की ग़लत-बयानियों को सामने लाया जाए, उसके उपदेशों से शिक्षा ग्रहण की जाए, उसमें निहित ज्ञान-विज्ञान का प्रचार-प्रसार किया जाए और उसका आह्वान किया जाए। 3- अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के प्रति : इसका अर्थ यह है कि आपके अंतिम रसूल होने पर विश्वास रखा जाए, आपकी दी हुई शिक्षाओं की पुष्टि की जाए, आपके आदेशों का पालन किया जाए, आपकी मना की हुई चीज़ों से दूर रहा जाए, आपके बताए हुए तरीक़े ही के अनुसार अल्लाह की इबादत की जाए, आपके अधिकार को महत्व दिया जाए, आपको सम्मान दिया जाए, आपके आह्वान का प्रचार-प्रसार किया जाए, आपकी लाई हुई शरीयत को फैलाया जाए और आपपर लगाए जाने वाले आरोपों का खंडन किया जाए। 4- मुस्लिम शासकों के प्रति : इसका अर्थ यह है कि सही काम पर उनका सहयोग किया जाए, शासकीय मामलात में उनसे विवाद न किया जाए और अल्लाह की आज्ञाकारिता में उनकी बात सुनी जाए और उनका पालन किया जाए। 5- आम मुसलमानों के प्रति : इसका अर्थ यह है कि उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाए, उनको अच्छे कामों की ओर बुलाया जाए, उनको कष्ट देने से बचा जाए, उनका भला हो इस बात से प्रेम रखा जाए और नेकी तथा धर्म के कामों में उनका सहयोग किया जाए।

सीख: धर्म, शुभचिंतन का नाम है

श्रेणियाँ : शरई राजनीति · इमाम (शासनाध्यक्ष) के उत्तरदायित्व · आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद