इस्लाम > Hi > हदीस > अकद > तथा जो किसी इमाम की बैअत करे और उसे अपना हाथ तथा अपने दिल का फल दे दे, उसे चाहिए कि जहाँ त…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن عبد الله بن عمرو رضي الله عنهما قال: كنا مع رسول الله - صلى الله عليه وسلم- في سفر، فَنَزَلنَا مَنْزِلًا، فَمِنَّا مَنْ يُصلِح خِبَاءَه، ومِنَّا من يَنتَضِل، ومِنَّا مَن هو في جَشَرِهِ، إِذْ نادى مُنادي رسول الله صلى الله عليه وسلم : الصَّلاةُ جَامِعَةٌ. فاجْتَمَعنَا إلى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - فقال: «إِنَّه لَمْ يَكُن نبي قبْلِي إِلاَّ كَان حَقًّا عليه أَنْ يَدُلَّ أُمَّتَه عَلَى خَيرِ مَا يَعْلَمُهُ لَهُم، ويُنذِرَهُم شّرَّ ما يعلمه لهم، وإِنَّ أُمَّتُكُم هذه جَعَل عَافِيَتَهَا في أوَّلِها، وَسَيُصِيبُ آخِرَهَا بَلاَءٌ وأُمُورٌ تُنكِرُونَهَا، وتَجِيءُ فِتنَةٌ يُرَقِّقُ بَعْضُهَا بَعضًا، وتَجِيءُ الفتنة فيقول المؤمن: هذه مُهلِكَتِي، ثُمَّ تَنْكَشِف، وتجيء الفتنة فيقول المؤمن: هَذِه هذِه. فمَنْ أَحَبَّ أنْ يُزَحْزَحَ عن النار، ويدخل الجنة، فَلْتَأْتِه مَنِيَتُهُ وهو يؤمن بالله واليوم الآخر، وَلْيَأتِ إِلى النَّاسِ الَّذِي يُحِبُّ أَنْ يُؤْتَى إليه، ومَنْ بَايَع إِمَامًا فَأَعْطَاه صَفْقَةَ يَدِهِ، وَثَمْرَةَ قلْبِهِ، فَلْيُطِعُه إِن اسْتَطَاع، فَإِن جَاء آخَرُ يُنَازِعُه فَاضْرِبُوا عُنُقَ الآخَرِ».
इस हदीस से मालूम हुआ कि नबियों की तरह आह्वानकर्ताओं पर भी भलाई को स्पष्ट करना, उसकी प्रेरणा देना, उसकी ओर लोगों का मार्गदर्शन करना तथा इसी तरह बुराई को स्पष्ट करना और उससे सावधान करना अनिवार्य है। इस हदीस में एक अन्य बात यह बताई गई है कि इस उम्मत के आरंभिक काल के लोग आज़माइशों से सुरक्षित रहे, जबकि इसके अंतिम काल के लोगों को ऐसी बुराइयों एवं परीक्षाओं का सामना रहेगा कि बाद में आने वाले फ़ितनों के सामने पहले आने वाले फ़ितने बौने दिखाई देंगे। आगे बताया गया है कि इन फ़ितनों से मुक्ति एकेश्वरवाद, सुन्नत के अनुसरण, लोगों के साथ अच्छे व्यवहार, शासकों से की गई बैअत की पाबंदी, उसके विरुद्ध बग़ावत से गुरेज़ तथा मुसलमानों की एकता को भंग करने वालों से युद्ध के द्वारा मिल सकती है।
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