इस्लाम > Hi > हदीस > दआओ तथ अजकर पर आधरत फकह > मैंने तुम्हारे पास से जाने के बाद चार शब्द तीन बार कहे हैं। यदि उन्हें आज तुमने जो अज़कार …
स़ह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 2 मिनट पढ़ने का समयअल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपनी पत्नी तथा मुसलमानों की माता जुवैरिया -रज़ियल्लाहु अनहा- के यहाँ से सुबह फ़ज्र की नमाज़ पढ़कर निकले। उस समय वह नमाज़ के स्थान ही में बैठी हुई थीं। जब आप दोपहर के समय वापस आए, तो देखा कि वह उसी जगह बैठी हुई हैं। अतः फ़रमाया : तुम अभी तक उसी अवस्था में हो जिसपर मैं तुमको छोड़ गया था? उन्होंने उत्तर दिया : जी हाँ। उनका उत्तर सुन आपने कहा : मैंने तुम्हारे पास से निकालने के बाद चार शब्द कहे हैं और उन्हें तीन-तीन बार दोहराया है। यदि सवाब के मामले में उनकी तुलना तुम्हारे कहे हुए उन शब्दों से किया जाए जिन्हें तुमने यहाँ बैठकर पूरे समय में कहा है, तो मेरे कहे हुए शब्द भारी साबित हों। वो शब्द इस प्रकार हैं : (सुब्हानल्लाह) और वह सभी कमियों से पवित्र है, (व बिहम्दिही) चूँकि उसी के लिए सुंदर प्रशंसा है जिसने इसकी प्रेरणा दी, (अदद ख़ल्क़िही) जिनकी गणना अल्लाह के सिवा कोई नहीं कर सकता, (व रिज़ा नफ़सिही) उस हद तक जो उसके उन बंदों से उसे प्रसन्न करता है जिनसे अल्लाह प्रसन्न हुआ और यह ऐसी चीज़ है जिसका घेराव नहीं किया जा सकता, (व ज़िनत अर्शिही) जो कि तमाम मख़्लूक़ात (सृष्टि) में सबसे महान और सबसे भारी है, (व मिदाद कलिमातिही) और अल्लाह के शब्द न सीमित किए जा सकते हैं और न समाप्त होते हैं; और यह तीनों विभागों को शामिल करता है और उनका इहाता (घेराव) करता है; क्योंकि उसके शब्दों की स्याही (मिदाद) की मात्रा, उसके गुणों और उसकी संख्या की कोई अंत नहीं है, लेकिन यहाँ इसका उद्देश्य अतिशयोक्ति (बहुतायत में बयान) के साथ बहुलता को दर्शाना है; क्योंकि उसने पहले ऐसी चीज़ का उल्लेख किया जिसे बहुत बड़ी संख्या (सृष्टि की संख्या) गिनती में लाती है, फिर उससे भी महान चीज़ की ओर बढ़ा और उसे "अपनी रज़ा (प्रसन्नता)" से व्यक्त किया, और फिर सबसे बड़ी रचना यानी "अर्श" के वज़न का ज़िक्र किया; अतः पहला भाग संख्या और मात्रा के लिए है, दूसरा गुण और कैफ़ियत के लिए, और तीसरा महानता और भारीपन के लिए।
श्रेणियाँ : दुआओं तथा अज़कार पर आधारित फ़िक़्ह · सुबह तथा शाम के अज़कार · फ़ज़ीलतें तथा आदाब