क़ुरआन का रुकू 556 पढ़ें

रुकू 556 सूरह An-Nas (आयत 1 से 6) से है। इसमें 6 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 556

6
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.6
आयतें

रुकू 556 में सूरह

الناس · जुज़ 30
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سورة الناس
जुज़ 30 98.9% (558/564)
हिज़्ब 60 97.9% (282/288)

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ ﴿1﴾

(ऐ रसूल) तुम कह दो मैं लोगों के परवरदिगार

مَلِكِ ٱلنَّاسِ ﴿2﴾

लोगों के बादशाह

إِلَـٰهِ ٱلنَّاسِ ﴿3﴾

लोगों के माबूद की (शैतानी)

مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ ﴿4﴾

वसवसे की बुराई से पनाह माँगता हूँ

ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ ﴿5﴾

जो (ख़ुदा के नाम से) पीछे हट जाता है जो लोगों के दिलों में वसवसे डाला करता है

مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ ﴿6﴾

जिन्नात में से ख्वाह आदमियों में से

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 18 जुमादा अल-अव्वल
الجمعة 18 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 19.4 / 29.5
रोशनी 77%
10 दिनों में अमावस्या
اللهم صل على محمد ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दरूद भेज

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद