सूरह Al-Inshiqaq पढ़ें

सूरह Al-Inshiqaq (الإنشقاق) क़ुरआन की एक मक्की सूरह सूरह है जिसमें 25 आयतें हैं। हमारे इंटरैक्टिव उपकरणों से इस सूरह को पढ़ें, सुनें और हिफ़्ज़ करें।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

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सूरह Al-Inshiqaq अंकों में

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(मक्की सूरह)
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25
आयतें
-54.3% औसत से

मुख्य शब्दों की आवृत्ति

الله 1
رب 4

सबसे अधिक आवृत्त अक्षर

ا
41
#1
ل
39
#2
و
36
#3
ن
31
#4
م
27
#5
الإنشقاق · जुज़ 30
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سورة الإنشقاق
जुज़ 30 37.6% (212/564)
हिज़्ब 59 76.8% (212/276)

إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنشَقَّتْ ﴿1﴾

जब आसमान फट जाएगा

وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ ﴿2﴾

और अपने परवरदिगार का हुक्म बजा लाएगा और उसे वाजिब भी यही है

وَإِذَا ٱلْأَرْضُ مُدَّتْ ﴿3﴾

और जब ज़मीन (बराबर करके) तान दी जाएगी

وَأَلْقَتْ مَا فِيهَا وَتَخَلَّتْ ﴿4﴾

और जो कुछ उसमें है उगल देगी और बिल्कुल ख़ाली हो जाएगी

وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ ﴿5﴾

और अपने परवरदिगार का हुक्म बजा लाएगी

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَـٰنُ إِنَّكَ كَادِحٌ إِلَىٰ رَبِّكَ كَدْحًۭا فَمُلَـٰقِيهِ ﴿6﴾

और उस पर लाज़िम भी यही है (तो क़यामत आ जाएगी) ऐ इन्सान तू अपने परवरदिगार की हुज़ूरी की कोशिश करता है

فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ ﴿7﴾

तो तू (एक न एक दिन) उसके सामने हाज़िर होगा फिर (उस दिन) जिसका नामाए आमाल उसके दाहिने हाथ में दिया जाएगा

فَسَوْفَ يُحَاسَبُ حِسَابًۭا يَسِيرًۭا ﴿8﴾

उससे तो हिसाब आसान तरीके से लिया जाएगा

وَيَنقَلِبُ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًۭا ﴿9﴾

और (फिर) वह अपने (मोमिनीन के) क़बीले की तरफ ख़ुश ख़ुश पलटेगा

وَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ وَرَآءَ ظَهْرِهِۦ ﴿10﴾

लेकिन जिस शख़्श को उसका नामए आमल उसकी पीठ के पीछे से दिया जाएगा

فَسَوْفَ يَدْعُوا۟ ثُبُورًۭا ﴿11﴾

वह तो मौत की दुआ करेगा

وَيَصْلَىٰ سَعِيرًا ﴿12﴾

और जहन्नुम वासिल होगा

إِنَّهُۥ كَانَ فِىٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًا ﴿13﴾

ये शख़्श तो अपने लड़के बालों में मस्त रहता था

إِنَّهُۥ ظَنَّ أَن لَّن يَحُورَ ﴿14﴾

और समझता था कि कभी (ख़ुदा की तरफ) फिर कर जाएगा ही नहीं

بَلَىٰٓ إِنَّ رَبَّهُۥ كَانَ بِهِۦ بَصِيرًۭا ﴿15﴾

हाँ उसका परवरदिगार यक़ीनी उसको देख भाल कर रहा है

فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلشَّفَقِ ﴿16﴾

तो मुझे शाम की मुर्ख़ी की क़सम

وَٱلَّيْلِ وَمَا وَسَقَ ﴿17﴾

और रात की और उन चीज़ों की जिन्हें ये ढाँक लेती है

وَٱلْقَمَرِ إِذَا ٱتَّسَقَ ﴿18﴾

और चाँद की जब पूरा हो जाए

لَتَرْكَبُنَّ طَبَقًا عَن طَبَقٍۢ ﴿19﴾

कि तुम लोग ज़रूर एक सख्ती के बाद दूसरी सख्ती में फँसोगे

فَمَا لَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ ﴿20﴾

तो उन लोगों को क्या हो गया है कि ईमान नहीं ईमान नहीं लाते

وَإِذَا قُرِئَ عَلَيْهِمُ ٱلْقُرْءَانُ لَا يَسْجُدُونَ ۩ ﴿21﴾

और जब उनके सामने क़ुरान पढ़ा जाता है तो (ख़ुदा का) सजदा नहीं करते (21) (सजदा)

بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ يُكَذِّبُونَ ﴿22﴾

बल्कि काफ़िर लोग तो (और उसे) झुठलाते हैं

وَٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يُوعُونَ ﴿23﴾

और जो बातें ये लोग अपने दिलों में छिपाते हैं ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है

فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ ﴿24﴾

तो (ऐ रसूल) उन्हें दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो

إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۭ ﴿25﴾

मगर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे अच्छे काम किए उनके लिए बेइन्तिहा अज्र (व सवाब है)

بسم الله الرحمن الرحيم रवि 20 जुमादा अल-अव्वल
الأحد 20 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 21.6 / 29.5
रोशनी 56%
8 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद