मुसहफ़ का पृष्ठ 597 27 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 30, हिज़्ब 60 में है।
10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया
coran.read_full_page : क़ुरआन का पृष्ठ 597 पढ़ें →
وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيْتُونِ ﴿١﴾
इन्जीर और ज़ैतून की क़सम
وَطُورِ سِينِينَ ﴿٢﴾
और तूर सीनीन की
وَهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ ٱلْأَمِينِ ﴿٣﴾
और उस अमन वाले शहर (मक्का) की
لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ فِىٓ أَحْسَنِ تَقْوِيمٍۢ ﴿٤﴾
कि हमने इन्सान बहुत अच्छे कैड़े का पैदा किया
ثُمَّ رَدَدْنَـٰهُ أَسْفَلَ سَـٰفِلِينَ ﴿٥﴾
फिर हमने उसे (बूढ़ा करके रफ्ता रफ्ता) पस्त से पस्त हालत की तरफ फेर दिया
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فَلَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۢ ﴿٦﴾
मगर जो लोग ईमान लाए और अच्छे (अच्छे) काम करते रहे उनके लिए तो बे इन्तेहा अज्र व सवाब है
فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعْدُ بِٱلدِّينِ ﴿٧﴾
तो (ऐ रसूल) इन दलीलों के बाद तुमको (रोज़े) जज़ा के बारे में कौन झुठला सकता है
أَلَيْسَ ٱللَّهُ بِأَحْكَمِ ٱلْحَـٰكِمِينَ ﴿٨﴾
क्या ख़ुदा सबसे बड़ा हाकिम नहीं है (हाँ ज़रूर है)
ٱقْرَأْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلَّذِى خَلَقَ ﴿١﴾
(ऐ रसूल) अपने परवरदिगार का नाम लेकर पढ़ो जिसने हर (चीज़ को) पैदा किया
خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ مِنْ عَلَقٍ ﴿٢﴾
उस ने इन्सान को जमे हुए ख़ून से पैदा किया पढ़ो
ٱقْرَأْ وَرَبُّكَ ٱلْأَكْرَمُ ﴿٣﴾
और तुम्हारा परवरदिगार बड़ा क़रीम है
ٱلَّذِى عَلَّمَ بِٱلْقَلَمِ ﴿٤﴾
जिसने क़लम के ज़रिए तालीम दी
عَلَّمَ ٱلْإِنسَـٰنَ مَا لَمْ يَعْلَمْ ﴿٥﴾
उसीने इन्सान को वह बातें बतायीं जिनको वह कुछ जानता ही न था
كَلَّآ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَيَطْغَىٰٓ ﴿٦﴾
सुन रखो बेशक इन्सान जो अपने को ग़नी देखता है
أَن رَّءَاهُ ٱسْتَغْنَىٰٓ ﴿٧﴾
तो सरकश हो जाता है
إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلرُّجْعَىٰٓ ﴿٨﴾
बेशक तुम्हारे परवरदिगार की तरफ (सबको) पलटना है
أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يَنْهَىٰ ﴿٩﴾
भला तुमने उस शख़्श को भी देखा
عَبْدًا إِذَا صَلَّىٰٓ ﴿١٠﴾
जो एक बन्दे को जब वह नमाज़ पढ़ता है तो वह रोकता है
أَرَءَيْتَ إِن كَانَ عَلَى ٱلْهُدَىٰٓ ﴿١١﴾
भला देखो तो कि अगर ये राहे रास्त पर हो या परहेज़गारी का हुक्म करे
أَوْ أَمَرَ بِٱلتَّقْوَىٰٓ ﴿١٢﴾
(तो रोकना कैसा)
أَرَءَيْتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰٓ ﴿١٣﴾
भला देखो तो कि अगर उसने (सच्चे को) झुठला दिया और (उसने) मुँह फेरा
أَلَمْ يَعْلَم بِأَنَّ ٱللَّهَ يَرَىٰ ﴿١٤﴾
(तो नतीजा क्या होगा) क्या उसको ये मालूम नहीं कि ख़ुदा यक़ीनन देख रहा है
كَلَّا لَئِن لَّمْ يَنتَهِ لَنَسْفَعًۢا بِٱلنَّاصِيَةِ ﴿١٥﴾
देखो अगर वह बाज़ न आएगा तो हम परेशानी के पट्टे पकड़ के घसीटेंगे
نَاصِيَةٍۢ كَـٰذِبَةٍ خَاطِئَةٍۢ ﴿١٦﴾
झूठे ख़तावार की पेशानी के पट्टे
فَلْيَدْعُ نَادِيَهُۥ ﴿١٧﴾
तो वह अपने याराने जलसा को बुलाए हम भी जल्लाद फ़रिश्ते को बुलाएँगे
سَنَدْعُ ٱلزَّبَانِيَةَ ﴿١٨﴾
(ऐ रसूल) देखो हरगिज़ उनका कहना न मानना
كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَٱسْجُدْ وَٱقْتَرِب ۩ ﴿١٩﴾
और सजदे करते रहो और कुर्ब हासिल करो (19) (सजदा)