الصافات · जुज़ 23
पर जाएँ
बुकमार्क
कारी / पाठक
चलाने की गति
आयत दोहराना
दोहराएँ
स्वतः स्क्रॉल
अनुवाद
अरबी फ़ॉन्ट
टेक्स्ट आकार
अरबी
अनुवाद
हिफ़्ज़ का क्षेत्र
दोहराव
प्रति आयत
पूर्ण लूप
मुख्य कारी
जारी है - A-B लूप /

क़ुरआन का रुकू 386 पढ़ें

रुकू 386 सूरह As-Saffat (आयत 1 से 21) से है। इसमें 21 आयतें हैं और यह जुज़ 23 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Ruku 386 dans le Coran

21
आयतें
1
सूरह
23
जुज़
v.1 – v.21
आयतें

Sourate dans le Ruku 386

पृष्ठ 446
रुकू 386
سورة الصافات
जुज़ 23 15.7% (56/357)
हिज़्ब 45 28.0% (56/200)

وَٱلصَّـٰٓفَّـٰتِ صَفًّۭا ﴿١﴾

(इबादत या जिहाद में) पर बाँधने वालों की (क़सम)

فَٱلزَّٰجِرَٰتِ زَجْرًۭا ﴿٢﴾

फिर (बदों को बुराई से) झिड़क कर डाँटने वाले की (क़सम)

فَٱلتَّـٰلِيَـٰتِ ذِكْرًا ﴿٣﴾

फिर कुरान पढ़ने वालों की क़सम है

إِنَّ إِلَـٰهَكُمْ لَوَٰحِدٌۭ ﴿٤﴾

तुम्हारा माबूद (यक़ीनी) एक ही है

رَّبُّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَرَبُّ ٱلْمَشَـٰرِقِ ﴿٥﴾

जो सारे आसमान ज़मीन का और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है (सबका) परवरदिगार है

إِنَّا زَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنْيَا بِزِينَةٍ ٱلْكَوَاكِبِ ﴿٦﴾

और (चाँद सूरज तारे के) तुलूउ व (गुरूब) के मक़ामात का भी मालिक है हम ही ने नीचे वाले आसमान को तारों की आरइश (जगमगाहट) से आरास्ता किया

وَحِفْظًۭا مِّن كُلِّ شَيْطَـٰنٍۢ مَّارِدٍۢ ﴿٧﴾

और (तारों को) हर सरकश शैतान से हिफ़ाज़त के वास्ते (भी पैदा किया)

لَّا يَسَّمَّعُونَ إِلَى ٱلْمَلَإِ ٱلْأَعْلَىٰ وَيُقْذَفُونَ مِن كُلِّ جَانِبٍۢ ﴿٨﴾

कि अब शैतान आलमे बाला की तरफ़ कान भी नहीं लगा सकते और (जहाँ सुन गुन लेना चाहा तो) हर तरफ़ से खदेड़ने के लिए शहाब फेके जाते हैं

دُحُورًۭا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌۭ وَاصِبٌ ﴿٩﴾

और उनके लिए पाएदार अज़ाब है

إِلَّا مَنْ خَطِفَ ٱلْخَطْفَةَ فَأَتْبَعَهُۥ شِهَابٌۭ ثَاقِبٌۭ ﴿١٠﴾

मगर जो (शैतान शाज़ व नादिर फरिश्तों की) कोई बात उचक ले भागता है तो आग का दहकता हुआ तीर उसका पीछा करता है

فَٱسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَم مَّنْ خَلَقْنَآ ۚ إِنَّا خَلَقْنَـٰهُم مِّن طِينٍۢ لَّازِبٍۭ ﴿١١﴾

तो (ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि उनका पैदा करना ज्यादा दुश्वार है या उन (मज़कूरा) चीज़ों का जिनको हमने पैदा किया हमने तो उन लोगों को लसदार मिट्टी से पैदा किया

بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ ﴿١٢﴾

बल्कि तुम (उन कुफ्फ़ार के इन्कार पर) ताज्जुब करते हो और वह लोग (तुमसे) मसख़रापन करते हैं

وَإِذَا ذُكِّرُوا۟ لَا يَذْكُرُونَ ﴿١٣﴾

और जब उन्हें समझाया जाता है तो समझते नहीं हैं

وَإِذَا رَأَوْا۟ ءَايَةًۭ يَسْتَسْخِرُونَ ﴿١٤﴾

और जब किसी मौजिजे क़ो देखते हैं तो (उससे) मसख़रापन करते हैं

وَقَالُوٓا۟ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا سِحْرٌۭ مُّبِينٌ ﴿١٥﴾

और कहते हैं कि ये तो बस खुला हुआ जादू है

أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ ﴿١٦﴾

भला जब हम मर जाएँगे और ख़ाक और हड्डियाँ रह जाएँगे

أَوَءَابَآؤُنَا ٱلْأَوَّلُونَ ﴿١٧﴾

तो क्या हम या हमारे अगले बाप दादा फिर दोबारा क़ब्रों से उठा खड़े किए जाँएगे

قُلْ نَعَمْ وَأَنتُمْ دَٰخِرُونَ ﴿١٨﴾

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ (ज़रूर उठाए जाओगे)

فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌۭ وَٰحِدَةٌۭ فَإِذَا هُمْ يَنظُرُونَ ﴿١٩﴾

और तुम ज़लील होगे और वह (क़यामत) तो एक ललकार होगी फिर तो वह लोग फ़ौरन ही (ऑंखे फाड़-फाड़ के) देखने लगेंगे

وَقَالُوا۟ يَـٰوَيْلَنَا هَـٰذَا يَوْمُ ٱلدِّينِ ﴿٢٠﴾

और कहेंगे हाए अफसोस ये तो क़यामत का दिन है

هَـٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ﴿٢١﴾

(जवाब आएगा) ये वही फैसले का दिन है जिसको तुम लोग (दुनिया में) झूठ समझते थे

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 24 मुहर्रम
الجمعة 24 محرّم
هلال متناقص घटता हुआ अर्धचंद्र दिन 25.1 / 29.5
रोशनी 21%
4 दिनों में अमावस्या
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है