المرسلات · जुज़ 29
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सूरह Al-Mursalat पढ़ें

सूरह Al-Mursalat (المرسلات) क़ुरआन की एक मक्की सूरह है जिसमें 50 आयतें हैं। हमारे इंटरैक्टिव उपकरणों से इस सूरह को पढ़ें, सुनें और हिफ़्ज़ करें।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

📖 2 मिनट पढ़ने का समय

सूरह Al-Mursalat अंकों में

कालानुक्रमिक अवतरण क्रम
अवतरण क्रमांक 33 / 114
(मक्की)
182
शब्द
-74.7% औसत से
896
अक्षर
-70.8% औसत से
2
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50
आयतें
-8.6% औसत से

मुख्य शब्दों की आवृत्ति في سورة Al-Mursalat

الله 1
رب 1

सबसे अधिक आवृत्त अक्षर في سورة Al-Mursalat

ل
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#1
م
74
#2
و
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ن
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ي
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सूरह Al-Mursalaat पढ़ें
سورة المرسلات
जुज़ 29 92.8% (400/431)
हिज़्ब 58 86.2% (194/225)

أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍۢ مَّهِينٍۢ ﴿٢٠﴾

क्या हमने तुमको ज़लील पानी (मनी) से पैदा नहीं किया

فَجَعَلْنَـٰهُ فِى قَرَارٍۢ مَّكِينٍ ﴿٢١﴾

फिर हमने उसको एक मुअय्यन वक्त तक

إِلَىٰ قَدَرٍۢ مَّعْلُومٍۢ ﴿٢٢﴾

एक महफूज़ मक़ाम (रहम) में रखा

فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ ٱلْقَـٰدِرُونَ ﴿٢٣﴾

फिर (उसका) एक अन्दाज़ा मुक़र्रर किया तो हम कैसा अच्छा अन्दाज़ा मुक़र्रर करने वाले हैं

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٢٤﴾

उन दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًا ﴿٢٥﴾

क्या हमने ज़मीन को ज़िन्दों और मुर्दों को समेटने वाली नहीं बनाया

أَحْيَآءًۭ وَأَمْوَٰتًۭا ﴿٢٦﴾

और उसमें ऊँचे ऊँचे अटल पहाड़ रख दिए

وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَـٰمِخَـٰتٍۢ وَأَسْقَيْنَـٰكُم مَّآءًۭ فُرَاتًۭا ﴿٢٧﴾

और तुम लोगों को मीठा पानी पिलाया

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٢٨﴾

उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ﴿٢٩﴾

जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो

ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ ظِلٍّۢ ذِى ثَلَـٰثِ شُعَبٍۢ ﴿٣٠﴾

(धुएँ के) साये की तरफ़ चलो जिसके तीन हिस्से हैं

لَّا ظَلِيلٍۢ وَلَا يُغْنِى مِنَ ٱللَّهَبِ ﴿٣١﴾

जिसमें न ठन्डक है और न जहन्नुम की लपक से बचाएगा

إِنَّهَا تَرْمِى بِشَرَرٍۢ كَٱلْقَصْرِ ﴿٣٢﴾

उससे इतने बड़े बड़े अंगारे बरसते होंगे जैसे महल

كَأَنَّهُۥ جِمَـٰلَتٌۭ صُفْرٌۭ ﴿٣٣﴾

गोया ज़र्द रंग के ऊँट हैं

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٣٤﴾

उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

هَـٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ ﴿٣٥﴾

ये वह दिन होगा कि लोग लब तक न हिला सकेंगे

وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ ﴿٣٦﴾

और उनको इजाज़त दी जाएगी कि कुछ उज्र माअज़ेरत कर सकें

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٣٧﴾

उस दिन झुठलाने वालों की तबाही है

هَـٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَـٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَ ﴿٣٨﴾

यही फैसले का दिन है (जिस में) हमने तुमको और अगलों को इकट्ठा किया है

فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌۭ فَكِيدُونِ ﴿٣٩﴾

तो अगर तुम्हें कोई दाँव करना हो तो आओ चल चुको

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٤٠﴾

उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى ظِلَـٰلٍۢ وَعُيُونٍۢ ﴿٤١﴾

बेशक परहेज़गार लोग (दरख्तों की) घनी छाँव में होंगे

وَفَوَٰكِهَ مِمَّا يَشْتَهُونَ ﴿٤٢﴾

और चश्मों और आदमियों में जो उन्हें मरग़ूब हो

كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ﴿٤٣﴾

(दुनिया में) जो अमल करते थे उसके बदले में मज़े से खाओ पियो

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ﴿٤٤﴾

मुबारक हम नेकोकारों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٤٥﴾

उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

كُلُوا۟ وَتَمَتَّعُوا۟ قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ ﴿٤٦﴾

(झुठलाने वालों) चन्द दिन चैन से खा पी लो तुम बेशक गुनेहगार हो

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٤٧﴾

उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है

وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرْكَعُوا۟ لَا يَرْكَعُونَ ﴿٤٨﴾

और जब उनसे कहा जाता है कि रूकूउ करों तो रूकूउ नहीं करते

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٤٩﴾

उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَهُۥ يُؤْمِنُونَ ﴿٥٠﴾

अब इसके बाद ये किस बात पर ईमान लाएँगे

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 1 सफर
الجمعة 1 صفر
هلال متزايد बढ़ता हुआ अर्धचंद्र दिन 2.2 / 29.5
रोशनी 6%
13 दिनों में पूर्णिमा
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है