क़ुरआन का रुकू 543 पढ़ें

रुकू 543 सूरह Al-Qaria (आयत 1 से 11) से है। इसमें 11 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 543

11
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.11
आयतें

रुकू 543 में सूरह

القارعة · जुज़ 30
पृष्ठ 600
रुकू 543
سورة العاديات
जुज़ 30 86.0% (485/564)
हिज़्ब 60 72.6% (209/288)

ٱلْقَارِعَةُ ﴿١﴾

खड़खड़ाने वाली

مَا ٱلْقَارِعَةُ ﴿٢﴾

वह खड़खड़ाने वाली क्या है

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْقَارِعَةُ ﴿٣﴾

और तुम को क्या मालूम कि वह खड़खड़ाने वाली क्या है

يَوْمَ يَكُونُ ٱلنَّاسُ كَٱلْفَرَاشِ ٱلْمَبْثُوثِ ﴿٤﴾

जिस दिन लोग (मैदाने हश्र में) टिड्डियों की तरह फैले होंगे

وَتَكُونُ ٱلْجِبَالُ كَٱلْعِهْنِ ٱلْمَنفُوشِ ﴿٥﴾

और पहाड़ धुनकी हुई रूई के से हो जाएँगे

فَأَمَّا مَن ثَقُلَتْ مَوَٰزِينُهُۥ ﴿٦﴾

तो जिसके (नेक आमाल) के पल्ले भारी होंगे

فَهُوَ فِى عِيشَةٍۢ رَّاضِيَةٍۢ ﴿٧﴾

वह मन भाते ऐश में होंगे

وَأَمَّا مَنْ خَفَّتْ مَوَٰزِينُهُۥ ﴿٨﴾

और जिनके आमाल के पल्ले हल्के होंगे

فَأُمُّهُۥ هَاوِيَةٌۭ ﴿٩﴾

तो उनका ठिकाना न रहा

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا هِيَهْ ﴿١٠﴾

और तुमको क्या मालूम हाविया क्या है

نَارٌ حَامِيَةٌۢ ﴿١١﴾

वह दहकती हुई आग है

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 18 रबी अल-अव्वल
الثلاثاء 18 ربيع الأول
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 19.4 / 29.5
रोशनी 77%
10 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ