मामलात पर आधारित फ़िक़्ह पर हदीसें

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«मामलात पर आधारित फ़िक़्ह» पर 104 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

मामलात पर आधारित फ़िक़्ह पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ यह जो नमाज़ है, इसमें लोगों की आम बात-चीत सही नहीं है। इसमें तो बस तसबीह, तकबीर और क़ुरआन की तिलावत होती है। सह़ीह़ ऐ अबा ह़िज़यम, तुम्हें कौन सी बात यहाँ खींच लाई है? सह़ीह़ ईसा बिन मरयम -अलैहिस्सलाम- ने एक व्यक्ति को चोरी करते देखा, तो उससे कहाः क्या तूने चोरी की है? उसने कहाः बिलकुल नहीं, उस अल्लाह की क़सम, जिसके सिवा को सह़ीह़ साद बिन उबादा ने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-से पूछा कि उनकी माँ ने एक मन्नत मानी थी, परन्तु उसे पूरा करने से पहले ही गुज़र गई। अब उन्हें स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मन्नत मानने से मना किया है और कहा है : "मन्नत कोई भलाई नहीं लाती। इसके द्वारा केवल कंजूस का धन निकाला जाता ह स़ह़ीह़ जहाँ तक मेरी बात है, तो अल्लाह की क़सम, अगर अल्लाह ने चाहा, तो जब भी मैं किसी बात की क़सम खाऊँगा और दूसरी बात को उससे बेहतर देखूँगा, तो अपनी क़सम का क सह़ीह़ एक अंसारी ने अपने दास से कह दिया कि तुम मेरे मरने के बाद आज़ाद हो। सह़ीह़ सुलैमान बिन दाऊद (अलैहिमस्सलाम) ने फ़रमायाः आज रात मैं सत्तर स्त्रियों के पास जाऊँगा, उनमें से हर स्त्री से एक-एक लड़का होगा, जो अल्लाह के रास्ते में सह़ीह़ अपने पास कुछ माल जमा रखो, यह तुम्हारे हित में बेहतर है स़ह़ीह़ जिसने किसी मुसलमान का माल हड़पने के लिए झूठी क़सम खाई, वह अल्लाह से इस हाल में मिलेगा कि अल्लाह उससे सख़्त क्रोधित होगा। सह़ीह़ जिसने किसी गुलाम में अपना भाग मुक्त किया तथा उसके पास इतना धन हो, जो उसकी पूरी क़ीमत को पहुँचता हो, तो गुलाम की न्यायसंगत क़ीमत लगाई जाए और अन्य साझेद सह़ीह़ जिसने किसी दास में अपना भाग मुक्त कर दिया, उसे अपने धन से पूरा दास मुक्त करना होगा। परन्तु, यदि उसके पास पर्याप्त धन न हो, तो उस दास की न्यायसंगत क़ीम सह़ीह़ जिसने किसी बात पर जान-बूझकर इस्लाम के अतिरिक्त किसी अन्य धर्म की झूठी क़सम खाई, तो वह वैसा ही होगा, जैसा उसने कहा सह़ीह़ जिसने किसी मुसलमान व्यक्ति का माल हड़पने के लिए अकाट्य एवं झूठी क़सम खाई, वह अल्लाह से इस अवस्था में मिलेगा कि वह उससे सख़्त क्रोधित होगा सह़ीह़ मेरी बहन ने यह मन्नत मानी कि वह नंगे पाँव पैदल अल्लाह के पवित्र घर की यात्रा करेगी। फिर मुझसे कहा कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से पूछक सह़ीह़ ऐ अब्दुर्रहमान बिन समुरा! सत्ता न माँगो, क्योंकि यदि माँगने पर सत्ता दिए गए, तो तुम उसी के हवाले कर दिए जाओगे सह़ीह़ जो किसी बात पर क़सम खा ले, फिर उससे अधिक परहेज़गारी वाली बात देखे, तो परहेज़गारी वाला कार्य करे। सह़ीह़ अगर तुमने उसे अपने मामा लोगों को दे दिया होता, तो अधिक सवाब मिलता सह़ीह़ उसे दे दो, क्योंकि तुम्हारे अंदर सबसे उत्तम व्यक्ति वह है, जो सबसे अच्छे तरीके से उधार चुकाने वाला हो सह़ीह़ तीन आदमी ऐसे हैं, जिनको दोगुना सवाब मिलेगा। एक वह अह्ले किताब जो अपने नबी पर ईमान लाया और फिर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लाया, दूसरा व सह़ीह़ तुमसे पहले के लोगों में से एक व्यक्ति का हिसाब लिया गया, तो उसके पास कोई भी पुण्यकर्म नहीं मिला। मिला तो बस इतना कि वह एक धनी व्यक्ति था, लोगों के साथ सह़ीह़ पूरा वज़न करके और डंडी झुकाकर दे सह़ीह़ तुममें से कोई अपनी रस्सियाँ लेकर पर्वत की ओर जाए और अपनी पीठ पर लकड़ियों का गट्ठर लादकर ले आए तथा उसे बेचे और इस तरह अल्लाह उसके चेहरे को (माँगने के अ सह़ीह़ जिसने अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए एक घोड़ा सुरक्षित रखा तथा ऐसा अल्लाह पर ईमान और उसके वचन को सच मानते हुए किया तो क़यामत के दिन उसे उसके खाने, प स़ह़ीह़ जिसे यह पसंद हो कि अल्लाह उसे क़यामत के दिन की परेशानियों से मुक्त कर दे, उसे चाहिए कि किसी अभावग्रस्त व्यक्ति को मोहलत दे या उसका क़र्ज़ माफ़ कर दे। सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनसे एक ऊँट खरीदा और उन्हें क़ीमत नापकर देते समय कुछ अधिक दिया। सह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल! मेरे दो पड़ोसी हैं। मैं दोनों में से किसे कोई वस्तु भेंट के रूप में दूँ? आपने कहाः जिसका द्वार तेरे द्वार से अधिक निकट हो। सह़ीह़ बहुत ख़ूब, यह तो बहुत लाभदायक माल है। यह तो वाकई लाभदायक धन है। जो कुछ तुमने कहा, उसे मैंने सुन लिया। मेरी राय यह है कि तुम इसे अपने रिश्तेदारों में ब सह़ीह़ मक्का विजय के बाद हिजरत नहीं रही, लेकिन जिहाद और नीयत बाक़ी हैं। तथा जब जिहाद के लिए निकलने को कहा जाए तो अविलंब निकल पड़ो। स़ह़ीह़ जिबरील मुझे बराबर पड़ोसी के बारे में ताकीद करते रहे, यहाँ तक कि मुझे लगने लगा कि वह उसे वारिस बना देंगे। स़ह़ीह़ ''ऐ अबूज़र! जब शोरबा पकाओ, तो उसमें पानी ज़्यादा डाल दो और पड़ोसियों का भी ख़्याल रख लो।'' स़ह़ीह़ जिसने अपनी (झूठी) क़सम से किसी मुसलमान का हक़ मारा, उसके लिए अल्लाह ने जहन्नम को वाजिब और जन्नत को हराम कर दिया।" एक व्यक्ति ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसू सह़ीह़ अशअरी लोग जब युद्ध में खाने-पीने की चीज़ों की कमी का सामना करते हैं या शहर में उनके बाल बच्चों का खाना कम पड़ने लगता है, सह़ीह़ एक महिला अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास एक बुनी हुई धारीदार चादर लेकर आईं सह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को एक जंगली गधा भेंट किया सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक अज़्दी व्यक्ति, जिसे इब्न अल-लुतबिया कहा जाता था, को ज़कात का धन इकट्ठा करने का ज़िम्मेवार बनाया। जब वह वापस आया, सह़ीह़ 'वला' (अर्थात वारिस बनने का अधिकार) उसके लिए है, जिसने मुक्त करने का उपकार किया हो। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मीठी चीज़ें और मधु पसंद करते थे। सामान्यतः जब अस्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो एक-एक कर अपनी पत्नियों के पास जाते सह़ीह़ आदम की संतान को ऐसी वस्तु की मन्नत मानने का अधिकार नहीं, जिसका वह मालिक न हो, ऐसे दास को मुक्त करने का अधिकार नहीं जिसका वह स्वामी न हो और ऐसी स्त्री सह़ीह़ अल्लाह के बंदों में से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो यदि अल्लाह पर क़सम खा लें, तो अल्लाह उसे पूरा कर देता है। स़ह़ीह़ किसी मुसलमान के लिए उचित नहीं है कि उसके पास कोई वस्तु हो, जिसकी वह वसीयत करना चाहता हो और वह वसीयतनामा लिखे बिना दो रात भी गुज़ारे। सह़ीह़ उससे कहो कि बात करे, छाया में जाए, बैठे और अपना रोज़ा पूरा करे। सह़ीह़ जो अपना धन किसी ऐसे व्यक्ति के पास पाए, जो दिवालिया हो गया हो, तो वह दूसरे के मुक़ाबले में उसका अधिक हक़दार है। सह़ीह़ जिसने खजूर का ऐसा पेड़ बेचा, जिसका परागण किया जा चुका हो, तो उसका फल बेचने वाले का होगा। हाँ, यदि खरीदने वाले ने शर्त लगा दी हो, तो उसका होगा। सह़ीह़ जो एक बित्ता समान भी ज़मीन हड़पेगा, उसकी गरदन में सात ज़मीनों का तौक डाला जाएगा। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने व्यवसायिक काफ़िलों से आगे जाकर मिलने और देहात वाले की ओर से नगर वासी के बेचने से मना किया है। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुज़ाबना यानी इस बात से मना फ़रमाया है कि बाग में लगे हुए फल यदि खजूर हों, तो उन्हें सूखी खजूरों के बदले सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुनाबज़ा से मना किया है। वह यह है कि बेचने वाला अपना कपड़ा ख़रीदने वाले की ओर बेचने के लिए फेंक दे और उसे सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने (पेड़ पर लगे हुए) फल को रंग पकड़ने से पहले बेचने से मना किया है। पूछा गया कि रंग पकड़ने का क्या मतलब है? सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फलों को प्रयोग के लायक़ होने से पहले बेचने से मना किया है। आपने बेचने वाले और ख़रीदने वाले दोनों को मना क सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने 'वला' (ऐसा अधिकार जिसके कारण दास को मुक्त करने वाला अपने मुक्त किए दास के मरने के बाद उसकी संपत्ति में से सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने गर्भ के गर्भ को बेचने से मना फ़रमाया है। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक यहूदी से खाने की वस्तु ख़रीदी और उसके पास अपना लोहे का कवच गिरवी रख दिया। सह़ीह़ यदि तुम पीछे रहकर भी अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए अच्छे कर्म करोगे, तो तुम्हारे दर्जे ऊँचे होंगे। यह भी संभव है कि तुम अभी जीवित रहो और बहु स़ह़ीह़ चाँदी सोने के बदले में अगर नक़द न हो तो सूद हो जाता है। गेहूँ, गेहूँ के बदले में अगर नक़द न हो तो सूद हो जाता है। जौ, जौ के बदले में अगर नक़द न हो, तो सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भूमि के किसी एक भाग की पैदावार के बदले में भूमि किराए पर लेने, बाली में मौजूद गेहूँ को बाली से अलग किए हुए सह़ीह़ व्यवसायिक दलों से आगे बढ़कर न मिलो, तुममें से कोई अपने भाई के सौदे पर सौदा न करे, आपस में दाम न बढ़ाओ, नगर का रहने वाला देहात में रहने वाले का सामान न सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इस बात से मना किया है कि कोई नगर का रहने वाला किसी देहात में रहने वाले का सामान बेचे (तथा फ़रमाया कि) तुम सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने सोने को चाँदी के बदले में उधार बेचने से मना फ़रमाया है। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने चाँदी को चाँदी के बदल में और सोने को सोने के बदल में बेचने मना फ़रमाया है। हाँ, यदि बराबर हो तो कोई बात न
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद