इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह पर हदीसें

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«इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह» पर 746 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दो मुसलमानों को एक मुश्रिक के बदले में छुड़ाया। सह़ीह़ मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखा कि सफ़र के आरंभ में दुश्मन पर धावा बोलने वालों को,उनके भाग के अतिरिक्त (ख़ुम्स निकालने के बाद ग़नीमत के ध सह़ीह़ हम अपनी लड़ाइयों में शहद और अंगूर प्राप्त करते, तो उसे खा लेते और तक़सीम के लिए अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास भेजते नहीं थे। इसकी सनद सह़ीह़ है। हमने ख़ैबर के दिन खाने की वस्तुएँ प्राप्त कीं, तो (एक-एक) आदमी आता और अपनी ज़रूरत भर लेकर वापस हो जाता। ह़सन जो अल्लाह तथा आख़िरत के दिन पर ईमान रखता हो, वह मुसलमानों के फ़य (मुश्रिकों से बिना युद्ध किए प्राप्त होने वाला धन) के जानवर पर इस तरह सवार न हो कि जब ह़सन मुसलमान अन्य लोगों के मुक़ाबले में एक हाथ की तरह हैं। उनका रक्त और उनका धन बराबर है। उनके निम्नतम व्यक्ति की दी हुई सुरक्षा भी इस लायक़ होती है कि सार सह़ीह़ मैं यहूदियों और ईसाइयों को ज़रूर अरब द्वीप से निकाल दूँगा, यहाँ तक कि मुसलमानों के सिवा किसी को नहीं छोड़ूँगा। ह़सन हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ ख़ैबर युद्ध में शरीक हुए, जहाँ हमें बकरियाँ मिलीं, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ख़ालिद बिन वलीद को दूमतल जंदल के सरदार उकैदिर की ओर भेजा, जिसे गिरफ़तार करके आपके पास लाया गया, तो आपने उसके रक्त को शवाहिद के आधार पर स़ह़ीह़ नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जब उन्हें यमन भेजा, तो आदेश दिया कि वह हर तीस गायों पर एक एक वर्षीय बछड़ा या बछिया लें ह़सन इस्लाम प्रभावी होता है, प्रभावित नहीं होता। स़ह़ीह़ जो आदमी किसी 'मुआहद' (वह ग़ैरमुस्लिम, जिसके साथ मुसलमानों का शांति समझौता हो) को क़त्ल करेगा, वह जन्नत की ख़ुश्बू तक न पाएगा, जबकि जन्नत की ख़ुश्बू चा सह़ीह़ सुन लो, शक्ति से आशय तीरंदाज़ी है। सुन लो, शक्ति से आशय तीरंदाज़ी है। सुन लो, शक्ति से आशय तीरंदाज़ी है। ह़सन जो सामर्थ्य होने के बावजूद क़ुरबानी न करे, वह हमारी ईदगाह के क़रीब भी न आए। सह़ीह़ हमने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ हुदैबिया के साल एक ऊँट सात लोगों की ओर से ज़बह किया तथा एक गाय सात लोगों की ओर से ज़बह किया। स़ह़ीह़ इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर क़ायम है स़ह़ीह़ इस बारे में आपका क्या कहना है कि अगर मैं पाँच वक़्त की फ़र्ज़ नमाज़ें पढ़ूँ, रमज़ान महीने के रोज़े रखूँ तथा हलाल को हलाल एवं हराम को हराम स़ह़ीह़ पवित्रता आधा ईमान है, अल-हम्दु लिल्लाह तराज़ू को भर देता है, सुबहानल्लाह और अल-हम्दु लिल्लाह दोनों मिलकर आकाश एवं धरती के बीच के खाली स्थान को भर देते ह़सन अमल छह प्रकार के हैं और लोग चार प्रकार के हैं। रही बात छह आमाल की, तो उनमें से दो प्रकार के अमल वाजिब करने वाले हैं, दो प्रकार के अमल बराबर-बराबर हैं, स़ह़ीह़ जब अल्लाह किसी बंदे के बारे में निर्णय करता है कि वह किस ज़मीन में मृत्यु पाएगा, तो वहाँ उसकी ज़रूरत रख देता है। स़ह़ीह़ और मैं साद बिन अबी बक्र नामी क़बीले से ताल्लुक़ रखता हूँ। स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हर नमाज़ के लिए वज़ू कर लिया करते थे स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने (अंगों को) एक-एक बार (धोकर) वज़ू किया। स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने वज़ू के अंगों को दो-दो बार धोया। स़ह़ीह़ जब तुममें से कोई अपने पेट में कोई चीज़ पाए और उसके लिए यह निर्णय लेना कठिन हो कि उससे कुछ निकला है या नहीं, तो मस्जिद से उस समय तक हरगिज़ न निकले, जब स़ह़ीह़ हर मुसलमान पर यह अनिवार्य है कि हर सात दिन में एक दिन स्नान करे, जिस दिन अपने सर तथा शरीर को धोए। स़ह़ीह़ मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास इस्लाम ग्रहण करने के लिए आया, तो आपने मुझे पानी तथा बेर के पत्तों से नहाने का आदेश दिया। स़ह़ीह़ जब मुअज़्ज़िन "اللهُ أَكْبَرُ اللهُ أَكْبَرُ" (अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर) कहता है और (उसके उत्तर में) तुममें से कोई "اللهُ أَكْبَرُ اللهُ أَكْبَرُ" ( स़ह़ीह़ जब तुम मुअज़्ज़िन को अज़ान देते हुए सुनो, तो उसी तरह के शब्द कहो, जो मुअज़्ज़िन कहता है। फिर मुझपर दरूद भेजो स़ह़ीह़ जो व्यक्ति किसी नमाज़ को भूल जाए, तो वह उसे उस समय पढ़ ले, जब याद आ जाए। इसके सिवा उसका कोई कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित) नहीं है स़ह़ीह़ जिसने अल्लाह के लिए कोई घर बनाया, अल्लाह जन्नत में उसके लिए उसी जैसा घर बनाएगा। स़ह़ीह़ मेरी इस मस्जिद में पढ़ी गई एक नमाज़ मस्जिद-ए-हराम को छोड़ अन्य मस्जिदों में पढ़ी गई एक हज़ार नमाज़ों से बेहतर है। स़ह़ीह़ जब तुममें से कोई मस्जिद के अंदर प्रवेश करे, तो बैठने से पहले दो रकातें पढ़ ले। स़ह़ीह़ जब तुममें से कोई मस्जिद में प्रवेश करे, तो यह दुआ पढ़े : "اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ" (ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के द्वार खोल दे) स़ह़ीह़ आदमी के बीच तथा कुफ़्र एवं शिर्क के बीच की रेखा नमाज़ छोड़ना है। स़ह़ीह़ वह वचन, जो हमारे और उनके बीच है, नमाज़ है। जिसने इसे छोड़ दिया, उसने कुफ़्र किया। स़ह़ीह़ ऐ बिलाल! नमाज़ क़ायम (खड़ी) करो, हमें उसके द्वारा सुकून पहुँचाओ। स़ह़ीह़ लोगो! मैंने ऐसा इसलिए किया, ताकि तुम मेरा अनुसरण कर सको और मेरी नमाज़ सीख सको। स़ह़ीह़ जब तुम नमाज़ पढ़ो तो अपनी सफ़ें सठीक कर लो। फिर तुममें से एक व्यक्ति तुम्हारी इमामत करे। फिर जब वह तकबीर कहे, तो तुम तकबीर कहो स़ह़ीह़ उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, मैं तुम्हारे बीच अल्लाह के रसूल से सबसे ज़्यादा मिलती-जुलती नमाज़ पढ़ने वाला व्यक्ति हूँ। दुनिया छोड़ने तक स़ह़ीह़ सबसे बुरा चोर वह है, जो अपनी नमाज़ में चोरी करता है।" किसी सहाबी ने पूछा कि नमाज़ में चोरी करने का क्या मतलब है? आपने उत्तर दिया : "रुकू एवं सजदा संपू स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब रुकू से पीठ उठाते, तो यह दुआ पढ़ते : "سَمِعَ اللهُ لِمَنْ حَمِدَهُ، اللَّهُمَّ رَبَّنَا لَكَ الْحَمْدُ، مِلْ स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़ा करते थे स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो सजदों के बीच यह दुआ पढ़ा करते थे : "رَبِّ اغْفِرْ لِي، رَبِّ اغْفِرْ لِي" (ऐ मेरे रब! मुझे क्षमा कर दे। ऐ मे स़ह़ीह़ यह एक शैतान है, जिसे ख़िंज़िब कहा जाता है। जब तुम्हें उसके व्यवधान डालने का आभास हो, तो उससे अल्लाह की शरण माँगो और तीन बार अपने बाएँ ओर थुत्कारो ह़सन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमें हर हाल में क़ुरआन पढ़ाते थे, सिवाय जनाबत (अपवित्रता) की हालत के। स़ह़ीह़ {क्या तुम हाजियों को पानी पिलाने और सम्मानित मस्जिद की सेवा को, उसके (ईमान के) बराबर समझते हो, जो अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान लाया।} [सूरा तौबा : 19] स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक साअ पानी से जनाबत का स्नान और एक मुद्द पानी से वज़ू कर लिया करते थे। स़ह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को देखा है कि आपने पेशाब किया, फिर वज़ू किया और अपने मोज़ों पर मसह किया स़ह़ीह़ नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब फ़ज्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो अपनी नमाज़ की जगह पर बैठे रहते, यहाँ तक कि सूरज अच्छी तरह निकल आता ह़सन अल्लाह की बंदियों को अल्लाह की मस्जिदों से न रोको, लेकिन वे बिना सुगंध लगाए निकलें। ह़सन जब तुममें से कोई मस्जिद में प्रवेश करे, तो नबी पर सलाम भेजे और यह दुआ पढ़े : اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ स़ह़ीह़ जो हमारी नमाज़ की तरह नमाज़ पढ़े और हमारे क़िबले की तरफ मुंह करे और हमारा क़ुर्बान किया हुआ जानवर खाए तो वह ऐसा मुसलमान है, जिसे अल्लाह और उसके रसूल स स़ह़ीह़ मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को दाईं और बाईं ओर सलाम फेरते हुए देखता था, यहाँ तक कि मैं आपके गाल का उजलापन देख लेता। ह़सन बेशक बंदा नमाज़ पढ़ता है, लेकिन उसके लिए उसमें से केवल दसवाँ, नौवाँ, आठवाँ, सातवाँ, छठा, पाँचवाँ, चौथाई, तिहाई या आधा हिस्सा ही लिखा जाता है। स़ह़ीह़ हर दो अज़ानों के बीच में नमाज़ है। हर दो अज़ानों के बीच में नमाज़ है।" फिर तीसरी बार फ़रमाया : "उसके लिए, जो पढ़ना चाहे। स़ह़ीह़ मर रहे लोगों को "ला इलाहा इल्लल्लाह" पढ़ने के लिए प्रेरित करो। स़ह़ीह़ ''जब कोई व्यक्ति मर जाता है, तो उसके कर्मों का सिलसिला रुक जाता है, सिवाय तीन चीज़ों के : स़दक़ा जारिया (अनवरत चलने वाला दान), ऐसी विद्या छोड़कर जाना सभी सनदों के आधार पर ह़सन हे अल्लाह के रसूल! साद की माता मृत्यु को प्राप्त हो चुकी है। ऐसे में कौन-सा सदक़ा सर्वश्रेष्ठ है? फ़रमाया : "पानी।" कहते हैं कि उन्होंने एक कुआँ खुदवा स़ह़ीह़ यदि तुम दोनों चाहो, तो मैं तुम्हें दे देता हूँ, लेकिन इसमें किसी धनी और किसी कमाने वाले शक्तिशाली व्यक्ति का कोई हिस्सा नहीं है।
بسم الله الرحمن الرحيم गुरु 17 जुमादा अल-अव्वल
الخميس 17 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.7 / 29.5
रोशनी 91%
12 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद