इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह पर हदीसें

इस्लाम > Hi > हदीस > इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह

«इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह» पर 746 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ मुअज़्जिन, अज़ान का अधिक हक़दार है और इमाम, इक़ामत का अधिक हक़दार है स़ह़ीह़ ''जिसने अज़ान सुनते समय यह दुआ पढ़ी : "ऐ अल्लाह! इस संपूर्ण आह्वान तथा खड़ी होने वाली नमाज़ के रब! मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को वसीला (जन्नत सह़ीह़ अल्लाह किसी युवती की नमाज़ बिना दुपट्टे के क़बूल नहीं करता । सह़ीह़ कपड़ा यदि चौड़ा हो, तो (उसे पूरे शरीर पर लपेटने के बाद) दाएँ किनारे को बाएँ कंधे पर और बाएँ किनारे को दाएँ कंधे पर डाल लो, किंतु यदि तंग हो, तो उसे अप स़ह़ीह़ तुममें से कोई भी व्यक्ति एक कपड़े में इस तरह नमाज़ न पढ़े कि उसके कंधे पर कुछ भी न हो। ह़सन हम लोग नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ एक यात्रा में थे। रात अंधेरी थी और हमें पता न चल सका कि क़िबला किधर है। अतः, हममें से हर व्यक्ति ने अपने सह़ीह़ पूरब और पश्चिम के बीच जो फ़ासला है, वह क़िबला है। सह़ीह़ रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी सवारी पर नफ़ल नमाज़ पढ़ लेते थे, चाहे वह जिधर जा रही हो। लेकिन, जब फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ने का इरादा फ़रमाते, तो सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब यात्रा कर रहे होते और नफ़ल नमाज़ पढ़ने का इरादा फ़रमाते, तो अपनी ऊँटनी का रुख़ क़िबला की ओर कर लेते और तक सह़ीह़ पूरी धरती मस्जिद है, सिवाय क़ब्रगाह और स्नान घर के। स़ह़ीह़ “क़ब्रों पर मत बैठो और उनकी ओर मुँह करके नमाज़ न पढ़ो।” सह़ीह़ जब तुममें से कोई मस्जिद आए, तो ठीक से देख ले। यदि जूतों में गंदगी या नापाकी दिखाई दे, तो उसे रगड़कर साफ कर ले और उन्हें पहनकर नमाज़ पढ़ ले। सह़ीह़ जब कोई व्यक्ति अपने जूतों से गंदी रौंदे, तो उन्हें पाक करने वाली वस्तु मिट्टी है। सह़ीह़ यह जो नमाज़ है, इसमें लोगों की आम बात-चीत सही नहीं है। इसमें तो बस तसबीह, तकबीर और क़ुरआन की तिलावत होती है। सह़ीह़ तसबीह (सुबहान अल्लाह कहना) पुरुषों के लिए है और ताली बजाना स्त्रियों कि लिए। सह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को नमाज़ पढ़ते समय देखा कि आपके सीने से रोने के कारण चक्की के चलने की तरह आवाज़ निकल रही है। आपपर अल्ल सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) नमाज़ पढ़ने कि लिए क़ुबा की ओर निकले। सह़ीह़ मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखा कि आप लोगों को नमाज़ पढ़ा रहे थे और उमामा बिंत अबुल आस, जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुपुत्री ज़ै सह़ीह़ दो काली वस्तुओं को नमाज़ की अवस्था में भी मार दो : साँप तथा बिच्छू। ह़सन नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मुसाफ़िर के लिए तीन दिन तथा तीन रात एवं घर पर रहने वाले के लिए एक दिन एवं एक रात इस बात की छूट दी है कि जब वह वज़ू क सह़ीह़ बिलाल (रज़ियल्लाहु अंहु) ने फ़ज्र होने से पहले ही अज़ान दे दी, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उन्हें आदेश दिया कि जाकर यह ऐलान करें : "लोग सुनो, सह़ीह़ जो ख़ुश्बू तुम्हारे बदन में लगी हुई है, उसे तीन बार धो डालो और शरीर से कुर्ता उतार दो तथा उमरा में भी वही करो, जो हज में करते हो। सह़ीह़ हम लोग नमाज़ पढ़ते और हमारे आगे से पशु गुजरते रहते। हमने इसका उल्लेख अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से किया, तो आपने फरमयाः "कजावे के पिछले सह़ीह़ जब तुममें से कोई नमाज़ पढ़े, तो अपनी नमाज़ के लिए कोई ओ़ट बना ले, चाहे वह एक तीर ही क्यों न हो। सह़ीह़ जब तुममें से कोई नमाज़ के लिए खड़ा हो और उसके सामने कजावे के पिछले भाग की लकड़ी के समान कोई वस्तु हो, तो वह उसके लिए ओट हो जाती है। किंतु, यदि उसके सा सह़ीह़ जब तुममें से कोई सुतरा सामने रखकर नमाज़ पढ़े और कोई उसके सामने से गुज़रना चाहे, तो उसे रोके। यदि वह न रुके, तो उससे भिड़ जाए, इसलिए कि वह शैतान है। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) कोख पर हाथ रखकर नमाज़ पढ़ने से मना किया है। सह़ीह़ आइशा (रज़ियल्लाहु अन्ह) से वर्णित है कि वह इस बात को नापसंद करती थीं कि कोई (नमाज़ पढ़ते समय) अपने हाथ को कोख पर रखे तथा कहा करती थीं कि यहूदी ऐसा करत सह़ीह़ जब खाना सामने रख दिया जाए, तो मग़रिब की नमाज़ से पहले खाना खा लो और खाना छोड़कर नमाज़ के लिए जाने की जल्दी न करो। सह़ीह़ जब तुममें से कोई नमाज़ के लिए खड़ा होता है, तो अल्लाह की रहमत उसकी ओर मुतवज्जेह होती है। अतः, वह कंकड़ न छूए। सह़ीह़ मैंने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से पूछा : नमाज़ में इधर उधर देखना कैसा है? तो आपने उत्तर दिया : "यह एक प्रकार की चोरी है, जो शैतान बंदे की सह़ीह़ तुममें से कोई जब नमाज़ में खड़ा होता है, तो वह अपने रब से व्यक्तिगत रूप से बात कर रहा होता है या उसका रब उसके और क़िबले के बीच होता है। इसलिए, तुममें सह़ीह़ अपने इस परदे को हमारे सामने से हटा दो। क्योंकि, इसके चित्र बराबर मेरी नमाज़ में व्यवधान डाल रहे हैं। सह़ीह़ मेरी यह चादर अबू जह्म को दे दो और अबू जह्म से उसकी अंबजानी चादर (बिना धारियों वाली मोटी चादर) ले आओ। क्योंकि इसने अभी नमाज़ से मेरा ध्यान भटकाने का का स़ह़ीह़ कुछ लोगों को क्या हो गया है कि वे नमाज़ में अपनी नज़रें आकाश की ओर उठाते हैं?" आपने इसके बारे में बड़ी सख़्त बात करते हुए यहाँ तक फ़रमा दिया : "वे इसस सह़ीह़ नमाज़ में जम्हाई लेना शैतान की ओर से होता है। अतः यदि किसी को जम्हाई आए तो उसे सामर्थ्य भर रोके। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने महल्लों में मस्जिदें बनाने तथा उन्हें पवित्र एवं स्वच्छ और सुगंधित रखने का आदेश दिया है। स़ह़ीह़ वे ऐसे लोग हैं कि उन लोगों के अंदर जब कोई सदाचारी बंदा अथवा सदाचारी व्यक्ति मर जाता, तो उसकी कब्र के ऊपर मस्जिद बना लेते सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने नज्द की ओर कुछ सवार भेजे, जो बनू हनीफ़ा के एक आदमी को पकड़ लाए। उस आदमी का नाम सुमामा बिन उसाल था। लोगों ने उसे मस्ज सह़ीह़ मैं आपको अल्लाह की क़सम देकर पूछता हूँ, क्या आपने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुना है कि : "ऐ हस्सान! मेरी ओर से उत्तर दो! ऐ अल् सह़ीह़ जो किसी व्यक्ति को मस्जिद में खोए हुए सामान को खोजने का ऐलान करते हुए सुने, तो कहे : अल्लाह उसको तुम्हें वापस न लौटाए। क्योंकि मस्जिदें इसके लिए नहीं सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : जब किसी व्यक्ति को मस्जिद में क्रय-विक्रय करते हुए देखो, तो कहो : अल्लाह तुम्हारे व्यापार में ल ह़सन मस्जिदों में न तो हद लागू की जाएगी और उनके अंदर क़िसास लिया जाएगा। सह़ीह़ ख़ंदक़ के दिन साद (रज़ियल्लाहु अंहु) जख़्मी हो गए थे। उनको क़ुरैश की बनू मईस बिन आमिर बिन लुऐ शाखा के हिब्बान बिन क़ैस नामी एक व्यक्ति ने, जिसे हिब्बा सह़ीह़ "जाने भी दो अबू बक्र! ये ईद के दिन हैं।" मालूम रहे कि वे मिना के दिन थे। सह़ीह़ आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं : वह मेरे पास आकर बातें किया करती थी और जब भी मेरे पास आती, यह शेर ज़रूर पढ़ती। कमरबंद का दिन अल्लाह की अजीब क़ुदरतों सह़ीह़ मस्जिद में थूकना पाप है और उसका कफ़्फ़ारा यह है कि उसे दफ़न कर दिया जाए। सह़ीह़ क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक कि लोग मस्जिदों के बारे में गर्व न करने लगें। सह़ीह़ मुझे ऊँची-ऊँची मस्जिदें निर्माण करने का आदेश नहीं दिया गया है। ह़सन अच्छे ढंग से नमाज़ न पढ़ने वाले की हदीस, रिफ़ाआ (रज़ियल्लाहु अंहु) के वर्णन अनुसार। सह़ीह़ अबू हुमैद साइदी (रज़ियल्लाहु अंहु) का अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के दस सहाबा की उपस्थिति में, जिनमें अबू क़तादा भी शामिल थे, यह कहना कि सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब रात में उठते, तो तकबीर (अल्लाहु अकबर) कहते, फिर यह दुआ पढ़ते : "سبحانك اللهم وبحمدك وتبارك اسمك، وتعالى ج स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नमाज़ तकबीर से और क़ुरआन पाठ "अल-ह़म्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन सह़ीह़ रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब तकबीर (अल्लाहु अकबर) कहते, तो अपने दोनों हाथों को कानों के बराबर उठाते और जब रुकू करते, तो अपने दोनों हाथों क सह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ नमाज़ पढ़ी, तो (देखा कि) आपने अपने दाहिने हाथ को अपने बाएँ हाथ पर, सीने के ऊपर रखा। ह़सन “संभवतः तुम लोग अपने इमाम के पीछे पढ़ते हो"? हमने कहा : हाँ, ऐ अल्लाह के रसूल! आपने फ़रमाया : "ऐसा न करो। हाँ, मगर सूरा फ़ातिहा पढ़ लिया करो; क्योंकि सारी रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) तथा अबू बक्र एवं उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) नमाज़ का आरंभ "अल-ह़म्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन" से करते थे। ह़सन जहाँ तक इस आदमी की बात है, तो इसने अपना हाथ भलाई से भर लिया है। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ज़ुहर की पहली दो रकातों में सूरा फ़ातिहा और दो सूरतें पढ़ते थे और बाद की दो रकातों में सिर्फ़ सूरा फ़ातिहा पढ़ते थे और सह़ीह़ हम लोग ज़ुहर और अस्र में अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के क़याम (खड़े होने) का अनुमान लगाते थे। हमने अनुमान लगाया कि आप ज़ुहर की पहली दो र
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद