फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह पर हदीसें

इस्लाम > Hi > हदीस > फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

«फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह» पर 1144 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ अगर तुम चाहो, तो सब्र करो, तुम्हें जन्नत मिलेगी और अगर चाहो, तो मैं अल्लाह से तुम्हारे लिए स्वास्थ्य लाभ की दुआ कर दूँ। स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल, माल-मवेशी हलाक हो गए और रास्ते अवरुद्ध हो गए। अल्लाह से दुआ करें कि हमें वर्षा प्रदान करे सह़ीह़ मैंने मुहम्मद- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की नमाज़ को ध्यान से देखा, तो पाया कि आपका क़याम, रुकू, रुकू के बाद सीधे खड़ा होना, सजदा, दो सजदों के बीच बैठ सह़ीह़ एक व्यक्ति अरफ़ा में ठहरा हुआ था कि अचानक अपने ऊँट से गिर पड़ा और उस की गरदन टूट गई। अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कहाः "इसे पानी और बे स़ह़ीह़ वापस जाकर फिर से नमाज़ पढ़ो, क्योंकि तुमने नमाज़ पढ़ी ही नहीं। सह़ीह़ उहुद के दिन एक आदमी ने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से कहाः आप क्या कहते हैं कि अगर मैं शहीद हो गया, तो कहाँ रहूँगा? आपने कहाः "जन्नत में।" यह सुनकर सह़ीह़ अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उमामा बिंत ज़ैनब (अपनी नातिन) को उठाए हुए नमाज़ पढ़ लेते थे। सह़ीह़ हमें जनाज़े के पीछे चलने से मना किया गया है, लेकिन इस मामले में हमपर सख़्ती नहीं बरती गई है। सह़ीह़ लोगों को आदेश दिया गया है कि उनका अंतिम कार्य काबा का तवाफ़ हो। हाँ, मगर माहवारी के दिनों वाली स्त्री के लिए आसानी रखी गई है। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास एक व्यक्ति लाया गया, जिसने मदिरा पान कर रखा था, तो आपने फरमायाः "इसको मारो।" स़ह़ीह़ मूँछें कतरवाओ और दाढ़ी बढ़ाओ। स़ह़ीह़ जब कोई मुस्लिम या मोमिन बंदा वज़ू करता है और अपना चेहरा धोता है, तो उसके चेहरे से वह सारे गुनाह पानी के साथ या पानी की अंतिम बूँद के साथ निकल जाते हैं सह़ीह़ दरअसल, हमसे पहले किसी समुदाय के लिए ग़नीमत का धन हलाल नहीं किया गया था। फिर अल्लाह ने जब हमारी दुर्बलता तथा असमर्थता देखी, तो उसे हमारे लिए हलाल कर दि सह़ीह़ बेशक अल्लाह ही के लिए है, जो उसने ले लिया और उसी का है, जो उसने दिया। उसके समीप प्रत्येक वस्तु का समय निश्चित है। अतः अब तू सब्र कर तथा अल्लाह से प्रत स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमें सभी कामों के लिए उसी प्रकार इस्तिख़ारा सिखाते थे, जिस प्रकार हमें क़ुरआन की सूरा सिखाते थे। सह़ीह़ सब्र तो मुसीबत के शुरू में करना होता है। सह़ीह़ बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) को आदेश दिया गया था कि वह अज़ान के शब्द दो-दो बार कहें और इक़ामत के शब्द एक-एक बार। सह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखा कि जब मक्का आते और (तवाफ़ शुरु करते समय) हजरे असवद को छूते, तो तीन चक्कर दुलकी चाल से चलते। स़ह़ीह़ जनाबत (स्वप्नदोष, सह्वास या किसी भी कारणवश वीर्यस्खलन हो जाने से होने वाली अपवित्रता से पवित्र होने) का स्नान करने का तरीक़ा स़ह़ीह़ जिसने मेरे इस वज़ू की तरह वज़ू किया और उसके बाद दो रकात नमाज़ पढ़ी, जिसमें उसने अपने जी में कोई बात न की, अल्लाह उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर देता है स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब जनाबत का स्नान करते, तो अपने दोनों हाथों को धोते, फिर नमाज़ के वज़ू की तरह वज़ू करते, फिर स्नान करते सह़ीह़ खड़े हो जाओ, मैं तुम्हें नमाज़ पढ़ाता हूँ। सह़ीह़ जब तुममें से किसी की पत्नी उससे मस्जिद जाने की अनुमति माँगे, तो वह उसे न रोके। सह़ीह़ मैंने अबू बक्र, उमर तथा उसमान के साथ नमाज़ पढ़ी, लेकिन उनमें से किसी को "بسم الله الرحمن الرحيم" पढ़ते नहीं सुना। सह़ीह़ क़यामत के दिन अल्लाह के निकट सबसे बुरे लोगों में वह पुरुष भी शामिल होगा, जो अपनी पत्नी के पास जाए और उसकी पत्नी उसके पास आए, फिर वह अंदर की बातों को ब स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह, मेरी क़ब्र को बुत न बनने देना विभिन्न सनदों और शवाहिद के आधार पर सह़ीह़ मेरी क़ब्र को मेला स्थान न बनाना और न अपने घरों को क़ब्रिस्तान बनाना। हाँ, मुझपर दरूद भेजते रहना। क्योंकि तुम जहाँ भी रहो, तुम्हारा सलाम मुझे पहुँच जा स़ह़ीह़ मैं एक ऐसा व्यक्ति था, जिसे बहुत ज़्यादा मज़ी (चिपचिपा सफ़ेद तरल जो पेशाब के रास्ते से) आती थी। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दामाद होने सह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल, अल्लाह हक़ बात से शर्माता नहीं है। यदि स्त्री का स्वप्नदोष हो जाए, तो क्या उसपर स्नान है? अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सह़ीह़ जब तुम वस्त्र धारण करो अथवा वज़ू करो तो दाहिने ओर से प्रारंभ करो सह़ीह़ जो इन पुत्रियों के द्वारा कुछ आज़माया जाए, फिर वह उनके साथ अच्छा व्यवहार करे, तो वे उनके लिए जहन्नम की आग से बचाव का माध्यम बन जाएँगी। स़ह़ीह़ अल्लाह के निकट सबसे अधिक कौन-सा कर्म प्रिय है? आपने उत्तर दिया : "समय पर नमाज़ पढ़ना।" मैंने पूछा : फ़िर काैन-सा? फ़रमाया : "माँ-बाप के साथ अच्छा व्यव स़ह़ीह़ मुनाफ़िक़ों पर सबसे भारी नमाज़ इशा और फ़ज्र की नमाज़ है और अगर उन्हें इन नमाज़ों के सवाब का अंदाज़ा हो जाए, तो घुटनों को बल चलकर आएँ सह़ीह़ क़यामत के दिन मोमिन का ज़ेवर वहाँ तक पहुँचेगा, जहाँ तक वज़ू का पानी का पहुँचेगा। सह़ीह़ इन लोगों का भय कैसा है? यह स्पष्ट अर्थ वाली हदीस सुनकर नर्म पड़ जाते हैं, लेकिन अस्पष्ट अर्थ वाली हदीस सुनकर हलाक होने लगते हैं! स़ह़ीह़ जिस दिन भी बंदे सुबह करते हैं, दो फ़रिश्ते उतरते हैं; एक कहता है : ऐ अल्लाह ख़र्च करने वाले को उत्तम प्रतिफल प्रदान कर। जबकि दूसरा कहता है : ऐ अल्लाह, सह़ीह़ इसने ऐसी तौबा की है कि यदि उसे मदीने के सत्तर (70) लोगों के बीच बाँट दिया जाए, तो सबको काफ़ी हो जाए। क्या उसने इससे उत्तम भी कुछ पाया कि (सर्वशक्तिमान सह़ीह़ मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के कपड़े से जनाबत को धो देती, फिर आप नमाज़ के लिए नकल जाते, जबकि पानी का निशान आपके कपड़े पर दिखाई पड़ता। सह़ीह़ मैं सईद बिन जुबैर के पास बैठा था कि उन्होंने कहाः किसने आज रात तारा टूटते देखा है? मैंने कहाः मैंने देखा है। फिर मैंने कहाः उस समय मैं नमाज़ में नहीं स़ह़ीह़ अल्लाह की क़सम, अल्लाह तुम्हारे द्वारा यदि एक भी व्यक्ति को हिदायत दे दे, तो यह तुम्हारे लिए लाल ऊँटों से उत्तम है। सह़ीह़ आदमी को जमात के साथ नमाज़ पढ़ने से घर तथा बाज़ार में नमाज़ पढ़ने की तुलना में पच्चीस गुना अधिक सवाब मिलता है। स़ह़ीह़ जिसने अल्लाह के रास्ते में युद्ध करने वाले किसी व्यक्ति को युद्ध के सामान देकर तैयार किया, उसने युद्ध किया और जिसने किसी युद्ध पर गए हुए व्यक्ति के घर सह़ीह़ नबी (सल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम) किसी नफ़ल नमाज़ की उतनी पाबंदी नहीं करते थे, जितनी फ़ज्र की दो रकातों की करते थे। सह़ीह़ जमात के साथ पढ़ी गई नमाज़ अकेले पढ़ी गई नमाज़ के मुक़ाबले में सत्ताईस दरजा श्रेष्ठ है। स़ह़ीह़ उन्हें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की तरह वज़ू करके दिखाया सह़ीह़ क्या तुम नहीं जानते कि इसलाम पहले के गुनाहों को ख़त्म कर देता है, हिजरत पहले के गुनाहों को ख़त्म कर देती है और हज पहले के गुनाहों को ख़त्म कर देता है? सह़ीह़ क्या बात है कि माहवारी वाली स्त्री छूटे हुए रोज़े बाद में रख लेती है, लेकिन छूटी हुई नमाज़ें बाद में नहीं पढ़ती? उन्होंने कहाः क्या तू हरूरिया है? मैं सह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल, ऐसा लग रहा था कि मैं अस्र की नमाज़ नहीं पढ़ा सकूँगा, यहाँ तक सूरज डूबने लगा, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः अल्लाह की सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपने सर पर तीन बार पानी डालते थे। सह़ीह़ मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास उस समय पहुँचा, जब आप एक ताज़ा मिसवाक से दाँत साफ़ कर रहे थे। वह कहते हैंः मिसवाक का एक किनारा आपकी ज़ुबान पर स़ह़ीह़ तुम्हारे लिए काफ़ी था कि तुम अपने हाथों से इस तरह कर लेते।" फिर आपने अपने दोनों हाथों को ज़मीन पर एक बार मारा, उसके बाद बाएँ हाथ को दाएँ हाथ पर फेरा त सह़ीह़ जब उहुद युद्ध का समय आ गया, तो मेरे पिता ने मुझे बुलाकर कहाः मुझे लगता है कि मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के उन साथियों के साथ क़त्ल कर दिया जाऊ सह़ीह़ मैंने अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) को देखा कि वह एक व्यक्ति के पास से गुज़रे, जो अपनी ऊँटनी को बिठाकर ज़बह कर रहा था, तो फ़रमायाः उसे खड़ा ह़सन ऐ अल्लाह, मैं लोगों को दो कमज़ोरों के हक़ को नष्ट करने से डराता हूँ; यतीम तथा स्त्री। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मेरी गोद में टेक लगाकर क़ुरआन पढ़ा करते थे, जबकि मैं मासिक धर्म के समय में होती थी। स़ह़ीह़ मुझसे पहले अल्लाह ने जितने नबी भेजे, उनके लिए उनकी उम्मत में कुछ सहयोगी एवं साथी हुआ करते थे, जो उनकी सुन्नत पर अमल और उनके आदेश का पालन करते थे। सह़ीह़ एक व्यक्ति ने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से उस वक्त पूछा जब आप घोड़े की काठी के पावदान में पाँव रख चुके थे कि कौन-सा जिहाद सबसे उत्तम है सह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल! क्या बात है कि लोगों ने उमरा करने के बाद एहराम खोल दिया है और आपने उमरा के बाद एहराम नहीं खोला? तो आपने फ़रमायाः मैंने अपने बाल जमा स़ह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अल्लाह के अतिरिक्त किसी के सत्य पूज्य न होने और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के अल्लाह के रसूल हो सह़ीह़ आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ज़ुहर की नमाज़ तेज़ धूप में पढ़ते थे, अस्र की नमाज़ ऐसे समय पढ़ते थे जब सूरज साफ़ और रौशन रहता था, मगरिब की नमाज सूरज डूब
بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.5 / 29.5
रोशनी 92%
12 दिनों में अमावस्या
الله أكبر अल्लाह सबसे महान है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद