इस्लाम > Hi > हदीस > आहवन एव भलई क आदश दन तथ बरई स रकन क परबध करन > जब हम अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हाथ पर सुनने तथा आज्ञा का पालन पर बैअत …
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن ابن عمر رضي الله عنهما قال: كنا إذا بايعنا رسول الله صلى الله عليه وسلم على السمع والطاعة، يقول لنا: «فيما استطعتم».
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- बता रहे हैं कि सहाबा जब अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हाथ पर बैअत करते, तो आप उन्हें शासक की बात सुनने तथा उसकी आज्ञा का पालन करने का आदेश देते तथा आज्ञापालन के साथ सामर्थ्य रखने की बंदिश लगा देते थे। इसका मतलब यह हुआ कि यदि किसी मुसलमान को शासक की ओर से ऐसी बात का पाबंद बनाया जाए, जो उसकी शक्ति से बाहर हो, तो उसपर उसकी आज्ञा का पालन करना ज़रूरी नहीं है। अल्लाह तआला का फ़रमान है : "अल्लाह किसी प्राणी पर उसकी शक्ति से अधिक बोझ नहीं डालता।"
श्रेणियाँ : शरई राजनीति · जनता पर इमाम (शासनाध्यक्ष) का अधिकार · आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना