जब हम अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हाथ पर सुनने तथा आज्ञा का पालन पर बैअत …

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: जब हम अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हाथ…

عن ابن عمر رضي الله عنهما قال: كنا إذا بايعنا رسول الله صلى الله عليه وسلم على السمع والطاعة، يقول لنا: «فيما استطعتم».

हदीस की व्याख्या: जब हम अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हाथ…

अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- बता रहे हैं कि सहाबा जब अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हाथ पर बैअत करते, तो आप उन्हें शासक की बात सुनने तथा उसकी आज्ञा का पालन करने का आदेश देते तथा आज्ञापालन के साथ सामर्थ्य रखने की बंदिश लगा देते थे। इसका मतलब यह हुआ कि यदि किसी मुसलमान को शासक की ओर से ऐसी बात का पाबंद बनाया जाए, जो उसकी शक्ति से बाहर हो, तो उसपर उसकी आज्ञा का पालन करना ज़रूरी नहीं है। अल्लाह तआला का फ़रमान है : "अल्लाह किसी प्राणी पर उसकी शक्ति से अधिक बोझ नहीं डालता।"

श्रेणियाँ : शरई राजनीति · जनता पर इमाम (शासनाध्यक्ष) का अधिकार · आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना

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الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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