फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह पर हदीसें

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«फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह» पर 1144 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब अरफ़ा से मुज़दलिफ़ा की ओर चले तो किस गति से चल रहे थे? उन्होंने उत्तर दियाः मध्यम गति से चल रहे थे, लेकिन स़ह़ीह़ शब-ए-क़द्र को (रमज़ान के) अंतिम दस दिनों की विषम रातों में तलाश करो। सह़ीह़ अल्लाह के निकट सबसे प्रिय रोज़ा दाऊद- अलैहिस्सलाम- का रोज़ा और सबसे प्रिय नमाज़ दाऊद- अलैहिस्सलाम- की नमाज़ है। आप आधी रात सोते, फिर एक तिहाई रात नमाज सह़ीह़ मेरे भाई दाऊद के रोज़े (आधे साल के रोज़े) से बढ़कर कोई रोज़ा नहीं है। एक दिन रोज़ा रखो और एक दिन बिना रोज़े के रहो। सह़ीह़ पाँच प्रकार के जीव-जन्तु हानिकारक हैं, उन्हें हरम के अंदर भी मारा जाएगा, कौआ, चील, बिच्छू, चूहा और काटने वाला कुत्ता। सह़ीह़ न कमीज पहने, न साफ़े बाँधे, न पाजामे पहने, न सरपोश वाला जामा पहने और न मोज़ा पहने। हाँ, यदि किसी के पास जूते न हों तो मोज़े पहन सकता है, लेकिन उन्हें स़ह़ीह़ मैं देख रहा हूँ कि तुम सब के स्वप्न अंतिम सात रातों पर एकमत हो गए हैं। इसलिए जिसे इस रात की तलाश हो, वह अंतिम सात रातों में तलाश करे। सह़ीह़ जब रात इधर से आ जाए और दिन उधर से चला जाए, तो रोज़ा खोलने का समय हो गया। सह़ीह़ पाँच ओक़िया से कम (चाँदी) में ज़कात नहीं है, पाँच से कम ऊँट में ज़कात नहीं है और पाँच वसक़ से कम (अन्न) में ज़कात नहीं है। सह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल! मैंने जाहिलीयत के ज़माने में मन्नत मानी थी कि मैं मस्जिदे हराम में एक रात (एक रिवायत के मुताबिक एक दिवसीय) ऐतिकाफ़ करुँगा, इसके बारे स़ह़ीह़ जब तुम (रमज़ान का) चाँद देखो, तो रोज़ा रखो और जब (शव्वाल का) चाँद दखो, तो रोज़ा रखना बंद कर दो। (और) अगर आकाश बादल से ढका हुआ हो, तो उसका अंदाज़ा लगा सह़ीह़ अगर मुझे पहले वह बात मालूम हो गई होती, जो बाद में मालूम हुई, तो मैं साथ में क़ुरबानी का जानवर न लाता तथा यदि मैं क़ुरबानी का जानवर न लाया होता, तो हला स़ह़ीह़ निःसंदेह अल्लाह और उसके रसूल ने शराब, मरे हुए जानवर, सुअर और मूर्तियों को हराम किया है। स़ह़ीह़ “‎क्या अल्लाह ने तुम्हारे लिए वह चीज़ें नहीं बनाई हैं, जिनसे तुम सदक़ा कर सकते हो? हर तस्बीह (सुब्हानल्लाह कहना) सदक़ा है, हर तकबीर (अल्लाहु अकबर कहना स़ह़ीह़ जो चीज़ तुम्हें संदेह में डाले, उसे छोड़कर वह अख़्तियार करो, जो संदेह में न डाले। क्योंकि सच्चाई इत्मीनान है और झूठ शक व शुबह है। स़ह़ीह़ आप हमें आदेश देते कि जब हम सफ़र में हों तो तीन दिन और तीन रात पेशाब, पाखाना और नींद के बाद अपने मोज़े न उतारें, मगर जनाबत की बात दूसरी है। स़ह़ीह़ आदमी का जमात के साथ नमाज़ पढ़ना बाज़ार या घर में नमाज़ पढ़ने की तुलना में (पुण्य के मामले में) बीस से अधिक दर्जा बढ़ा हुआ होता है शवाहिद के आधार पर स़ह़ीह़ न किसी की अकारण हानि करना उचित है, न बदले में हानि करना उचित है। जो किसी का नुक़सान करेगा, अल्लाह उसका नुक़सान करेगा और जो किसी को कठिनाई में डालेगा, स़ह़ीह़ “किसी मुस्लिम व्यक्ति का रक्त बहाना केवल तीन परिस्थितियों में वैध है सह़ीह़ ऐ यज़ीद! तेरे लिए वही है, जिसकी तूने नीयत की और ऐ मअन! तेरे लिए वह है, जो तूने लिया। स़ह़ीह़ अगर लोगों को उनके दावों के आधार पर दे दिया जाए तो कुछ लोग, लोगों की जान और माल तक का दावा करने लगें। लेकिन, दावा करने वाले को प्रमाण देना है और इनकार सह़ीह़ मैं तुम्हें जिस चीज़ से रोकूँ, उससे बचते रहो और जिस चीज का आदेश दूँ, उसे जहाँ तक हो सके किए जाओ, क्योंकि तुमसे पहले के लोगों को उनके अधिक प्रश्नों और सह़ीह़ मेरे आगे मेरी उम्मत के अच्छे और बुरे सब कर्म पेश किए गए। तो मैंने उसके अच्छे कर्मों से रास्ते से कष्टदायक वस्तु का हटाना भी पाया और उसके बुरे कर्मों म सह़ीह़ जब किसी बीमारी आदि के कारण, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की रात की नमाज़ छूट जाती तो दिन में बारह रकअत पढ़ लेते थे। सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात में इतनी देर तक नमाज़ में खड़े रहते कि आपके दोनों पाँव सूज जाते थे। स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुसीबत के समय चीख़-चीख़ कर रोने वाली, बाल मुँडवाने वाली और कपड़े फाड़ने वाली औरतों से अपने बरी होने का एल स़ह़ीह़ जिसने लहसुन या प्याज़ खाया हो वह हमसे दूर रहे - या फ़रमाया : - हमारी मस्जिद से दूर रहे और अपने घर में बैठा रहे। सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने नज्जाशी के ज़नाज़े की नमाज़ पढ़ी और मैं दूसरी अथवा तीसरी पंक्ति में था। सह़ीह़ सजदा सह्व के बारे में ज़ुल यदैन की हदीस। सह़ीह़ अल्लाह के निकट सबसे प्रिय स्थान मस्जिदें और सबसे अप्रिय स्थान, बाज़ार हैं। स़ह़ीह़ जब रमज़ान के अंतिम दस दिन आते, तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- रातों को जागते, अपने घर के लोगों को जगाते, ख़ूब इबादतें करते और कमर कस लेत सह़ीह़ वह जहन्नम में है। अतः, लोग उसे देखने गए, तो पाया कि उसने ग़नीमत के मााल का एक काली धारियों वाला कपड़ा चुरा रखा था। सह़ीह़ युद्ध धोखा है। सह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल, यदि मैं अबू सलमा के बेटों पर खर्च करूँ, तो क्या मुझे उसका प्रतिफल मिलेगा, जबकि मैं उन्हें इस अवस्था में छोड़ भी नहीं सकती, क्योंकि व सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में हमें इस तरह का खाना कम ही मिला करता था। जब हमें इस तरह का खाना मिलता, तो हमारे पास रूमाल नहीं स़ह़ीह़ जिबरील मुझे बराबर पड़ोसी के बारे में ताकीद करते रहे, यहाँ तक कि मुझे लगने लगा कि वह उसे वारिस बना देंगे। स़ह़ीह़ तुम्हारा क्या विचार है कि यदि तुममें से किसी के द्वार पर नहर प्रवाहित हो और वह उसमें प्रत्येक दिन पाँच बार स्नान करता हो, तो क्या उसके शरीर में मैल का सह़ीह़ शहीद पाँच हैं; ताऊन (प्लेग) से मरने वाला, पेट की बीमारी से मरने वाला, डूबकर मरने वाला, किसी गिरने वाली वस्तु के नीचे दबकर मरने वाला और अल्लाह के रास्त सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दस लोगों का के एक सैन्य दल जसूसी के लिए भेजा और आसिम बिन साबित अंसारी (रज़ियल्लाहु अंहु) को उसका प्रमुख ब सह़ीह़ ऐ अल्लाह, हमारे जीवित तथा मृत, छोटे तथा बड़े, पुरुष तथा स्त्री और उपस्थित तथा अनुपस्थित सबको क्षमा कर दे। ऐ अल्लाह, हममें से जिसे जीवित रखना हो, इसलाम सह़ीह़ ऐ अल्लाह, अमुक पुत्र अमुक तेरी शरण तथा तेरी सुरक्षा में है। अतः उसे क़ब्र की आज़माइश और आग के अज़ाब से बचा। तू दाता और प्रशंसायोग्य है। ऐ अल्लाह, इसे सह़ीह़ आँखें आँसू बहा रही हैं और दिल शोकाकुुल है, लेकिन हम वही कहते हैं, जो हमारे रब को पसंद हो और ऐ इबराहीम, हम तेरी जुदाई से दुखी हैं। सह़ीह़ मेरी उम्मत का भ्रमण (सर्वशक्तिमान एवं प्रभुत्वशाली) अल्लाह के मार्ग में जिहाद है। सह़ीह़ तेरे लिए इसके बदले में क़यामत के दिन सात सौ नकेल लगी हुई ऊँटनियाँ हैं। सह़ीह़ हम नमाज़ में बात कर लिया करते थे। आदमी अपने साथी से, जो उसके बगल में नमाज़ पढ़ रहा होता, बात कर लेता था। यहाँ तक कि क़ुरआन की यह आयतः "وقوموا لله قانت सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जुमा के दिन ख़ुतबा दे रहे थे कि एक व्यक्ति अंदर आया। आपने कहाः "ऐ अमुक क्या तूने नमाज़ पढ़ ली है?" उसने कहाः नहीं। फ़रम सह़ीह़ ज़ातुर-रिक़ा युद्ध में पढ़ी गई भय की नमाज़ की तरीक़ा सह़ीह़ मुझे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। चुनांचे आप सफ़र में दो रकात से अधिक नहीं पढ़ते थे तथा अबू बक्र, उमर सह़ीह़ यह बाँझ हो तथा इसका गला दुखे, क्या इसने क़ुरबानी के दिन तवाफ़ कर लिया है?" कहा गया कि हाँ! तो फ़रमायाः "फिर चलो चलें।" सह़ीह़ मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पीछे एक ऐसी स्त्री की नमाज़-ए-जनाज़ा पढ़ी, जो निफ़ास (वह प्राकृतिक रक्त, जो प्रसव के बाद निकलता है) की अवधि मे स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने सूरा नस्र उतरने के बाद जब भी कोई नमाज़ पढ़ी, उसके अंदर यह दुआ ज़रूर पढ़ी : (ऐ अल्लाह, ऐ हमारे रब, तू अपनी सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक व्यक्ति को एक सैन्यदल का अमीर बनाकर भेजा। वह अपने साथियों को नमाज़ पढ़ाते समय कुरआन पढ़ता, तो अंत में सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में सूर्य ग्रहण हुआ, तो आपने एक व्यक्ति को आवाज़ लगाने के लिए भेजा कि नमाज़ खड़ी होने वाली है। अतः लो सह़ीह़ सूरज और चाँद अल्लाह की निशानियों में से दो निशानियाँ हैं। उन्हें ग्रहण किसी व्यक्ति की मौत और जीवन के लिए नहीं लगता। अतः, जब तुम ऐसा होता देखो तो अल्ल सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) नमाज़ तकबीर से और क़िरात "अल-हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन" से आरंभ करते थे। जब रुकू करते, तो न अपने सर को उठाए सह़ीह़ मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहे व सल्लम) के सामने सोए रहती और मेरे दोनों पैर आपके किबले की ओर होते। जब आप सजदे में जाते, तो धीरे से मेरे शरीर पर सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात के हर भाग में वित्र पढ़ते थे। शुरू में भी, बीच में भी और अंत में भी। आपके वित्र पढ़ने अंतिम समय सहर तक ह सह़ीह़ कूफ़ा वालों ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) के यहाँ साद बिन अबू वक़्क़ास (रज़ियल्लाहु अन्हु) की शिकायत की, तो उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उनको हटाकर अम्मार ह़सन अपने बच्चों को नमाज़ का आदेश दो, जब उनकी आयु सात साल हो जाए, और उन्हें उसके लिए मारो, जब उनकी आयु दस साल हो जाए तथा उनके बिसतर अलग कर दो। स़ह़ीह़ निश्चय ही झाड़-फूंक करना, तावीज़ गंडे बाँधना और पति-पत्नी के बीच प्रेम पैदा करने के लिए जादूई अमल करना शिर्क है।
بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.6 / 29.5
रोशनी 91%
12 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद