फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह पर हदीसें

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«फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह» पर 1144 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) वृष्टि माँगने के लिए नमाज़ पढ़ने को निकले, तो क़िबले की ओर मुँह करके दुआ की, अपनी चादर पलटी और फिर दो रकात नमाज़ पढ़ी, सह़ीह़ मैं और इमरान बिन हुसैन ने अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहुम) के पीछे नमाज़ पढ़ी। जब वह सजदे में जाते, तो तकबीर कहते, जब सर उठाते, तो तकबीर कहते और सह़ीह़ अल्लाह केरसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को सफ़ेद यमनी कपड़ों में कफ़नाया गया। उनमें न कुर्ता था और न पगड़ी थी। सह़ीह़ मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को मग़रिब की नमाज़ में सूरा-ए-तूर पढ़ते सुना। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहे व सल्लम), अबू बक्र एवं उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) दोनों की ईद की नमाज़ें ख़तबे से पहले पढ़ते थे। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) यात्रा के दौरान जब चल रहे होते, तो जोहर और अस्र की नमाज़ों को एक साथ पढ़ते तथा मग़रिब और इशा की नमाज़ों को ए स़ह़ीह़ ''ऐ अबूज़र! जब शोरबा पकाओ, तो उसमें पानी ज़्यादा डाल दो और पड़ोसियों का भी ख़्याल रख लो।'' ह़सन खाओ, पियो और दान करो। हाँ, मगर घमंड और फ़िज़ूलख़र्ची को राह न दो। स़ह़ीह़ मरे हुए लोगों को बुरा-भला न कहो, क्योंकि वे उसकी ओर जा चुके हैं, जो कर्म उन्होंने आगे भेजे हैं। स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमारे पास आए, तो हमने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, हम यह तो जान गए हैं कि हम आप पर सलाम कैसे भेजें, लेकिन हम आप पर द स़ह़ीह़ जिसने सूरा-ए-फ़ातिहा नहीं पढ़ी, उसकी नमाज़ ही नहीं। स़ह़ीह़ यहूदियों तथा ईसाइयों पर अल्लाह की धिक्कार हो। उन लोगों ने नबियों की क़ब्रों को मस्जिद बना लिया। सह़ीह़ मैंने किसी इमाम के पीछे नमाज़ नहीं पढ़ी, जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से अधिक हल्की और संपूर्ण नमाज़ पढ़ाता हो। सह़ीह़ मैं तुम्हें नमाज़ पढाऊँगा। हालाँकि मेरा नमाज़ पढ़ने का इरादा नहीं था। मैं दरअसल, नमाज़ पढ़के दिखाना चाहता हूँ कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैह सह़ीह़ तुम नमाज़ में سَبِّحِ اسم ربك الأعلى' ,'والشمس وَضُحَاهَا' और 'والليل إذا يغشى' जैसी सूरतें क्यों नहीं पढ़ते, क्योंकि तुम्हारे पीछे बड़े-बूढ़े, कमज़ोर स़ह़ीह़ जिसने जुमे के दिन जनाबत (सहवास के बाद) का स्नान किया, फिर पहली घड़ी में मस्जिद की ओर चल पड़ा, उसने गोया एक ऊँट की क़ुरबानी दी; स़ह़ीह़ तुममें से जो जुमे की नमाज़ के लिए आए, वह स्नान कर ले। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसी दन नजाशी की मृत्यु की सूचना दी, जिस दिन उनकी मृत्यु हुई थी। आप लोगों के साथ ईदगाह की ओर निकले, उन्हें सफ़ में खड सह़ीह़ "जो जनाज़े में नमाज़ संपन्न होने तक शामिल रहा, उसके लिए एक क़ीरात नेकी है और जो दफ़नाए जाने तक शरीक रहा, उसके लिए दो क़ीरात नेकी है।" कहा गया कि दो क़ सह़ीह़ हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ जुमा की नमाज़ पढ़कर लौटते, तो दीवारों की इतनी छाँव नहीं होती कि हम उसका आश्रय ले पाते। दोनों रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) खड़े होकर दो ख़ुतबे देते थे और दोनों के बीच में बैठकर अंतर करते थे। सह़ीह़ जिसने नमाज़ पढ़ने से पहले क़ुरबानी कर ली, वह उसके स्थान पर दूसरी क़ुरबानी करे और जिसने क़ुरबानी नहीं की, वह अल्लाह के नाम से क़ुरबानी करे। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने क़ुरबानी के दिन नमाज़ के पश्चात ख़ुतबा देते हुए फ़रमायाः "जिसने हमारी तरह नमाज़ पढ़ी तथा हमारी तरह क़ुरबानी की, उसकी स़ह़ीह़ जिसने अपनी (झूठी) क़सम से किसी मुसलमान का हक़ मारा, उसके लिए अल्लाह ने जहन्नम को वाजिब और जन्नत को हराम कर दिया।" एक व्यक्ति ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसू स़ह़ीह़ जिसने अच्छी तरह वज़ू किया, फिर जुमे की नमाज़ के लिए आया और ध्यानपूर्वक ख़ुतबा सुना तथा ख़ामोश रहा, उसके दो जुमे के बीच तथा तीन दिन अधिक के सारे पाप क् स़ह़ीह़ जिसने सुबह की नमाज़ पढ़ी, वह अल्लाह की रक्षा में होता है स़ह़ीह़ जो सुबह के समय या शाम के समय मस्जिद की ओर जाता है, तो वह सुबह या शाम को जब भी जाता है, उसके बदले अल्लाह उसके लिए जन्नत में सत्कार का सामान तैयार करता सह़ीह़ जो व्यक्ति हमारी मस्जिदों या बाज़ारों से गुज़रे तथा उसके हाथ में तीर हो तो उसके फल को अच्छी तरह पकड़ ले या उसके फल को अपनी मुठ्ठी में दबा ले, ताकि ऐसा सह़ीह़ जो व्यक्ति अपनी रात की पूरी नमाज़ या उसका कुछ भाग पढ़े बिना सो जाए, फिर प्रातः उठकर फज्र तथा ज़ुहर के बीच पढ़ ले, उसे ऐसा लिखा जाएगा, जैसे उसने उसे रा सह़ीह़ क्या ही अच्छा सालन सिरका है! क्या ही अच्छा सालन सिरका है! सह़ीह़ वह मोमिन जो लोगों से मेल-जोल रखता है तथा उनकी ओर से मिलने वाली यातनाओं पर सब्र करता है, उस मोमिन से अच्छा है, जो लोगों से मेल-जोल नहीं रखता तथा उनकी य स़ह़ीह़ “सदक़ा करने से किसी का माल कम नहीं होता है, बंदो को क्षमा करने से अल्लाह माफ़ करने वाले के आदर-सम्मान को और बढ़ा देता है और जो व्यक्ति अल्लाह के लिए व स़ह़ीह़ हे लोगों, सलाम फैलाओ (प्रचारित करो), लोगों को खाना खिलाओ, रिश्तेदारियों को जोड़ो, रात्रि में जब लोग सो रहे होते हैं, तो उठ कर नमाज़ पढ़ो, (ऐसा करने पर सह़ीह़ ऐ लोगों के रब (पालनहार), तकलीफों तथा रोगों को दूर करने वाले, रोग से मुक्ति प्रदान कर। तेरे सिवा कोई शिफा देने वाला नहीं है। रोग से ऐसा छुटकारा प्रदान स़ह़ीह़ कष्ट दूर कर दे ऐ लोगों के रब! तथा रोग से मुक्ति प्रदान कर, तू ही रोग से मुक्ति प्रदान करने वाला है। तेरे सिवा कोई रोग से मुक्ति प्रदान करने वाला नहीं सह़ीह़ अशअरी लोग जब युद्ध में खाने-पीने की चीज़ों की कमी का सामना करते हैं या शहर में उनके बाल बच्चों का खाना कम पड़ने लगता है, सह़ीह़ एक महिला अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास एक बुनी हुई धारीदार चादर लेकर आईं सह़ीह़ जुहैना नामक क़बीले की एक स्त्री नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आई, जो व्यभिचार के कारण गर्भवती थी। सह़ीह़ अल्लाह का नाम लेकर मैं आपका इलाज करता हूँ, प्रत्येक उस चीज़ से जो आपको कष्ट दे, प्रत्येक प्राणी की बुराई अथवा ईर्ष्या करने वाली आँख से। अल्लाह आपको शि सह़ीह़ जहाँ तक इस व्यक्ति की बात है, तो इसने अबुल क़ासिम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की अवज्ञा की। सह़ीह़ मैं देख रहा हूँ कि तुझे बकरी तथा देहात पसंद है। अतः, जब तुम बकरियों के साथ रहो सह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को एक जंगली गधा भेंट किया सह़ीह़ सबसे अधिक अच्छा व्यक्ति कौन है ऐ अल्लाह के रसूल? सह़ीह़ एक व्यक्ति एक सुनसान मैदान में चल रहा था कि उसने बादल से एक आवाज़ सुनी। सह़ीह़ जब पति अपनी पत्नी को सहवास के लिए बुलाए, तो वह अवश्य आए, यद्यपि वह चूल्हे के पास ही क्यों न हो। सह़ीह़ जब तुममें से किसी को नमाज़ पढ़ने की दशा में नींद आए, तो सो जाए, यहाँ तक नींद खत्म हो जाए। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक अज़्दी व्यक्ति, जिसे इब्न अल-लुतबिया कहा जाता था, को ज़कात का धन इकट्ठा करने का ज़िम्मेवार बनाया। जब वह वापस आया, ह़सन सबसे सम्पूर्ण ईमान वाला व्यक्ति वह है, जो सबसे अच्छे आचरण वाला हो और तुम्हारे अंदर सबसे उत्तम व्यक्ति वह है, जो अपनी पत्नियों के हक़ में सबसे अच्छा हो स़ह़ीह़ दुनिया एक क्षणिक उपभोग की वस्तु है और उसकी सर्वश्रेठ वस्तु नेक स्त्री है। स़ह़ीह़ अल्लाह फ़रमाता है : ऐ आदम की संतान! व्यय (खर्च) करो, तुमपर व्यय किया जाएगा। सह़ीह़ उसे छोड़ दो और उसके पेशाब पर एक डोल पानी बहा दो। क्योंकि तुम आसानी पैदा करने के लिए भेजे गए हो। तुम्हें सख़्ती करने के लिए नहीं भेजा गया है। स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें ख़ुतबा-ए-हाजत इस तरह सिखाया ह़सन जब तुममें से कोई किसी महिला को निकाह के लिए पैग़ाम दे तो यदि उसके बस में हो कि (उस में) उस चीज़ को देख सके जो उसको उस से विवाह के ओर आकर्षण करे, तो उसे सह़ीह़ जाओ तथा उसको देख लो, यह तुम दोनों के बीच प्रेम को बढ़ाने के लिए बहुत ही उपयुक्त है। सह़ीह़ जब अल्लाह तआला किसी पुरुष के हृदय में किसी महिला से विवाह करने का संदेशा भेजने की बात डाल दे तो कोई हर्ज नहीं है कि वह उस महिला को देख ले। ह़सन निकाह का ऐलान करो। स़ह़ीह़ वली (अभिभावक) के बिना निकाह (शादी) नहीं है। स़ह़ीह़ जो औरत अपने वली गण (अभिभावकों) की अनुमति के बिना निकाह करे, उसका निकाह बातिल है। (निकाह बातिल होने की बात आपने तीन बार कही।) अगर मर्द ने ऐसी औरत के सा सह़ीह़ वह महिला जिसका विवाह हो चुका हो, तो वह (दूसरे विवाह के समय) अपने बारे में फैसला करने में अपने वली से अधिक अधिकार रखती है और कुँवारी से आज्ञा मांगी जाए सह़ीह़ कोई महिला किसी महिला का विवाह सम्पन्न न कराए, न कोई महिला स्वयं अपना विवाह कर ले, ऐसी महिला जो स्वयं अपना विवाह कर लेती है वह ज़ानिया (दुराचारी) है।
بسم الله الرحمن الرحيم गुरु 17 जुमादा अल-अव्वल
الخميس 17 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.6 / 29.5
रोशनी 91%
12 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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