फ़ज़ीलतें तथा आदाब पर हदीसें

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«फ़ज़ीलतें तथा आदाब» पर 744 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

फ़ज़ीलतें तथा आदाब पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ जब आदम की संतान सुबह करती है, तो उसके शरीर के सारे अंग ज़बान से विनम्रतापूर्वक कहते हैंः हमारे बारे में अल्लाह से डर। हम तो तुझसे ही संबद्ध हैं; तू सी स़ह़ीह़ जन्नत, तुममें से किसी व्यक्ति से उसके जूते के फीते से भी अधिक निकट है तथा नर्क का भी यही हाल है। सह़ीह़ दुनिया मोमिन के लिए कारागार और काफ़िर के लिए जन्नत है सह़ीह़ ऐ अबू बत्न, हम केवल शांति स्थापित करने के लिए जाते हैं और इसी लिए हर मिलने वाले को सलाम करते हैं। स़ह़ीह़ अच्छा सपना अल्लाह की ओर से है और बुरा सपना शैतान की ओर से। अतः जब तुम में से कोई व्यक्ति डरावना सपना देखे, तो तीन बार बाएँ ओर थुत्कारे और उस सपने की ब ह़सन एक व्यक्ति अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया और कहा : 'अस्सलामु अलैकुम' (आपपर शांति अवतरित हो)। आपने उसके सलाम का उत्तर दिया और वह ब स़ह़ीह़ पाँच नमाज़ें, एक जुमा दूसरे जुमे तक तथा एक रमज़ान दूसरे रमज़ान तक, इनके बीच में होने वाले गुनाहों का कफ़्फ़ारा- प्रायश्चित- बन जाते हैं, यदि बड़े गुना सह़ीह़ दंगा–फ़साद के समय इबादत करना, मेरी ओर हिजरत करने की तरह है स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह! मैं तुझसे मार्गदर्शन, धर्मनिष्ठा, पवित्राचार और बेनियाज़ी (निस्पृहता) माँगता हूँ। सह़ीह़ कुछ लोग अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए और कहा कि हमारे साथ कुछ लोगों को भेजें, जो हमें क़ुरआन और सुन्नत सिखाएँ। अतः आपने उनकी ओर स सह़ीह़ ऐ अल्लाह, मैंने तेरे लिए इस्लाम ग्रहण किया, तुझपर ईमान लाया, तुझपर भरोसा किया, तेरी ओर लौटा और तेरी सहायता से बहस की। ऐ अल्लाह, तेरे सिवा कोई सत्य पूज सह़ीह़ अल्लाह तआला ने मुझे आदेश दिया है कि तेरे सामने 'لم يكن الذين كفروا...' पढ़ूँ। स़ह़ीह़ मैंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! मुक्ति क्या है? आपने उत्तर दिया : "अपनी ज़बान पर नियंत्रण रखो, अपने घर के अंदर ही रहा करो और अपने गुनाहों पर रोया करो। सह़ीह़ कोई दास जब अपने मालिक का शुभचिंतक रहे और अच्छी तरह अल्लाह की इबादत करे, उसे दोगुना प्रतिकार मिलेगा दोनों रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़ बंदा अल्लाह तआला को प्रसन्न करने वाली कोई बात करता है और उसे कोई महत्व नहीं देता, परन्तु उसके कारण अल्लाह उसकी श्रेणियों को बढ़ा देता है। इसी तरह, बंद सह़ीह़ लोगों में अल्लाह से सबसे निकट वह व्यक्ति है, जो उन्हें सलाम करने में पहल करे सह़ीह़ जन्नत में एक सौ श्रेणियाँ हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपने मार्ग में जिहाद करने वालों के लिए तैयार कर रखा है। दो श्रेणियों के बीच उतना फ़ासिला है, जितना आक सह़ीह़ रात में एक समय होता है कि जो मुसलमान उसमें अल्लाह से दुनिया एवं आख़िरत से संबंधित कोई भलाई माँगता हुआ पाया जाएगा, अल्लाह उसे ज़रूर प्रदान करेगा। यह घड सह़ीह़ सबसे बड़ी झूठी बातों में से यह है कि आदमी अपने पिता के अलावा किसी और से संबंध जोड़े या अपनी आँख को वह दिखाए जो उसने देखा न हो या अल्लाह के रसूल- सल्लल स़ह़ीह़ मैं अपने बारे में अपने बंदे की सोच के निकट होता हूँ तथा मैं उसके साथ होता हूँ, वह जब भी मुझे याद करे। सह़ीह़ सुफ़्फ़ा वालों तथा आम सहाबा की दुनिया से निस्पृहता सह़ीह़ एक व्यक्ति ने एक स्त्री को बोसा देकर अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को आकर बताया, तो अल्लाह तआला ने यह आयत उतारीः "وأقم الصلاة طَرَفَيِ النّ सह़ीह़ एक व्यक्ति अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर बोलाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं हद (धार्मिक दंड) का अधिकारी हो गया हूँ। अतः, मुझपर हद जारी सह़ीह़ एक व्यक्ति ने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आने की अनुमति माँगी, तो फ़रमायाः उसे आने दो, वह अपने क़बीले का बहुत बुरा व्यक्ति है स़ह़ीह़ मुझे कोई ऐसा कर्म बताएँ कि उसे करूँ, तो जन्नत में दाखिल हो जाऊँ। फ़रमाया : "अल्लाह की इबादत करो, किसी को उसका साझी न बनाओ, फ़र्ज़ नमाज़ कायम करो, फ़र् सह़ीह़ अगर दुनिया, अल्लाह के निकट मच्छर के पर के बराबर भी महत्व रखती, तो अल्लाह किसी काफ़िर को उसका एक घूँट पानी तक नहीं देता सह़ीह़ हमें दुनिया की वह सारी वस्तुएँ प्रदान की गईं, जो तुम देख रहे हो। हमें तो कभी-कभी भय लगता है कि कहीं हमारे अच्छे कर्मों का बदला दुनिया ही में न दे दिया स़ह़ीह़ मुसलमान को जो भी रोग, थकान, दुख, गम, कष्ट और विपत्ति पहुँचती है, यहाँ तक कि एक काँटा भी चुभता है, तो उसके ज़रिए अल्लाह उसके गुनाहों को मिटा देता है। स़ह़ीह़ जहन्नम को अभिलाषाओं से घेर दिया गया है और जन्नत को अप्रिय चीज़ों से घेर दिया गया है। सह़ीह़ ऐ हकीम! यह धन देखने में सुहाना और खाने में मीठा होता है। जो इसे बिना किसी लोभ के लेता है, उसे उसमें बरकत दी जाती है, और जो इसे लोभ के साथ लेता है, उसे स़ह़ीह़ तुमने एक ऐसी बात कह दी है कि यदि उसे समुद्र के पानी से मिला दिया जाए, तो उसे नष्ट कर डाले। स़ह़ीह़ एक मुसलमान के दूसरे मुसलमान पर पाँच अधिकार हैं; सलाम का उत्तर देना, बीमार व्यक्ति का हाल जानने के लिए जाना, जनाज़े के पीछे चलना, निमंत्रण स्वीकार करना सह़ीह़ अल्लाह तआला के निकट सबसे अच्छा साथी वह है, जो अपने साथियों के लिए सबसे अच्छा हो और अल्लाह तआला के निकट सबसे अच्छा पड़ोसी वह है, जो अपने पड़ोसी के लिए सह़ीह़ लोगों में सबसे अच्छा आदमी वह है, जिसे लंबी आयु मिली और अच्छे कर्म किए स़ह़ीह़ बहुत-से बिखरे हुए बालों वाले और दरवाज़ों से भगा दिए जाने वाले लोग ऐसे हैं कि यदि अल्लाह पर क़सम खा लें, तो अल्लाह उनकी क़समों की लाज रख ले। स़ह़ीह़ अल्लाह उस व्यक्ति पर दया करे, जो बेचते, खरीदते और क़र्ज का तकाज़ा करते समय नर्मी से काम ले। स़ह़ीह़ वह व्यक्ति अपमानित हो, फिर वह व्यक्ति अपमानित हो, फिर वह व्यक्ति अपमानित हो।" किसी ने पूछा : कौन ऐ अल्लाह के रसूल? फ़रमाया : "जिसने अपने माता-पिता को स़ह़ीह़ अतुल्य विशेषता वाले लोग आगे हो गए। सह़ीह़ कहाँ है अल्लाह की क़सम खाने वाला कि भला कार्य नहीं करेगा? सह़ीह़ अल्लाह की क़सम, मैं किसी को देता हूँ और किसी को नहीं भी देता हूँ, जबकि जिसे नहीं देता, वह उससे कहीं अधिक प्रिय होता है, जिसे देता हूँ स़ह़ीह़ शैतान तुममें से हर व्यक्ति के सर के पीछ रात में सोते समय तीन गाँठ लगा देता है और हर गाँठ पर यह कहकर फूँक मारता है कि सो जा, अभी रात बहुत बाक़ी है। सह़ीह़ दो आँखों को जहन्नम की आग छू भी नहीं सकती; एक वह आँख जो अल्लाह के डर से रोए और दूसरी वह आँख जो अल्लाह के मार्ग में पहरेदारी करते हुए जागे सह़ीह़ हर उम्मत के लिए एक आज़माइश होती है और मेरी उम्मत के लिए वह आज़माइश धन है सह़ीह़ मैं जन्नत के द्वार पर खड़ा हुआ तो देखा कि उसमें प्रायः निर्धन लोग दाखिल हो रहे थे और धनी लोग रोक दिए जा रहे थे स़ह़ीह़ एक व्यक्ति लोगों को क़र्ज़ देता और अपने सेवकों से कहा करता कि जब किसी ऋण चुकाने में असमर्थ व्यक्ति के पास जाओ तो उसके क़र्ज़ की अनदेखी करो। हो सकता है स़ह़ीह़ मेरी उम्मत के सभी लोगों को माफ़ कर दिया जाएगा, सिवाय उनके जो खुलम-खुल्ला गुनाह करते हैं। सह़ीह़ हम दूध में से अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का हिस्सा उठाकर रख लेते थे। आप रात को आते और धीरे से सलाम करते ताकि सोने वाला तो न जागे, परन्तु सह़ीह़ क्या तुममें से कोई इस बात से विवश है कि प्रत्येक दिन एक हज़ार नेकियाँ प्राप्त करे? आपके पास बैठे लोगों में से एक व्यक्ति ने पूछाः आदमी एक हज़ार नेकिया सह़ीह़ मुझे लगता है कि तुम लोगों ने अबू उबैदा के बहरैन से कुछ धन लेकर आने की बात सुनी है। सह़ीह़ अलैकस्सलाम न कहो, क्योंकि अलैकस्सलाम मरे हुए लोगों का सलाम है। सह़ीह़ ऐ अल्लाह! अस्ल जीवन तो केवल आख़िरत का जीवन है। सह़ीह़ कोई संतान अपने पिता का बदला चुका नहीं सकती, सिवाय इसके कि उसे गुलामी की अवस्था में पाए और ख़रीदकर आज़ाद कर दे। स़ह़ीह़ जो व्यक्ति दुनिया में किसी पर पर्दा डालेगा, अल्लाह क़यामत के दिन उसपर पर्दा डालेगा। स़ह़ीह़ तुममें से हर व्यक्ति की मृत्यु इस अवस्था में आनी चाहिए कि वह अल्लाह से अच्छा गुमान रखता हो। ह़सन सुन लो! दुनिया धिक्कारयोग्य है और जो कुछ उसमें है सब धिक्कारयोग्य है, सिवाय अल्लाह के ज़िक्र और उससे संबंधित वस्तुओं के तथा ज्ञानी एवं ज्ञानार्जन करने शवाहिद के आधार पर ह़सन जिस रात मुझे मेराज कराई गई, उस रात मैं इब्राहीम अलैहिस्सलाम से मिला। तो इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने मुझसे कहा : ऐ मुहम्मद! अपनी उम्मत को मेरा सलाम कहना और सह़ीह़ नुबुव्वत में से केवल शुभ सूचनाएँ बाकी रह गई हैं। सह़ीह़ यदि मेरे पास उहुद पर्वत के बराबर सोना हो जाए तो मुझे यह अच्छा नहीं लगेगा कि उसका कुछ भी भाग मेरे पास तीन दिन तक बाकी रहे, सिवाय उसके जिसे मैंने क़र्ज़ सह़ीह़ वास्तविक मालदारी का बयान और अल्लाह ने जो कुछ दिया है, उससे संतुष्ट रहने की ओर प्रेरित करना। सह़ीह़ झूठा वह नहीं है जो लोगों के बीच सुधार का प्रयास करे एवं भली बात पहुँचाए अथवा अच्छी बात कहे।
بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.3 / 29.5
रोशनी 93%
12 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद