फ़ज़ीलतें तथा आदाब पर हदीसें

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«फ़ज़ीलतें तथा आदाब» पर 744 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

फ़ज़ीलतें तथा आदाब पर हदीसों की सूची

स़ह़ीह़ वह व्यक्ति सफल हो गया, जिसने इस्लाम ग्रहण कर लिया तथा उसे ज़रूरत भर रोज़ी मिल गई और अल्लाह ने जो कुछ उसे दिया है, उससे संतुष्ट रहा। ह़सन मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! मेरे अच्छे बर्ताव का सबसे ज़्यादा हक़दार कौन है? आपने उत्तर दिया : "तेरी माँ, फिर तेरी माँ, फिर तेरी माँ, फिर तेरा बाप, सह़ीह़ जब तुममें से किसी का सेवक उसके सामने भोजन परोसे, तो अगर उसे अपने साथ न बिठा सके, तो उसे एक-दो लुक़मा या एक-दो निवाला ज़रूर दे, क्योंकि उसने उसे तैयार सह़ीह़ एक स्त्री को एक बिल्ली के कारण यातना दी गई, जिसे उसने बाँधकर रखा था, यहाँ तक कि वह मर गई। अतः वह उसके कारण जहन्नम में गई। जब उसने उसे बाँधकर रखा, तो न सह़ीह़ अल्लाह के बंदों में से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो यदि अल्लाह पर क़सम खा लें, तो अल्लाह उसे पूरा कर देता है। ह़सन अल्लाह के समीप सबसे बड़ा सर्कश (विद्रोही) वह व्यक्ति है, जो अल्लाह के हरम में कत्ल करे, अथवा अपने क़ातिल के सिवा किसी और को कत्ल करे, या जाहिलियत की द सह़ीह़ मुहम्मद की पत्नियों के पास बहुत-सी महिलाएँ आकर अपने पतियों की शिकायत कर गई हैं। दरअसल वे तुम्हारे अच्छे लोग नहीं हैं। सह़ीह़ क़यामत के दिन हकदारों को उनके हक़ दिलवाए जाएँगे, यहाँ तक कि बिना सींग वाली बकरी को सींग वाली बकरी से बदला दिलवाया जाएगा। स़ह़ीह़ अल्लाह के मना किए हुए इस गंदे काम से बचो। फिर, जिससे इस प्रकार का कोई गुनाह हो जाए, वह अल्लाह के पर्दे में छुप जाए और अल्लाह के सामने तौबा कर ले। जो ह सह़ीह़ चोर पर अल्लाह की लानत (धिक्कार) हो, वह अंडा चुराता है तो उसका हाथ काटा जाता है तथा रस्सी चुराता है तो उसका हाथ काटा जाता है। सह़ीह़ जब तुम में से कोई अपने भाई को मारे, तो चेहरे पर मारने से बचे। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए चमड़े के बर्तन में किशमिश की नबीज़ बनाई जाती थी, जिसे आप उस दिन तथा दूसरे और तीसरे दिन पीते थे। जब ती स़ह़ीह़ मैंने अपने बाद कोई ऐसा फ़ितना नहीं छोड़ा, जो पुरुषों के हक़ में स्त्रियों से अधिक हानिकारक हो। सह़ीह़ किसी बंदे का धन सदक़ा करने से कम नहीं होता, जिस बंदे पर अत्याचार होता है, फिर वह उसपर धैर्य रखता है, तो अल्लाह उसका सम्मान बढ़ा देता है और जो बंदा माँ सह़ीह़ कंजूस और खर्च करने वाले का उदाहरण उन दो व्यक्तियों की तरह है, जिनपर छाती से लेकर हँसली तक लोहे के दो कवच हों। ह़सन तुममें से जो व्यक्ति इस अवस्था में सुबह करे कि वह शारीरिक रूप से स्वस्थ हो, उसकी जान सुरक्षित हो और उसके पास दिन भर के खाने की वस्तु हो, तो यह ऐसा है सह़ीह़ उस ज़ात की क़सम, जिसके हाथों में मेरा प्राण है, यदि तुम लोग उसी हालत में हमेशा रहो, जिस हालत में मेर पास होते हो तथा उसी प्रकार ज़िक्र करते रहो, तो फ़ सह़ीह़ जो व्यक्ति हलाल की कमाई से खजूर के बराबर भी कोई वस्तु सदक़ा करता है और वैसे भी अल्लाह केवल हलाल वस्तु ही को स्वीकार करता है, तो अल्लाह उसे अपने दाहिने सह़ीह़ ज़ुबैर बिन अव्वाम -रज़ियल्लाहु अन्हु- की मृत्यु और उनका क़र्ज़ अदा करने का क़िस्सा। स़ह़ीह़ आसानी पैदा करो और कठिनाई में न डालो तथा सुसमाचार सुनाओ एवं घृणा मत दिलाओ। सह़ीह़ ऐ अल्लाह, मैं तेरी शरण माँगता हूँ, विवशता तथा सुस्ती से, कंजूसी और बुढ़ापे से एवं क़ब्र की यातना से। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब सोने लगते, तो अपने दोनों हाथों में फूँकते और सूरा अल-इख़लास, सूरा अल-फ़लक़ और सूरा अन-नास पढ़कर दोनों हाथ सह़ीह़ सारी प्रशंसा उस अल्लाह की है, जिसने हमें खिलाया, पिलाया, पर्याप्ति प्रदान की तथा शरण दी। कितने ऐसे लोग हैं, जिनको न कोई पर्याप्ति प्रदान करने वाला है, ह़सन ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह माँगता हूँ भूख से, क्योंकि वह बुरा साथी है। तेरी पनाह माँगता हूँ ख़यानत से, क्योंकि वह बुरा राज़दार है। ह़सन क्या मैं तुम्हें कुछ शब्द न सिखा दूँ, जो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुझे सिखाए थे कि यदि तुम्हारे ऊपर पहाड़ के बराबर भी क़र्ज़ हो, त स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सारगर्भित दुआओं को पसंद करते थे और इससे इतर दुआओं को छोड़ देते थे। सह़ीह़ अभिमान तथा अहंकार का हराम होना और इसका बुरा अंत सह़ीह़ हम लोग किसी सफ़र में नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ थे कि इसी बीच एक व्यक्ति सवार होकर आया। ह़सन तीन प्रकार की दुआएँ क़बूल होती हैं। उनके क़बूल होने में कोई संदेह नहीं है। सह़ीह़ तीन प्रकार के लोगों से अल्लाह क़यामत के दिन न बात करेगा, न उन्हें पवित्र करेगा और न उनकी ओर देखेगा। सह़ीह़ एक व्यक्ति अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहने लगाः ऐ अल्लाह के रसूल! मैं (भूख से) निढाल हूँ। सह़ीह़ ऐ अबुल हसन! अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने किस अवस्था में सुब्ह की? तो उन्होंने उत्तर दियाः अल-हमदुलिल्लाह (समस्त प्रकार की प्रशंसा अल्ल सह़ीह़ ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण में आता हूँ विवशता, सुस्ती, कायरता, अधिक बुढ़ापे और कंजूसी से। तेरी शरण में आता हूँ क़ब्र के अज़ाब से तथा तेरी शरण में आता हूँ स़ह़ीह़ कहो : ऐ अल्लाह! मेरा मार्गदर्शन कर और मुझे सही रास्ते पर चला। "الْهُدَى" शब्द ज़बान पर लाते समय अपने रास्ता पा लेने को याद कर लिया करो और "السَّدَاد" सह़ीह़ अल्लाह के निकट सबसे घटिया और तुच्छ व्यक्ति वह है, जो शहंशाह कहलवाए। वास्तविक बादशाह तो बस अल्लाह है। स़ह़ीह़ जो किसी स्थान में उतरते समय कहे : 'मैं अल्लाह की पैदा की हुई चीज़ों की बुराई से उसके संपूर्ण शब्दों के द्वारा (उसकी) शरण माँगता हूँ', उसे कोई चीज़ वह स़ह़ीह़ क़सम सामान को मार्केट में चलाने का माध्यम तो है, लेकिन कमाई की बरकत ख़त्म कर देती है। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब किसी यात्रा पर निकलते तो यात्रा की कठिनाई, अप्रिय वापसी, बनाव के बाद बिगाड़, मज़लूम की बद्दुआ और परिवार त ह़सन एक (अकेला) सवार शैतान है, दो सवार शैतान हैं और तीन सवार क़ाफ़िला हैं। सह़ीह़ क्या तुम जानते हो कि झूठ तथा मिथ्यारोपन क्या है? यह लोगों के बीच लगाई-बुझाई की बातें करते फिरना है। सह़ीह़ तुम्हारा इन घाटियों और वादियों में अलग-अलग फैल जाना शैतान की ओर से है। सह़ीह़ दीनार के बंदे का विनाश हो। दिरहम के बंदे का सर्वनाश हो। रेशमी कपड़े के बंदे का विनाश हो। रुएँदार कपड़े के बंदे का विनाश हो। अगर दिया गया तो प्रसन्न और सह़ीह़ लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों से मिलकर सह़ीह़) तीन आदमी जन्नत में प्रवेश नहीं करेंगेः शराब का रसिया, रिश्ते-नाते को काटने वाला और जादू को सच मानने वाला। सह़ीह़ तीन व्यक्ति ऐसे हैं, जिनसे अल्लाह न बात करेगा और न उन्हें गुनाहों से पवित्र करेगा तथा उनके लिए दुखदायी यातना हैः बूढ़ा व्यभिचारी, कंगाल अभिमानी और ऐसा स़ह़ीह़ तुममें से कोई उस समय तक मोमिन नहीं हो सकता, जब तक मैं उसके निकट, उसके पिता, उसकी संतान और तमाम लोगों से अधिक प्यारा न हो जाऊँ। सह़ीह़ जब तुम हरियाली के दिनों में यात्रा करो तो ऊँट को धरती में चरने का उसका हक़ प्रदान करो और जब सुखाड़ के दिनों में यात्रा करो तो उसपर सवार होकर तेज़-तेज़ सह़ीह़ तुम रात को सफ़र किया करो, क्योंकि रात के समय ज़मीन लपेट दी जाती है। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब यात्रा में होते और रात को ठहरते तो दाएँ करवट पर लेटते और जब सुब्ह से कुछ पहले ठहरते तो अपना दाहिना बाज़ू ह़सन जब तीन व्यक्ति किसी यात्रा में निकलें तो अपने में किसी को सरदार बना लें। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) यात्रा में सबसे पीछे चलते तथा कमज़ोर को हाँकते, उसे अपने पीछे सवार कर लेते और उसके लिए दुआ करते। स़ह़ीह़ वायु को गाली मत दो। यदि कोई ऐसी बात देखो, जो पसंद न हो तो कहो : ऐ अल्लाह! हम तुझसे माँगते हैं इस वायु की भलाई, इसमें जो कुछ है उसकी भलाई और इसे जिसका स़ह़ीह़ तुममें से कोई व्यक्ति यह न कहे : ऐ अल्लाह! यदि तू चाहे तो मुझे क्षमा प्रदान कर, ऐ अल्लाह! यदि तू चाहे तो मुझपर दया कर। उसे चाहिए कि यक़ीन के साथ माँगे सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब सफ़र में निकलते समय अपने ऊँट पर ठीक से बैठ जाते तो तीन बार 'अल्लाहु अकबर' कहते और फिर फ़रमातेः «سبحان الذ सह़ीह़ ऐ मुहाजिरो और अंसारियो! तुम्हारे कुछ भाई ऐसे हैं, जो न धन रखते हैं न कुनबा। अतः, तुममें से हर व्यक्ति अपने साथ दो या तीन लोगों को मिला ले। सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब किसी बीमार व्यक्ति को देखने के लिए जाते तो फ़रमातेः لا بأس طهور إن شاء الله, अर्थात, कोई चिंता की बात नहीं स़ह़ीह़ उस व्यक्ति की नाक मिट्टी में मिल जाए जिसके सामने मेरा ज़िक्र किया जाए और वह मुझपर दरूद न पढ़े, उस व्यक्ति की नाक मिट्टी में मिल जाए जिसके सामने रमज़ान सह़ीह़ तुम में से कोई जब सोने के लिए बिस्तर में जाए तो अपनी लुंगी के अंदरूनी भाग से अपने बिस्तर को झाड़े, क्योंकि वह नहीं जानता कि उसके बाद वहाँ कौन-सी चीज़ सह़ीह़ अल्लाह से, आज़माइश की कठिनाई, दुर्भाग्य का शिकार होने, तक़दीर के अप्रिय निर्णय और कठिनाई में देखकर शत्रुओं के खुश होने से अल्लाह की शरण माँगा करो। सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) यह दुआ पढ़ा करते थे: ऐ अल्लाह! मैं सफ़ेद दाग़, पागलपन, कोढ़ और बुरी बीमारियों से तेरी शरण माँगता हूँ। सह़ीह़ दो आदमी का खाना तीन आदमी के लिए काफ़ी है और तीन आदमी का खाना चार आदमी के लिए काफ़ी है।
بسم الله الرحمن الرحيم गुरु 17 जुमादा अल-अव्वल
الخميس 17 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.6 / 29.5
रोशनी 91%
12 दिनों में अमावस्या
حسبنا الله ونعم الوكيل अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद