क़ुरआन का रुकू 324 पढ़ें

रुकू 324 सूरह Ash-Shuara (आयत 160 से 175) से है। इसमें 16 आयतें हैं और यह जुज़ 19 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 324

16
आयतें
1
सूरह
19
जुज़
v.160 – v.175
आयतें

रुकू 324 में सूरह

الشعراء · जुज़ 19
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سورة الشعراء
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كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿160﴾

इसी तरह लूत की क़ौम ने पैग़म्बरों को झुठलाया

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ لُوطٌ أَلَا تَتَّقُونَ ﴿161﴾

जब उनके भाई लूत ने उनसे कहा कि तुम (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते

إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌۭ ﴿162﴾

मै तो यक़ीनन तुम्हारा अमानतदार पैग़म्बर हूँ तो ख़ुदा से डरो

فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ﴿163﴾

और मेरी इताअत करो

وَمَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿164﴾

और मै तो तुमसे इस (तबलीगे रिसालत) पर कुछ मज़दूरी भी नहीं माँगता मेरी मज़दूरी तो बस सारी ख़ुदायी के पालने वाले (ख़ुदा) पर है

أَتَأْتُونَ ٱلذُّكْرَانَ مِنَ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿165﴾

क्या तुम लोग (शहवत परस्ती के लिए) सारे जहाँ के लोगों में मर्दों ही के पास जाते हो

وَتَذَرُونَ مَا خَلَقَ لَكُمْ رَبُّكُم مِّنْ أَزْوَٰجِكُم ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ عَادُونَ ﴿166﴾

और तुम्हारे वास्ते जो बीवियाँ तुम्हारे परवरदिगार ने पैदा की है उन्हें छोड़ देते हो (ये कुछ नहीं) बल्कि तुम लोग हद से गुज़र जाने वाले आदमी हो

قَالُوا۟ لَئِن لَّمْ تَنتَهِ يَـٰلُوطُ لَتَكُونَنَّ مِنَ ٱلْمُخْرَجِينَ ﴿167﴾

उन लोगों ने कहा ऐ लूत अगर तुम बाज़ न आओगे तो तुम ज़रुर निकल बाहर कर दिए जाओगे

قَالَ إِنِّى لِعَمَلِكُم مِّنَ ٱلْقَالِينَ ﴿168﴾

लूत ने कहा मै यक़ीनन तुम्हारी (नाशाइसता) हरकत से बेज़ार हूँ

رَبِّ نَجِّنِى وَأَهْلِى مِمَّا يَعْمَلُونَ ﴿169﴾

(और दुआ की) परवरदिगार जो कुछ ये लोग करते है उससे मुझे और मेरे लड़कों को नजात दे

فَنَجَّيْنَـٰهُ وَأَهْلَهُۥٓ أَجْمَعِينَ ﴿170﴾

तो हमने उनको और उनके सब लड़कों को नजात दी

إِلَّا عَجُوزًۭا فِى ٱلْغَـٰبِرِينَ ﴿171﴾

मगर (लूत की) बूढ़ी औरत कि वह पीछे रह गयी

ثُمَّ دَمَّرْنَا ٱلْـَٔاخَرِينَ ﴿172﴾

(और हलाक हो गयी) फिर हमने उन लोगों को हलाक कर डाला

وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًۭا ۖ فَسَآءَ مَطَرُ ٱلْمُنذَرِينَ ﴿173﴾

और उन पर हमने (पत्थरों का) मेंह बरसाया तो जिन लोगों को (अज़ाबे ख़ुदा से) डराया गया था

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ﴿174﴾

उन पर क्या बड़ी बारिश हुई इस वाक़िये में भी एक बड़ी इबरत है और इनमें से बहुतेरे ईमान लाने वाले ही न थे

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ ﴿175﴾

और इसमे तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन सब पर ग़ालिब (और) बड़ा मेहरबान है

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 18 जुमादा अल-अव्वल
الجمعة 18 جمادى الأولى
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اللهم صل على محمد ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दरूद भेज

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद