फ़्रांस में इस्लाम अपनाना

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फ़्रांस में मुसलमान बनने के लिए कोई सिविल तरकीब ज़रूरी नहीं : मस्जिद के प्रमाण-पत्र, दीनी निकाह और महकमे में नाम और पहले नाम की तब्दीली के बारे में जो जानना चाहिए।

फ़्रांस में मुसलमान बनने के लिए कोई सिविल तरकीब माँगी नहीं जाती : इस्लाम में आना दीनी अमल है, इख़लास के साथ अदा किया जाता है, और सिविल रजिस्टर मज़हब दर्ज नहीं करता। मस्जिद का इस्लाम में आने का प्रमाण-पत्र दीनी निकाह और हज के काम आता है। महकमे की तरफ़ से पहला नाम 2017 से सादे ऐलान से बदला जा सकता है, और ख़ानदानी नाम 21 फ़रवरी 2022 के क़ानून से।

18 अक्टूबर 2026 को 20h58 बजे अपडेट किया गया

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फ़्रांस में इस्लाम अपनाना : कोई सिविल तरकीब फ़र्ज़ नहीं

फ़्रांस में मज़हबी रजिस्टरेशन मौजूद नहीं : मुसलमान बनने के लिए कहीं, किसी जगह, कुछ भी दर्ज कराना नहीं होता। इस्लाम में आना आप और अल्लाह के दरमियान दीनी अमल है (सहीह मुस्लिम 121), जहाँ भी हों, उसी लम्हे जायज़। नीचे बयान की गई सारी तरकीबें इख़्तियारी हैं : वे आपके अमल के काम आती हैं, आपकी जवाज़त के लिए नहीं।

इस्लाम में आने का प्रमाण-पत्र

इमाम के सामने गवाही अदा करने के बाद मस्जिद की तरफ़ से दिया जाने वाला यह प्रमाण-पत्र मुसलमानी इदारों के सामने आपके इस्लाम को दस्तावेज़ी शक्ल देता है : दीनी निकाह (इमाम दोनों शौहर-बीवी का इस्लाम जाँचता है), हज (सऊदी हुक्मरान नए मुसलमानों के हज या उमरे के वीज़े के लिए यही माँगते हैं), या मुसलमानी दफ़न। किसी मस्जिद में जाएँ, इमाम से बात करने की ख़्वाहिश करें, प्रमाण-पत्र आम तौर पर लिखित और मुफ़्त होता है। क्या मुसलमान बनने के लिए मस्जिद जाना ज़रूरी है ? का पृष्ठ तरीक़ा तफ़्सील से बयान करता है।

महकमे में पहला नाम या ख़ानदानी नाम बदलना

अगर आप मुसलमानी पहला नाम रखना चाहते हैं, तो जान लें कि पहला नाम 27 जनवरी 2017 के क़ानून से (सिविल कोड की धारा 60) महकमे में सादे ऐलान से बदला जा सकता है : इक फ़ॉर्म काफ़ी है, सिविल अफ़सर दर्ज करता है, कोई अदालती कारवां नहीं। ख़ानदानी नाम 21 फ़रवरी 2022 के क़ानून से (सिविल कोड की धारा 61-3) उसी सादे रास्ते से बदलता है। इनमें से किसी तरकीब का कोई दीनी मअनी नहीं : वे सिर्फ़ अमली हैं, चाहें तो करें, मुसलमान बनने के लिए कभी नहीं।

क्या मुसलमान बनने पर नाम बदलना ज़रूरी है ? का पृष्ठ याद दिलाता है कि यह कोई शर्त नहीं।

फ़्रांस में इस्लाम अपनाना : आपकी सूरत-ए-हाल अमली तौर पर

  • नौकरी : कॉन्ट्रैक्ट में मज़हब का कोई ज़िक्र नहीं ; नमाज़ के वक़्त या रोज़े की रिआयत की ख़्वाहिशें सीधे मालिक से हल होती हैं।
  • ख़ानदान : कोई क़ानूनी ऐलान नहीं होता ; ग़ैर-मुसलमान ख़ानदान : क्या करें ? का पृष्ठ इंसानी ऐलान संभालता है।
  • दफ़न : सरकारी क़ब्रिस्तानों के मज़हबी हिस्सों के लिए मस्जिद का प्रमाण-पत्र या इस्लाम की बराबर अमली वही चीज़ है जो म्युनिसिपैलिटी माँगती है।

ख़ुलासा : शहादा अदा करें (उसी लम्हे जायज़), बाक़ी के लिए अपना वक़्त लें। फ़्रांस कुछ नहीं माँगता, इस्लाम सिर्फ़ सच्चा दिल माँगता है।

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न फ़्रांस में इस्लाम अपनाना

क्या फ़्रांस में महकमे में अपना मज़हब दर्ज कराना होता है ?

नहीं। फ़्रांसीसी सिविल रजिस्टर मज़हब दर्ज नहीं करता : आपका इस्लाम में आना अदारी तौर पर कहीं दर्ज नहीं होता। सिर्फ़ दीनी काग़ज़ात (मस्जिद का प्रमाण-पत्र) मुसलमानी इदारों के सामने आपका इस्लाम साबित करते हैं।

क्या इस्लाम में आने का प्रमाण-पत्र मुफ़्त मिलता है ?

ज़्यादातर मस्जिदें इमाम से मुलाक़ात के बाद वह मुफ़्त देती हैं। वह दीनी निकाह, हज और विदेशी मुल्कों की कुछ तरकीबों के काम आता है।

स्रोत: सिविल कोड की धारा 60 (पहले नाम की तब्दीली) · सिविल कोड की धारा 61-3 (21 फ़रवरी 2022 का क़ानून, ख़ानदानी नाम की तब्दीली)

के लिए अन्य चरण मुसलमान कैसे बनें : मुकम्ल गाइड

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निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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