फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह पर हदीसें

इस्लाम > Hi > हदीस > फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

«फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह» पर 1144 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह पर हदीसों की सूची

स़ह़ीह़ जिसे यह पसंद हो कि अल्लाह उसे क़यामत के दिन की परेशानियों से मुक्त कर दे, उसे चाहिए कि किसी अभावग्रस्त व्यक्ति को मोहलत दे या उसका क़र्ज़ माफ़ कर दे। स़ह़ीह़ जिसने ईमान के साथ और नेकी की आशा मन में लिए हुए, रमज़ान के रोज़े रखे, उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। स़ह़ीह़ जिसने दो ठंडे समय की नमाज़ें पढ़ीं, वह जन्नत में जाएगा। सह़ीह़ जिस मुसलमान ने अल्लाह के मार्ग में तनिक समय तक भी अल्लाह के मार्ग में जिहाद किया, उसके लिए जन्नत अनिवार्य हो गई और जो अल्लाह की राह में ज़ख़्मी हुआ या स़ह़ीह़ जो ईमान के साथ और नेकी की आशा मन में लिए हुए, लैलतुल क़द्र (सम्मानित रात्रि) में कयाम करता है, उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। सह़ीह़ अब्दुल्लाह अच्छा आदमी है अगर वह रात को नमाज़ पढ़ता। सह़ीह़ आपका क्या ख़याल है कि यदि मैं अल्लाह के मार्ग में जिहाद करते हुए मारा जाऊँ तो मेरे गुनाह माफ़ हो जाएँगे? सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनसे एक ऊँट खरीदा और उन्हें क़ीमत नापकर देते समय कुछ अधिक दिया। सह़ीह़ अपने भाई की मदद करो, वह ज़ालिम हो या मज़लूम। सह़ीह़ रेशमी वस्त्र वही पहनता है, जिसका कोई हिस्सा नहीं है। सह़ीह़ कदापि नहीं, मैंने उसे एक धारीदार कपड़े अथवा चोगे के कारण जहन्नम की आग में जलते हुए देखा है, जिसे उसने ग़नीमत के धन से, बँटवारे से पहले ले लिया था। सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात के प्रथम भाग में सोते और अंतिम भाग में उठकर नमाज़ पढ़ते थे। सह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल! मेरे दो पड़ोसी हैं। मैं दोनों में से किसे कोई वस्तु भेंट के रूप में दूँ? आपने कहाः जिसका द्वार तेरे द्वार से अधिक निकट हो। सह़ीह़ सबसे बड़ा प्रतिफल वाला सदक़ा कौन-सा है? आपने फरमायाः वह सदक़ा, जो तुम उस समय करो, जब तुम सेहतमंद एवं लोभी हो; तुम्हें निर्धन हो जाने का डर सताए और माल सह़ीह़ बहुत ख़ूब, यह तो बहुत लाभदायक माल है। यह तो वाकई लाभदायक धन है। जो कुछ तुमने कहा, उसे मैंने सुन लिया। मेरी राय यह है कि तुम इसे अपने रिश्तेदारों में ब स़ह़ीह़ यह दोनों वस्तुएँ मेरी उम्मत के पुरुषों पर हराम और स्त्रियों के लिए हलाल हैं। सह़ीह़ यह व्यक्ति हमारे पीछे-पीछे आ गया है। तुम उसे अनुमति दो तो ठीक है, वरना वापस हो जाएगा। उसने कहाः अल्लाह के रसूल! बल्कि मैं उसे अनुमति देता हूँ। स़ह़ीह़ जो बातें मैं तुम्हें बताना छोड़ दूँ, उनके बारे में तुम मुझे मेरे हाल पर रहने दो, क्योंकि तुमसे पहले के लोगों को केवल इसी बात ने विनष्ट किया कि वे अत्य सह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखा कि तीन उँगलियों से खाना खा रहे थे। जब खाना खा चुके तो उँगलियों को चाट लिया। स़ह़ीह़ ‎“‎दूध पीने से वह रिश्ते हराम हो जाते हैं, जो जन्म के कारण से हराम होते हैं।‎”‎ स़ह़ीह़ निस्संदेह, हलाल स्पष्ट है और हराम भी स्पष्ट है स़ह़ीह़ अल्लाह ने हर चीज़ के साथ अच्छे बर्ताव को अनिवार्य किया है स़ह़ीह़ जो अल्लाह के पथ में एक दिन रोज़ा रखेगा, उसके चेहरे को अल्लाह (जहन्नम की) आग से सत्तर साल दूर कर देगा। स़ह़ीह़ लोग उस समय तक भलाई में रहेंगे, जब तक इफ़तार करने में जल्दी करते रहेंगे। सह़ीह़ आज रोज़ा न रखने वाले नेकी ले गए। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) मक्का विजय के वर्ष मक्का में दाखिल हुए तो आपके सिर पर लोहे की टोपी थी। जब उसे उतारा तो एक व्यक्ति ने आपके पास सह़ीह़ अब्दुल्लाह बिन मसऊद- रज़ियल्लाहु अन्हु- काबे को बाएँ और मिना को दाएँ करके खड़े हुए और फ़रमायाः यही वह स्थान है, जहाँ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सह़ीह़ तुममें से कोई व्यक्ति जुमा के दिन हरगिज़ रोज़ा न रखे, मगर यह कि उससे पहले या उसके बाद भी एक दिन रख ले। सह़ीह़ ऐ उमर! क्या आपको पता नहीं कि आदमी का चचा उसके बाप के समान होता है? स़ह़ीह़ हम अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के ज़माने में सदक़ा-ए-फ़ित्र, हर छोटे-बड़े, आज़ाद या ग़ुलाम की ओर से एक सा खाने की चीज़, या एक सा पनीर, या स़ह़ीह़ हमने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ सहरी का खाना खाया, फिर नमाज के लिए चले गए। अनस कहते हैं : मैंने पूछा : अज़ान और सहरी के बीच कितन सह़ीह़ ऐ अंसारियो! क्या मैंने तुम्हें सत्य की राह से भटका हुआ नहीं पाया तो अल्लाह ने तुम्हें मेरे द्वारा सीधा रास्ता दिखाया? तुम बिखरे हुए नहीं थे कि अल्लाह सह़ीह़ जिसने मेरे साथ अब तक ऐतिकाफ़ किया , वह अंतिम दस दिनों का भी ऐतिकाफ़ करे, क्योंकि मुझे यह रात दिखाई गई और फ़िर भुला दी गई। मैंने उस रात की सुब्ह को देख सह़ीह़ मक्का विजय के बाद हिजरत नहीं रही, लेकिन जिहाद और नीयत बाक़ी हैं। तथा जब जिहाद के लिए निकलने को कहा जाए तो अविलंब निकल पड़ो। स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मृत्यु तक रमज़ान के अंतिम दस दिनों में एतिकाफ़ करते रहे। आपके बाद आपकी पत्नियों ने भी एतिकाफ़ किया। स़ह़ीह़ तुम लोग सहरी खाया करो, क्योंकि सहरी में बरकत है। स़ह़ीह़ यात्रा में रोज़ा रखना पुण्य का कार्य नहीं है सह़ीह़ हम लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ रमज़ान के महीने में सख्त गर्मी के समय एक यात्रा पर निकले। स्थिति यह थी कि सख्त गर्मी के कारण, ह सह़ीह़ एक व्यक्ति ने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से यात्रा के दौरान रोज़ा रखने के संबंध में प्रश्न किया तो आपने फ़रमाया: यदि चाहो तो रोज़ा रखो और अ स़ह़ीह़ रमज़ान से एक या दो दिन पहले रोज़े न रखो। परन्तु जो व्यक्ति (पहले से) रोज़े रख रहा हो, वह रख सकता है। सह़ीह़ मुसलमान को उसके घोड़े और गुलाम की ज़कात नहीं देनी है। स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने सदक़ा-ए-फ़ित्र मुसलमान ग़ुलाम और आज़ाद, मर्द और औरत, छोटे और बड़े (सब पर) एक साअ् खजूर या एक साअ् जौ फ़र् स़ह़ीह़ किसी मुसलमान औरत के लिए जायज़ नहीं कि एक दिन एवं एक रात की यात्रा किसी महरम के बिना करे। सह़ीह़ कभी-कभी इस हाल में फ़ज्र की नमाज़ का समय आ जाता कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी पत्नियों से संभोग के कारण नापाकी की अवस्था में होते। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दो दिन, अर्थात ईद अल-फ़ित्र एवं ईदुल-अज़हा के दिन रोज़ा रखने, एक कपड़े को सारे बदन पर इस तरह लपेटने कि हाथ सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने निरंतर रोज़ा रखने से मना किया है। लोगों ने कहा कि आप तो निरंतर रोज़े रखते हैं? आपने फ़रमाया: मैं तुम्हरे जैस स़ह़ीह़ जो रोज़ा रख कर भूल कर खा ले अथवा पी ले, वह अपना रोज़ा पूरा करे, क्योंकि उसे अल्लाह ने खिलाया एवं पिलाया है। सह़ीह़ क्या अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने विशेष रूप से शुक्रवार के दिन का रोज़ा रखने से मना किया है? तो फ़रमायाः हाँ। स़ह़ीह़ मैंने उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- के साथ ईद की नमाज़ अदा की। उन्होंने फ़रमाया कि यह दो दिन ऐसे हैं, जिनमें रोज़ा रखने से अल्लाह के रसूल -सल्लल् सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) एहराम की अवस्था में कैसे अपना सिर धोते थे? सह़ीह़ हम लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ हज के लिए तल्बिया पुकारते हुए आए तो आपने हमें आदेश दिया और हमने उसे उमरा में बदल दिया। सह़ीह़ जो रोज़ा बाक़ी छोड़कर मर जाए, उसका वली (अभिभावक या करीबी रिश्तेदार) उसकी ओर से रोज़ा रखेगा। सह़ीह़ मेरी माँ मर गई है और उसपर एक महीने का रोज़ा है, ऐसे में क्या मैं उसकी तरफ़ से रोज़ा रख लूँ? आपने फ़रमायाः यदि तेरी माँ पर क़र्ज होता तो क्या तू उसकी ओ सह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अरफ़ात में प्रवचन देने के दौरान (एहराम वाले व्यक्ति के बारे में) कहते हुए सुनाः जो जूता न पाए, वह म सह़ीह़ जानवरों से होने वाली क्षति की क्षतिपूर्ति नहीं है, कुएँ में गिरने से होने वाली क्षति की क्षितपूर्ति नहीं है, खान में काम करते समय होने वाली क्षति की क सह़ीह़ शैतान आदम की संतान की रगों में लहू की तरह दौड़ता है। इसलिए मुझे डर हुआ कि शैतान तुम्हारे दिलों में कोई गलत ख़्याल न डाल दे। स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के तलबिया में यह शब्द हुआ करते थे: (ऐ अल्लाह! मैं उपस्थि हूँ। मैं उपस्थित हूँ। मैं उपस्थित हूँ, तेरा कोई साझ सह़ीह़ मुझे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास लाया गया तो जूएँ मेरे चेहरे पर झड़-झड़कर गिर रही थीं। यह देख आपने कहाः मैं नहीं समझता था कि तुम् सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके सहाबा चार ज़िल-हिज्जा की सुब्ह को मक्का पहुँचे तो आपने उन्हें आदेश दिया कि हज के एहराम को उमरा का एह स़ह़ीह़ मुझे मेरे दोस्त (नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने तीन चीज़ों की वसीयत की है : हर महीना तीन दिन रोज़ा रखने, चाश्त की दो रकात नमाज़ पढ़ने और सोने से पहल
بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.6 / 29.5
रोशनी 91%
12 दिनों में अमावस्या
حسبنا الله ونعم الوكيل अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद