मुसहफ़ का पृष्ठ 603 14 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 30, हिज़्ब 60 में है।
10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया
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قُلْ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْكَـٰفِرُونَ ﴿١﴾
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ काफिरों
لَآ أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ ﴿٢﴾
तुम जिन चीज़ों को पूजते हो, मैं उनको नहीं पूजता
وَلَآ أَنتُمْ عَـٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ ﴿٣﴾
और जिस (ख़ुदा) की मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत नहीं करते
وَلَآ أَنَا۠ عَابِدٌۭ مَّا عَبَدتُّمْ ﴿٤﴾
और जिन्हें तुम पूजते हो मैं उनका पूजने वाला नहीं
وَلَآ أَنتُمْ عَـٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ ﴿٥﴾
और जिसकी मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत करने वाले नहीं
لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِىَ دِينِ ﴿٦﴾
तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मेरे लिए मेरा दीन
إِذَا جَآءَ نَصْرُ ٱللَّهِ وَٱلْفَتْحُ ﴿١﴾
ऐ रसूल जब ख़ुदा की मदद आ पहँचेगी
وَرَأَيْتَ ٱلنَّاسَ يَدْخُلُونَ فِى دِينِ ٱللَّهِ أَفْوَاجًۭا ﴿٢﴾
और फतेह (मक्का) हो जाएगी और तुम लोगों को देखोगे कि गोल के गोल ख़ुदा के दीन में दाख़िल हो रहे हैं
فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَٱسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ تَوَّابًۢا ﴿٣﴾
तो तुम अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करना और उसी से मग़फेरत की दुआ माँगना वह बेशक बड़ा माफ़ करने वाला है
تَبَّتْ يَدَآ أَبِى لَهَبٍۢ وَتَبَّ ﴿١﴾
अबु लहब के हाथ टूट जाएँ और वह ख़ुद सत्यानास हो जाए
مَآ أَغْنَىٰ عَنْهُ مَالُهُۥ وَمَا كَسَبَ ﴿٢﴾
(आख़िर) न उसका माल ही उसके हाथ आया और (न) उसने कमाया
سَيَصْلَىٰ نَارًۭا ذَاتَ لَهَبٍۢ ﴿٣﴾
वह बहुत भड़कती हुई आग में दाख़िल होगा
وَٱمْرَأَتُهُۥ حَمَّالَةَ ٱلْحَطَبِ ﴿٤﴾
और उसकी जोरू भी जो सर पर ईंधन उठाए फिरती है
فِى جِيدِهَا حَبْلٌۭ مِّن مَّسَدٍۭ ﴿٥﴾
और उसके गले में बटी हुई रस्सी बँधी है