क़ुरआन का पृष्ठ 596 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 596 26 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 30, हिज़्ब 60 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में पृष्ठ 596

26
आयतें
30
जुज़
60
हिज़्ब
3
सूरह
الليل · जुज़ 30
जुज़ 30
पृष्ठ 596
سورة الليل
जुज़ 30 70.9% (400/564)
हिज़्ब 60 43.1% (124/288)

لَا يَصْلَىٰهَآ إِلَّا ٱلْأَشْقَى ﴿١٥﴾

उसमें बस वही दाख़िल होगा जो बड़ा बदबख्त है

ٱلَّذِى كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ ﴿١٦﴾

जिसने झुठलाया और मुँह फेर लिया और जो बड़ा परहेज़गार है

وَسَيُجَنَّبُهَا ٱلْأَتْقَى ﴿١٧﴾

वह उससे बचा लिया जाएगा

ٱلَّذِى يُؤْتِى مَالَهُۥ يَتَزَكَّىٰ ﴿١٨﴾

जो अपना माल (ख़ुदा की राह) में देता है ताकि पाक हो जाए

وَمَا لِأَحَدٍ عِندَهُۥ مِن نِّعْمَةٍۢ تُجْزَىٰٓ ﴿١٩﴾

और लुत्फ ये है कि किसी का उस पर कोई एहसान नहीं जिसका उसे बदला दिया जाता है

إِلَّا ٱبْتِغَآءَ وَجْهِ رَبِّهِ ٱلْأَعْلَىٰ ﴿٢٠﴾

बल्कि (वह तो) सिर्फ अपने आलीशान परवरदिगार की ख़ुशनूदी हासिल करने के लिए (देता है)

وَلَسَوْفَ يَرْضَىٰ ﴿٢١﴾

और वह अनक़रीब भी ख़ुश हो जाएगा

وَٱلضُّحَىٰ ﴿١﴾

(ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़सम

وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ ﴿٢﴾

और रात की जब (चीज़ों को) छुपा ले

مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ ﴿٣﴾

कि तुम्हारा परवरदिगार न तुमको छोड़ बैठा और (न तुमसे) नाराज़ हुआ

وَلَلْـَٔاخِرَةُ خَيْرٌۭ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ ﴿٤﴾

और तुम्हारे वास्ते आख़ेरत दुनिया से यक़ीनी कहीं बेहतर है

وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ ﴿٥﴾

और तुम्हारा परवरदिगार अनक़रीब इस क़दर अता करेगा कि तुम ख़ुश हो जाओ

أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًۭا فَـَٔاوَىٰ ﴿٦﴾

क्या उसने तुम्हें यतीम पाकर (अबू तालिब की) पनाह न दी (ज़रूर दी)

وَوَجَدَكَ ضَآلًّۭا فَهَدَىٰ ﴿٧﴾

और तुमको एहकाम से नावाकिफ़ देखा तो मंज़िले मक़सूद तक पहुँचा दिया

وَوَجَدَكَ عَآئِلًۭا فَأَغْنَىٰ ﴿٨﴾

और तुमको तंगदस्त देखकर ग़नी कर दिया

فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ ﴿٩﴾

तो तुम भी यतीम पर सितम न करना

وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ ﴿١٠﴾

माँगने वाले को झिड़की न देना

وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ ﴿١١﴾

और अपने परवरदिगार की नेअमतों का ज़िक्र करते रहना

أَلَمْ نَشْرَحْ لَكَ صَدْرَكَ ﴿١﴾

(ऐ रसूल) क्या हमने तुम्हारा सीना इल्म से कुशादा नहीं कर दिया (जरूर किया)

وَوَضَعْنَا عَنكَ وِزْرَكَ ﴿٢﴾

और तुम पर से वह बोझ उतार दिया

ٱلَّذِىٓ أَنقَضَ ظَهْرَكَ ﴿٣﴾

जिसने तुम्हारी कमर तोड़ रखी थी

وَرَفَعْنَا لَكَ ذِكْرَكَ ﴿٤﴾

और तुम्हारा ज़िक्र भी बुलन्द कर दिया

فَإِنَّ مَعَ ٱلْعُسْرِ يُسْرًا ﴿٥﴾

तो (हाँ) पस बेशक दुशवारी के साथ ही आसानी है

إِنَّ مَعَ ٱلْعُسْرِ يُسْرًۭا ﴿٦﴾

यक़ीनन दुश्वारी के साथ आसानी है

فَإِذَا فَرَغْتَ فَٱنصَبْ ﴿٧﴾

तो जब तुम फारिग़ हो जाओ तो मुक़र्रर कर दो

وَإِلَىٰ رَبِّكَ فَٱرْغَب ﴿٨﴾

और फिर अपने परवरदिगार की तरफ रग़बत करो

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 18 रबी अल-अव्वल
الثلاثاء 18 ربيع الأول
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 19.4 / 29.5
रोशनी 77%
10 दिनों में अमावस्या
الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है