रुकू 551 सूरह Al-Kafirun (आयत 1 से 6) से है। इसमें 6 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।
28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया
पूरा पृष्ठ पढ़ें : क़ुरआन का रुकू 551 पढ़ें →
قُلْ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْكَـٰفِرُونَ ﴿1﴾
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ काफिरों
لَآ أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ ﴿2﴾
तुम जिन चीज़ों को पूजते हो, मैं उनको नहीं पूजता
وَلَآ أَنتُمْ عَـٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ ﴿3﴾
और जिस (ख़ुदा) की मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत नहीं करते
وَلَآ أَنَا۠ عَابِدٌۭ مَّا عَبَدتُّمْ ﴿4﴾
और जिन्हें तुम पूजते हो मैं उनका पूजने वाला नहीं
وَلَآ أَنتُمْ عَـٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ ﴿5﴾
और जिसकी मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत करने वाले नहीं
لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِىَ دِينِ ﴿6﴾
तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मेरे लिए मेरा दीन