क़ुरआन का रुकू 551 पढ़ें

रुकू 551 सूरह Al-Kafirun (आयत 1 से 6) से है। इसमें 6 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 551

6
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.6
आयतें

रुकू 551 में सूरह

الكافرون · जुज़ 30
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पृष्ठ 603
रुकू 551
سورة الكافرون
जुज़ 30 94.9% (535/564)
हिज़्ब 60 89.9% (259/288)

قُلْ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْكَـٰفِرُونَ ﴿1﴾

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ काफिरों

لَآ أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ ﴿2﴾

तुम जिन चीज़ों को पूजते हो, मैं उनको नहीं पूजता

وَلَآ أَنتُمْ عَـٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ ﴿3﴾

और जिस (ख़ुदा) की मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत नहीं करते

وَلَآ أَنَا۠ عَابِدٌۭ مَّا عَبَدتُّمْ ﴿4﴾

और जिन्हें तुम पूजते हो मैं उनका पूजने वाला नहीं

وَلَآ أَنتُمْ عَـٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ ﴿5﴾

और जिसकी मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत करने वाले नहीं

لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِىَ دِينِ ﴿6﴾

तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मेरे लिए मेरा दीन

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 2 रबी अल-सानी
الثلاثاء 2 ربيع الآخر
هلال متزايد बढ़ता हुआ अर्धचंद्र दिन 3.7 / 29.5
रोशनी 15%
11 दिनों में पूर्णिमा
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है