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मुसलमान ईसा के बारे में बज़बत क्या ईमान रखते हैं : उनकी मुज़ज़ब पैदाइश, उनका मक़सद, उनके मुअज़िज़े, उनका आसमान पर उठा लिया जाना और उनकी दोबारा आमद। ख़ुलासा और मुकम्ल क़िस्से तक रास्ता।
मुसलमान ईसा (अलैहिस्सलाम) पर अल्लाह के सबसे बड़े पैग़ंबरों में से इक के तौर पर ईमान रखते हैं : मरियम पवित्रा से अल्लाह की मरज़ी से पैदा हुए (क़ुरआन 3:47), बनी इसराईल की तरफ़ भेजे गए मसीह, अल्लाह की इजाज़त से मुअज़िज़े दिखाने वाले (क़ुरआन 3:49), ज़िंदा हालत में अल्लाह की तरफ़ उठा लिए गए (क़ुरआन 4:158) और आख़िरी ज़माने में दोबारा आने वाले (बुख़ारी और मुस्लिम से मरवा)। इस्लाम में वह न अल्लाह हैं और न अल्लाह की औलाद, बल्कि अल्लाह का वही बुज़ुर्ग बंदा हैं जिसकी हैसियत वे ख़ुद बयान करते हैं (क़ुरआन 19:30)।
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18 अक्टूबर 2026 को 20h58 बजे अपडेट किया गया
📖 3 मिनट पढ़ने का समयक़ुरआन ईसा की पैदाइश की तफ़सील से बयान करता है। मरियम, इक परहेज़गार ख़ातून, को फ़रिश्तों की ख़ुशख़बरी मिली : "ऐ मरयम! निःसंदेह अल्लाह तुम्हें अपनी ओर से एक शब्द की शुभ सूचना देता है, जिसका नाम 'मसीह़ ईसा बिन मरयम' है।" (क़ुरआन 3:45)। किसी मर्द के बग़ैर हमल ठहरा : "जब वह किसी काम का निर्णय कर लेता है, तो उससे यही कहता है : "हो जा", तो वह हो जाता है।" (क़ुरआन 3:47)।
अकेली बच्चा जनने के बाद, इलज़ामों का शिकार होकर, उन्होंने अपने बच्चे को दिखाया जो गहवाड़े से बोला : "निःसंदेह मैं अल्लाह का बंदा हूँ। उसने मुझे पुस्तक (इन्जील) प्रदान की तथा मुझे नबी बनाया है" (क़ुरआन 19:30)। सूरह मरियम (19) और सूरह आल-इमरान (3) यही क़िस्सा सुनाती हैं, क़ुरआन की सबसे मशहूर बायाँ में से।
ईसा (अलैहिस्सलाम) इंजील के साथ बनी इसराईल की तरफ़ भेजे गए : "हमने उनके पीछे उन्हीं के पद-चिन्हों पर मरयम के बेटे ईसा को भेजा, जो उससे पहले (उतरने वाली) तौरात की पुष्टि करने वाला था तथा हमने उसे इंजील प्रदान की, जिसमें मार्गदर्शन और प्रकाश थी" (क़ुरआन 5:46)।
उनके मुअज़िज़े बहुत हैं : जन्म-जात अंधे और कोढ़ी को शिफ़ा, मुर्दों को जिलाना, लोगों के छुपे हुए काम बताना, मिट्टी के परिंदे में जान डालना, "अल्लाह की अनुमति से", क़ुरआन दोहराता है (क़ुरआन 3:49) : मुअज़िज़ा अल्लाह की तरफ़ से है, कभी रसूल के अपने आप से नहीं। क़ुरआन के मुताबिक़ ईसा ने अपने बाद आने वाले की भी ख़ुशख़बरी दी : "ऐ इसराईल की संतान! निःसंदेह मैं तुम्हारी ओर अल्लाह का रसूल हूँ, उस तौरात की पुष्टि करने वाला हूँ, जो मुझसे पहले आई है तथा एक रसूल की शुभ सूचना देने वाला हूँ, जो मेरे बाद आएगा, जिसका नाम अहमद है।" (क़ुरआन 61:6)।
क़ुरआन सूली का इनकार करता है : "उन्होंने उसे निश्चित रूप से क़त्ल नहीं किया", "अल्लाह ने उसे अपनी ओर उठा लिया" (क़ुरआन 4:157-158)। ईसा अल्लाह के पास ज़िंदा हैं, और बुख़ारी व मुस्लिम से मरवा हदीसें आख़िरी ज़माने से पहले उनकी आमद की ख़ुशख़बरी देती हैं : वह उतरेंगे, इंसाफ़ क़ायम करेंगे और दूसरे इंसानों जैसी ज़िंदगी गुज़ारकर दुनिया से जाएँगे।
क़ुरआन क्यों कहता है कि ईसा को सूली पर नहीं चढ़ाया गया ? का पृष्ठ ईसाई धर्म से यह बड़ा तारीख़ी इख़्तिलाफ़ जाँचता है।
ईसा के पास वह सब अल्क़ाब हैं जिन्हें इस्लाम इज़्ज़त देता है : पैग़ंबर (नबी), रसूल, मसीह (अल-मसीह), "जिसे (अल्लाह ने) मरयम की ओर भेजा" और "उसकी ओर से एक आत्मा" (क़ुरआन 4:171)। इनमें से कोई लक़ब उन्हें अल्लाह नहीं बनाता : क़ुरआन में उनका पहला कलिमा है "निःसंदेह मैं अल्लाह का बंदा हूँ" (क़ुरआन 19:30), और मुसलमान इसी मियार से उनसे मोहब्बत करता है। ईसा को अल्लाह का बंदा और उसका रसूल मानना ईमान की शराइत में से है (बुख़ारी 3435)।
यह पृष्ठ इक ख़ुलासा है। आयत-ब-आयत दलीलों के साथ मुकम्ल क़िस्सा, ईसा इब्न मरियम का क़िस्सा, अलग मॉड्यूल में पढ़ा जा सकता है। ईसाई अक़ीदे से मुवाज़नत के लिए देखें क्या ईसा अल्लाह हैं ? और इस्लाम त्रित्व को क्यों अस्वीकार करता है ?
हाँ। ईसा (अलैहिस्सलाम) क़ुरआनी नाम है नासरत के ईसा, मरियम के इब्न, का। इस्लाम और ईसाई धर्म उसी तारीख़ी शख़्स की बात करते हैं, उसकी ज़ात पर अक़ाईद मुख़्तलिफ़ हैं।
नहीं, इस्लाम में ईसा की पैदाइश की कोई मुख़्तस्स ईद नहीं। इससे क़ुरआन की उनकी मुज़ज़ब पैदाइश को दी गई इज़्ज़त में कमी नहीं आती, जो सूरह मरियम में तफ़सील से बयान हुई है।
हाँ, बुख़ारी और मुस्लिम से मरवा हदीसों के मुताबिक़ : वह आख़िरी ज़माने में उतरेंगे, इंसाफ़ क़ायम करेंगे और मुहम्मद (उन पर अल्लाह की रहमत और सलामत हो) की शरीयत के मुताबिक़ चलेंगे (उन दोनों पर सलाम हो)। उनकी आमद आख़िरी ज़माने पर मुसलमानों के ईमान का हिस्सा है।