क़ुरआन का रुकू 322 पढ़ें

रुकू 322 सूरह Ash-Shuara (आयत 123 से 140) से है। इसमें 18 आयतें हैं और यह जुज़ 19 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 322

18
आयतें
1
सूरह
19
जुज़
v.123 – v.140
आयतें

रुकू 322 में सूरह

الشعراء · जुज़ 19
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سورة الشعراء
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كَذَّبَتْ عَادٌ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿123﴾

(इसी तरह क़ौम) आद ने पैग़म्बरों को झुठलाया

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ هُودٌ أَلَا تَتَّقُونَ ﴿124﴾

जब उनके भाई हूद ने उनसे कहा कि तुम ख़ुदा से क्यों नही डरते

إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌۭ ﴿125﴾

मैं तो यक़ीनन तुम्हारा अमानतदार पैग़म्बर हूँ

فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ﴿126﴾

तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो

وَمَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿127﴾

मै तो तुम से इस (तबलीग़े रिसालत) पर कुछ मज़दूरी भी नहीं माँगता मेरी उजरत तो बस सारी ख़ुदायी के पालने वाले (ख़ुदा) पर है

أَتَبْنُونَ بِكُلِّ رِيعٍ ءَايَةًۭ تَعْبَثُونَ ﴿128﴾

तो क्या तुम ऊँची जगह पर बेकार यादगारे बनाते फिरते हो

وَتَتَّخِذُونَ مَصَانِعَ لَعَلَّكُمْ تَخْلُدُونَ ﴿129﴾

और बड़े बड़े महल तामीर करते हो गोया तुम हमेशा (यहीं) रहोगे

وَإِذَا بَطَشْتُم بَطَشْتُمْ جَبَّارِينَ ﴿130﴾

और जब तुम (किसी पर) हाथ डालते हो तो सरकशी से हाथ डालते हो

فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ﴿131﴾

तो तुम ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो

وَٱتَّقُوا۟ ٱلَّذِىٓ أَمَدَّكُم بِمَا تَعْلَمُونَ ﴿132﴾

और उस शख्स से डरो जिसने तुम्हारी उन चीज़ों से मदद की जिन्हें तुम खूब जानते हो

أَمَدَّكُم بِأَنْعَـٰمٍۢ وَبَنِينَ ﴿133﴾

अच्छा सुनो उसने तुम्हारे चार पायों और लड़के बालों वग़ैरह और चश्मों से मदद की

وَجَنَّـٰتٍۢ وَعُيُونٍ ﴿134﴾

मै तो यक़ीनन तुम पर

إِنِّىٓ أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍۢ ﴿135﴾

एक बड़े (सख्त) रोज़ के अज़ाब से डरता हूँ

قَالُوا۟ سَوَآءٌ عَلَيْنَآ أَوَعَظْتَ أَمْ لَمْ تَكُن مِّنَ ٱلْوَٰعِظِينَ ﴿136﴾

वह लोग कहने लगे ख्वाह तुम नसीहत करो या न नसीहत करो हमारे वास्ते (सब) बराबर है

إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا خُلُقُ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿137﴾

ये (डरावा) तो बस अगले लोगों की आदत है

وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ ﴿138﴾

हालाँकि हम पर अज़ाब (वग़ैरह अब) किया नहीं जाएगा

فَكَذَّبُوهُ فَأَهْلَكْنَـٰهُمْ ۗ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ﴿139﴾

ग़रज़ उन लोगों ने हूद को झुठला दिया तो हमने भी उनको हलाक कर डाला बेशक इस वाक़िये में यक़ीनी एक बड़ी इबरत है आर उनमें से बहुतेरे ईमान लाने वाले भी न थे

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ ﴿140﴾

और इसमें शक नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन (सब पर) ग़ालिब (और) बड़ा मेहरबान है

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 18 जुमादा अल-अव्वल
الجمعة 18 جمادى الأولى
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10 दिनों में अमावस्या
لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद