क़ुरआन का रुकू 535 पढ़ें

रुकू 535 सूरह Ad-Duha (आयत 1 से 11) से है। इसमें 11 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 535

11
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.11
आयतें

रुकू 535 में सूरह

الضحى · जुज़ 30
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سورة الضحى
जुज़ 30 72.2% (407/564)
हिज़्ब 60 45.5% (131/288)

وَٱلضُّحَىٰ ﴿1﴾

(ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़सम

وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ ﴿2﴾

और रात की जब (चीज़ों को) छुपा ले

مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ ﴿3﴾

कि तुम्हारा परवरदिगार न तुमको छोड़ बैठा और (न तुमसे) नाराज़ हुआ

وَلَلْـَٔاخِرَةُ خَيْرٌۭ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ ﴿4﴾

और तुम्हारे वास्ते आख़ेरत दुनिया से यक़ीनी कहीं बेहतर है

وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ ﴿5﴾

और तुम्हारा परवरदिगार अनक़रीब इस क़दर अता करेगा कि तुम ख़ुश हो जाओ

أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًۭا فَـَٔاوَىٰ ﴿6﴾

क्या उसने तुम्हें यतीम पाकर (अबू तालिब की) पनाह न दी (ज़रूर दी)

وَوَجَدَكَ ضَآلًّۭا فَهَدَىٰ ﴿7﴾

और तुमको एहकाम से नावाकिफ़ देखा तो मंज़िले मक़सूद तक पहुँचा दिया

وَوَجَدَكَ عَآئِلًۭا فَأَغْنَىٰ ﴿8﴾

और तुमको तंगदस्त देखकर ग़नी कर दिया

فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ ﴿9﴾

तो तुम भी यतीम पर सितम न करना

وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ ﴿10﴾

माँगने वाले को झिड़की न देना

وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ ﴿11﴾

और अपने परवरदिगार की नेअमतों का ज़िक्र करते रहना

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 18 जुमादा अल-अव्वल
الجمعة 18 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 19.4 / 29.5
रोशनी 77%
10 दिनों में अमावस्या
لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद