क़ुरआन का रुकू 554 पढ़ें

रुकू 554 सूरह Al-Ikhlas (आयत 1 से 4) से है। इसमें 4 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 554

4
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.4
आयतें

रुकू 554 में सूरह

الإخلاص · जुज़ 30
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पृष्ठ 604
रुकू 554
سورة الإخلاص
जुज़ 30 97.3% (549/564)
हिज़्ब 60 94.8% (273/288)

قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ ﴿1﴾

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा एक है

ٱللَّهُ ٱلصَّمَدُ ﴿2﴾

ख़ुदा बरहक़ बेनियाज़ है

لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ﴿3﴾

न उसने किसी को जना न उसको किसी ने जना,

وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدٌۢ ﴿4﴾

और उसका कोई हमसर नहीं

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 2 रबी अल-सानी
الثلاثاء 2 ربيع الآخر
هلال متزايد बढ़ता हुआ अर्धचंद्र दिन 3.7 / 29.5
रोशनी 15%
11 दिनों में पूर्णिमा
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ