क़ुरआन का रुकू 471 पढ़ें

रुकू 471 सूरह Al-Waqia (आयत 75 से 96) से है। इसमें 22 आयतें हैं और यह जुज़ 27 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 471

22
आयतें
1
सूरह
27
जुज़
v.75 – v.96
आयतें

रुकू 471 में सूरह

الواقعة · जुज़ 27
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سورة الواقعة
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۞ فَلَآ أُقْسِمُ بِمَوَٰقِعِ ٱلنُّجُومِ ﴿75﴾

तो मैं तारों के मनाज़िल की क़सम खाता हूँ

وَإِنَّهُۥ لَقَسَمٌۭ لَّوْ تَعْلَمُونَ عَظِيمٌ ﴿76﴾

और अगर तुम समझो तो ये बड़ी क़सम है

إِنَّهُۥ لَقُرْءَانٌۭ كَرِيمٌۭ ﴿77﴾

कि बेशक ये बड़े रूतबे का क़ुरान है

فِى كِتَـٰبٍۢ مَّكْنُونٍۢ ﴿78﴾

जो किताब (लौहे महफूज़) में (लिखा हुआ) है

لَّا يَمَسُّهُۥٓ إِلَّا ٱلْمُطَهَّرُونَ ﴿79﴾

इसको बस वही लोग छूते हैं जो पाक हैं

تَنزِيلٌۭ مِّن رَّبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿80﴾

सारे जहाँ के परवरदिगार की तरफ से (मोहम्मद पर) नाज़िल हुआ है

أَفَبِهَـٰذَا ٱلْحَدِيثِ أَنتُم مُّدْهِنُونَ ﴿81﴾

तो क्या तुम लोग इस कलाम से इन्कार रखते हो

وَتَجْعَلُونَ رِزْقَكُمْ أَنَّكُمْ تُكَذِّبُونَ ﴿82﴾

और तुमने अपनी रोज़ी ये करार दे ली है कि (उसको) झुठलाते हो

فَلَوْلَآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلْحُلْقُومَ ﴿83﴾

तो क्या जब जान गले तक पहुँचती है

وَأَنتُمْ حِينَئِذٍۢ تَنظُرُونَ ﴿84﴾

और तुम उस वक्त (क़ी हालत) पड़े देखा करते हो

وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنكُمْ وَلَـٰكِن لَّا تُبْصِرُونَ ﴿85﴾

और हम इस (मरने वाले) से तुमसे भी ज्यादा नज़दीक होते हैं लेकिन तुमको दिखाई नहीं देता

فَلَوْلَآ إِن كُنتُمْ غَيْرَ مَدِينِينَ ﴿86﴾

तो अगर तुम किसी के दबाव में नहीं हो

تَرْجِعُونَهَآ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ ﴿87﴾

तो अगर (अपने दावे में) तुम सच्चे हो तो रूह को फेर क्यों नहीं देते

فَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلْمُقَرَّبِينَ ﴿88﴾

पस अगर वह (मरने वाला ख़ुदा के) मुक़र्रेबीन से है

فَرَوْحٌۭ وَرَيْحَانٌۭ وَجَنَّتُ نَعِيمٍۢ ﴿89﴾

तो (उस के लिए) आराम व आसाइश है और ख़ुशबूदार फूल और नेअमत के बाग़

وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلْيَمِينِ ﴿90﴾

और अगर वह दाहिने हाथ वालों में से है

فَسَلَـٰمٌۭ لَّكَ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلْيَمِينِ ﴿91﴾

तो (उससे कहा जाएगा कि) तुम पर दाहिने हाथ वालों की तरफ़ से सलाम हो

وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلْمُكَذِّبِينَ ٱلضَّآلِّينَ ﴿92﴾

और अगर झुठलाने वाले गुमराहों में से है

فَنُزُلٌۭ مِّنْ حَمِيمٍۢ ﴿93﴾

तो (उसकी) मेहमानी खौलता हुआ पानी है

وَتَصْلِيَةُ جَحِيمٍ ﴿94﴾

और जहन्नुम में दाखिल कर देना

إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ حَقُّ ٱلْيَقِينِ ﴿95﴾

बेशक ये (ख़बर) यक़ीनन सही है

فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ ﴿96﴾

तो (ऐ रसूल) तुम अपने बुज़ुर्ग परवरदिगार की तस्बीह करो

بسم الله الرحمن الرحيم सोम 7 जुमादा अल-अव्वल
الاثنين 7 جمادى الأولى
التربيع الأول पहली तिमाही दिन 8.1 / 29.5
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7 दिनों में पूर्णिमा
الله أكبر अल्लाह सबसे महान है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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