रुकू 510 सूरह Al-Muddaththir (आयत 1 से 31) से है। इसमें 31 आयतें हैं और यह जुज़ 29 में है।
05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया
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يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْمُدَّثِّرُ ﴿١﴾
ऐ (मेरे) कपड़ा ओढ़ने वाले (रसूल) उठो
قُمْ فَأَنذِرْ ﴿٢﴾
और लोगों को (अज़ाब से) डराओ
وَرَبَّكَ فَكَبِّرْ ﴿٣﴾
और अपने परवरदिगार की बड़ाई करो
وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْ ﴿٤﴾
और अपने कपड़े पाक रखो
وَٱلرُّجْزَ فَٱهْجُرْ ﴿٥﴾
और गन्दगी से अलग रहो
وَلَا تَمْنُن تَسْتَكْثِرُ ﴿٦﴾
और इसी तरह एहसान न करो कि ज्यादा के ख़ास्तगार बनो
وَلِرَبِّكَ فَٱصْبِرْ ﴿٧﴾
और अपने परवरदिगार के लिए सब्र करो
فَإِذَا نُقِرَ فِى ٱلنَّاقُورِ ﴿٨﴾
फिर जब सूर फूँका जाएगा
فَذَٰلِكَ يَوْمَئِذٍۢ يَوْمٌ عَسِيرٌ ﴿٩﴾
तो वह दिन काफ़िरों पर सख्त दिन होगा
عَلَى ٱلْكَـٰفِرِينَ غَيْرُ يَسِيرٍۢ ﴿١٠﴾
आसान नहीं होगा
ذَرْنِى وَمَنْ خَلَقْتُ وَحِيدًۭا ﴿١١﴾
(ऐ रसूल) मुझे और उस शख़्श को छोड़ दो जिसे मैने अकेला पैदा किया
وَجَعَلْتُ لَهُۥ مَالًۭا مَّمْدُودًۭا ﴿١٢﴾
और उसे बहुत सा माल दिया
وَبَنِينَ شُهُودًۭا ﴿١٣﴾
और नज़र के सामने रहने वाले बेटे (दिए)
وَمَهَّدتُّ لَهُۥ تَمْهِيدًۭا ﴿١٤﴾
और उसे हर तरह के सामान से वुसअत दी
ثُمَّ يَطْمَعُ أَنْ أَزِيدَ ﴿١٥﴾
फिर उस पर भी वह तमाअ रखता है कि मैं और बढ़ाऊँ
كَلَّآ ۖ إِنَّهُۥ كَانَ لِـَٔايَـٰتِنَا عَنِيدًۭا ﴿١٦﴾
ये हरगिज़ न होगा ये तो मेरी आयतों का दुश्मन था
سَأُرْهِقُهُۥ صَعُودًا ﴿١٧﴾
तो मैं अनक़रीब उस सख्त अज़ाब में मुब्तिला करूँगा
إِنَّهُۥ فَكَّرَ وَقَدَّرَ ﴿١٨﴾
उसने फिक्र की और ये तजवीज़ की
فَقُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ ﴿١٩﴾
तो ये (कम्बख्त) मार डाला जाए
ثُمَّ قُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ ﴿٢٠﴾
उसने क्यों कर तजवीज़ की
ثُمَّ نَظَرَ ﴿٢١﴾
फिर ग़ौर किया
ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَ ﴿٢٢﴾
फिर त्योरी चढ़ाई और मुँह बना लिया
ثُمَّ أَدْبَرَ وَٱسْتَكْبَرَ ﴿٢٣﴾
फिर पीठ फेर कर चला गया और अकड़ बैठा
فَقَالَ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا سِحْرٌۭ يُؤْثَرُ ﴿٢٤﴾
फिर कहने लगा ये बस जादू है जो (अगलों से) चला आता है
إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا قَوْلُ ٱلْبَشَرِ ﴿٢٥﴾
ये तो बस आदमी का कलाम है
سَأُصْلِيهِ سَقَرَ ﴿٢٦﴾
(ख़ुदा का नहीं) मैं उसे अनक़रीब जहन्नुम में झोंक दूँगा
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا سَقَرُ ﴿٢٧﴾
और तुम क्या जानों कि जहन्नुम क्या है
لَا تُبْقِى وَلَا تَذَرُ ﴿٢٨﴾
वह न बाक़ी रखेगी न छोड़ देगी
لَوَّاحَةٌۭ لِّلْبَشَرِ ﴿٢٩﴾
और बदन को जला कर सियाह कर देगी
عَلَيْهَا تِسْعَةَ عَشَرَ ﴿٣٠﴾
उस पर उन्नीस (फ़रिश्ते मुअय्यन) हैं
وَمَا جَعَلْنَآ أَصْحَـٰبَ ٱلنَّارِ إِلَّا مَلَـٰٓئِكَةًۭ ۙ وَمَا جَعَلْنَا عِدَّتَهُمْ إِلَّا فِتْنَةًۭ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لِيَسْتَيْقِنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ وَيَزْدَادَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِيمَـٰنًۭا ۙ وَلَا يَرْتَابَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْمُؤْمِنُونَ ۙ وَلِيَقُولَ ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌۭ وَٱلْكَـٰفِرُونَ مَاذَآ أَرَادَ ٱللَّهُ بِهَـٰذَا مَثَلًۭا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ ٱللَّهُ مَن يَشَآءُ وَيَهْدِى مَن يَشَآءُ ۚ وَمَا يَعْلَمُ جُنُودَ رَبِّكَ إِلَّا هُوَ ۚ وَمَا هِىَ إِلَّا ذِكْرَىٰ لِلْبَشَرِ ﴿٣١﴾
और हमने जहन्नुम का निगेहबान तो बस फरिश्तों को बनाया है और उनका ये शुमार भी काफिरों की आज़माइश के लिए मुक़र्रर किया ताकि अहले किताब (फौरन) यक़ीन कर लें और मोमिनो का ईमान और ज्यादा हो और अहले किताब और मोमिनीन (किसी तरह) शक़ न करें और जिन लोगों के दिल में (निफ़ाक का) मर्ज़ है (वह) और काफिर लोग कह बैठे कि इस मसल (के बयान करने) से ख़ुदा का क्या मतलब है यूँ ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है हिदायत करता है और तुम्हारे परवरदिगार के लशकरों को उसके सिवा कोई नहीं जानता और ये तो आदमियों के लिए बस नसीहत है