क़ुरआन का रुकू 458 पढ़ें

रुकू 458 सूरह At-Tur (आयत 1 से 28) से है। इसमें 28 आयतें हैं और यह जुज़ 27 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 458

28
आयतें
1
सूरह
27
जुज़
v.1 – v.28
आयतें

रुकू 458 में सूरह

الطور · जुज़ 27
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سورة الطور
जुज़ 27 7.5% (30/399)
हिज़्ब 53 15.3% (30/196)

وَٱلطُّورِ ﴿1﴾

(कोहे) तूर की क़सम

وَكِتَـٰبٍۢ مَّسْطُورٍۢ ﴿2﴾

और उसकी किताब (लौहे महफूज़) की

فِى رَقٍّۢ مَّنشُورٍۢ ﴿3﴾

जो क़ुशादा औराक़ में लिखी हुई है

وَٱلْبَيْتِ ٱلْمَعْمُورِ ﴿4﴾

और बैतुल मामूर की (जो काबा के सामने फरिश्तों का क़िब्ला है)

وَٱلسَّقْفِ ٱلْمَرْفُوعِ ﴿5﴾

और ऊँची छत (आसमान) की

وَٱلْبَحْرِ ٱلْمَسْجُورِ ﴿6﴾

और जोश व ख़रोश वाले समन्दर की

إِنَّ عَذَابَ رَبِّكَ لَوَٰقِعٌۭ ﴿7﴾

कि तुम्हारे परवरदिगार का अज़ाब बेशक वाकेए होकर रहेगा

مَّا لَهُۥ مِن دَافِعٍۢ ﴿8﴾

(और) इसका कोई रोकने वाला नहीं

يَوْمَ تَمُورُ ٱلسَّمَآءُ مَوْرًۭا ﴿9﴾

जिस दिन आसमान चक्कर खाने लगेगा

وَتَسِيرُ ٱلْجِبَالُ سَيْرًۭا ﴿10﴾

और पहाड़ उड़ने लगेंगे

فَوَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿11﴾

तो उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

ٱلَّذِينَ هُمْ فِى خَوْضٍۢ يَلْعَبُونَ ﴿12﴾

जो लोग बातिल में पड़े खेल रहे हैं

يَوْمَ يُدَعُّونَ إِلَىٰ نَارِ جَهَنَّمَ دَعًّا ﴿13﴾

जिस दिन जहन्नुम की आग की तरफ उनको ढकेल ढकेल ले जाएँगे

هَـٰذِهِ ٱلنَّارُ ٱلَّتِى كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ ﴿14﴾

(और उनसे कहा जाएगा) यही वह जहन्नुम है जिसे तुम झुठलाया करते थे

أَفَسِحْرٌ هَـٰذَآ أَمْ أَنتُمْ لَا تُبْصِرُونَ ﴿15﴾

तो क्या ये जादू है या तुमको नज़र ही नहीं आता

ٱصْلَوْهَا فَٱصْبِرُوٓا۟ أَوْ لَا تَصْبِرُوا۟ سَوَآءٌ عَلَيْكُمْ ۖ إِنَّمَا تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ﴿16﴾

इसी में घुसो फिर सब्र करो या बेसब्री करो (दोनों) तुम्हारे लिए यकसाँ हैं तुम्हें तो बस उन्हीं कामों का बदला मिलेगा जो तुम किया करते थे

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّـٰتٍۢ وَنَعِيمٍۢ ﴿17﴾

बेशक परहेज़गार लोग बाग़ों और नेअमतों में होंगे

فَـٰكِهِينَ بِمَآ ءَاتَىٰهُمْ رَبُّهُمْ وَوَقَىٰهُمْ رَبُّهُمْ عَذَابَ ٱلْجَحِيمِ ﴿18﴾

जो (जो नेअमतें) उनके परवरदिगार ने उन्हें दी हैं उनके मज़े ले रहे हैं और उनका परवरदिगार उन्हें दोज़ख़ के अज़ाब से बचाएगा

كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ﴿19﴾

जो जो कारगुज़ारियाँ तुम कर चुके हो उनके सिले में (आराम से) तख्तों पर जो बराबर बिछे हुए हैं

مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ سُرُرٍۢ مَّصْفُوفَةٍۢ ۖ وَزَوَّجْنَـٰهُم بِحُورٍ عِينٍۢ ﴿20﴾

तकिए लगाकर ख़ूब मज़े से खाओ पियो और हम बड़ी बड़ी ऑंखों वाली हूर से उनका ब्याह रचाएँगे

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَٱتَّبَعَتْهُمْ ذُرِّيَّتُهُم بِإِيمَـٰنٍ أَلْحَقْنَا بِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَمَآ أَلَتْنَـٰهُم مِّنْ عَمَلِهِم مِّن شَىْءٍۢ ۚ كُلُّ ٱمْرِئٍۭ بِمَا كَسَبَ رَهِينٌۭ ﴿21﴾

और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और उनकी औलाद ने भी ईमान में उनका साथ दिया तो हम उनकी औलाद को भी उनके दर्जे पहुँचा देंगे और हम उनकी कारगुज़ारियों में से कुछ भी कम न करेंगे हर शख़्श अपने आमाल के बदले में गिरवी है

وَأَمْدَدْنَـٰهُم بِفَـٰكِهَةٍۢ وَلَحْمٍۢ مِّمَّا يَشْتَهُونَ ﴿22﴾

और जिस क़िस्म के मेवे और गोश्त को उनका जी चाहेगा हम उन्हें बढ़ाकर अता करेंगे

يَتَنَـٰزَعُونَ فِيهَا كَأْسًۭا لَّا لَغْوٌۭ فِيهَا وَلَا تَأْثِيمٌۭ ﴿23﴾

वहाँ एक दूसरे से शराब का जाम ले लिया करेंगे जिसमें न कोई बेहूदगी है और न गुनाह

۞ وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ غِلْمَانٌۭ لَّهُمْ كَأَنَّهُمْ لُؤْلُؤٌۭ مَّكْنُونٌۭ ﴿24﴾

(और ख़िदमत के लिए) नौजवान लड़के उनके आस पास चक्कर लगाया करेंगे वह (हुस्न व जमाल में) गोया एहतियात से रखे हुए मोती हैं

وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ يَتَسَآءَلُونَ ﴿25﴾

और एक दूसरे की तरफ रूख़ करके (लुत्फ की) बातें करेंगे

قَالُوٓا۟ إِنَّا كُنَّا قَبْلُ فِىٓ أَهْلِنَا مُشْفِقِينَ ﴿26﴾

(उनमें से कुछ) कहेंगे कि हम इससे पहले अपने घर में (ख़ुदा से बहुत) डरा करते थे

فَمَنَّ ٱللَّهُ عَلَيْنَا وَوَقَىٰنَا عَذَابَ ٱلسَّمُومِ ﴿27﴾

तो ख़ुदा ने हम पर बड़ा एहसान किया और हमको (जहन्नुम की) लौ के अज़ाब से बचा लिया

إِنَّا كُنَّا مِن قَبْلُ نَدْعُوهُ ۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْبَرُّ ٱلرَّحِيمُ ﴿28﴾

इससे क़ब्ल हम उनसे दुआएँ किया करते थे बेशक वह एहसान करने वाला मेहरबान है

بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.4 / 29.5
रोशनी 92%
12 दिनों में अमावस्या
حسبنا الله ونعم الوكيل अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद