क़ुरआन का रुकू 544 पढ़ें

रुकू 544 सूरह At-Takathur (आयत 1 से 8) से है। इसमें 8 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 544

8
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.8
आयतें

रुकू 544 में सूरह

التكاثر · जुज़ 30
नेविगेशन
बुकमार्क
ऑडियो
हिफ़्ज़
प्रदर्शन
पृष्ठ 600
◄ रुकू 544 ►
سورة التكاثر
जुज़ 30 87.9% (496/564)
हिज़्ब 60 76.4% (220/288)

أَلْهَىٰكُمُ ٱلتَّكَاثُرُ ﴿1﴾

कुल व माल की बहुतायत ने तुम लोगों को ग़ाफ़िल रखा

حَتَّىٰ زُرْتُمُ ٱلْمَقَابِرَ ﴿2﴾

यहाँ तक कि तुम लोगों ने कब्रें देखी (मर गए)

كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُونَ ﴿3﴾

देखो तुमको अनक़रीब ही मालुम हो जाएगा

ثُمَّ كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُونَ ﴿4﴾

फिर देखो तुम्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगा

كَلَّا لَوْ تَعْلَمُونَ عِلْمَ ٱلْيَقِينِ ﴿5﴾

देखो अगर तुमको यक़ीनी तौर पर मालूम होता (तो हरगिज़ ग़ाफिल न होते)

لَتَرَوُنَّ ٱلْجَحِيمَ ﴿6﴾

तुम लोग ज़रूर दोज़ख़ को देखोगे

ثُمَّ لَتَرَوُنَّهَا عَيْنَ ٱلْيَقِينِ ﴿7﴾

फिर तुम लोग यक़ीनी देखना देखोगे

ثُمَّ لَتُسْـَٔلُنَّ يَوْمَئِذٍ عَنِ ٱلنَّعِيمِ ﴿8﴾

फिर तुमसे नेअमतों के बारें ज़रूर बाज़ पुर्स की जाएगी

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 18 जुमादा अल-अव्वल
الجمعة 18 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 19.3 / 29.5
रोशनी 78%
10 दिनों में अमावस्या
الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद