रुकू 544 सूरह At-Takathur (आयत 1 से 8) से है। इसमें 8 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।
05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया
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أَلْهَىٰكُمُ ٱلتَّكَاثُرُ ﴿1﴾
कुल व माल की बहुतायत ने तुम लोगों को ग़ाफ़िल रखा
حَتَّىٰ زُرْتُمُ ٱلْمَقَابِرَ ﴿2﴾
यहाँ तक कि तुम लोगों ने कब्रें देखी (मर गए)
كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُونَ ﴿3﴾
देखो तुमको अनक़रीब ही मालुम हो जाएगा
ثُمَّ كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُونَ ﴿4﴾
फिर देखो तुम्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगा
كَلَّا لَوْ تَعْلَمُونَ عِلْمَ ٱلْيَقِينِ ﴿5﴾
देखो अगर तुमको यक़ीनी तौर पर मालूम होता (तो हरगिज़ ग़ाफिल न होते)
لَتَرَوُنَّ ٱلْجَحِيمَ ﴿6﴾
तुम लोग ज़रूर दोज़ख़ को देखोगे
ثُمَّ لَتَرَوُنَّهَا عَيْنَ ٱلْيَقِينِ ﴿7﴾
फिर तुम लोग यक़ीनी देखना देखोगे
ثُمَّ لَتُسْـَٔلُنَّ يَوْمَئِذٍ عَنِ ٱلنَّعِيمِ ﴿8﴾
फिर तुमसे नेअमतों के बारें ज़रूर बाज़ पुर्स की जाएगी