القيامة · जुज़ 29
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सूरह Al-Qiyama पढ़ें

सूरह Al-Qiyama (القيامة) क़ुरआन की एक मक्की सूरह है जिसमें 40 आयतें हैं। हमारे इंटरैक्टिव उपकरणों से इस सूरह को पढ़ें, सुनें और हिफ़्ज़ करें।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

📖 2 मिनट पढ़ने का समय

सूरह Al-Qiyama अंकों में

कालानुक्रमिक अवतरण क्रम
अवतरण क्रमांक 31 / 114
(मक्की)
165
शब्द
-77.1% औसत से
709
अक्षर
-76.9% औसत से
2
पढ़ने का मिनट
40
आयतें
-26.9% औसत से

मुख्य शब्दों की आवृत्ति في سورة Al-Qiyama

الله 0
رب 3

सबसे अधिक आवृत्त अक्षर في سورة Al-Qiyama

ل
80
#1
ن
53
#2
و
43
#3
ا
41
#4
م
40
#5
सूरह Al-Qiyaama पढ़ें
سورة القيامة
जुज़ 29 76.3% (329/431)
हिज़्ब 58 54.7% (123/225)

كَلَّا بَلْ تُحِبُّونَ ٱلْعَاجِلَةَ ﴿٢٠﴾

मगर (लोगों) हक़ तो ये है कि तुम लोग दुनिया को दोस्त रखते हो

وَتَذَرُونَ ٱلْـَٔاخِرَةَ ﴿٢١﴾

और आख़ेरत को छोड़े बैठे हो

وُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍۢ نَّاضِرَةٌ ﴿٢٢﴾

उस रोज़ बहुत से चेहरे तो तरो ताज़ा बशबाब होंगे

إِلَىٰ رَبِّهَا نَاظِرَةٌۭ ﴿٢٣﴾

(और) अपने परवरदिगार (की नेअमत) को देख रहे होंगे

وَوُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍۭ بَاسِرَةٌۭ ﴿٢٤﴾

और बहुतेरे मुँह उस दिन उदास होंगे

تَظُنُّ أَن يُفْعَلَ بِهَا فَاقِرَةٌۭ ﴿٢٥﴾

समझ रहें हैं कि उन पर मुसीबत पड़ने वाली है कि कमर तोड़ देगी

كَلَّآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلتَّرَاقِىَ ﴿٢٦﴾

सुन लो जब जान (बदन से खिंच के) हँसली तक आ पहुँचेगी

وَقِيلَ مَنْ ۜ رَاقٍۢ ﴿٢٧﴾

और कहा जाएगा कि (इस वक्त) क़ोई झाड़ फूँक करने वाला है

وَظَنَّ أَنَّهُ ٱلْفِرَاقُ ﴿٢٨﴾

और मरने वाले ने समझा कि अब (सबसे) जुदाई है

وَٱلْتَفَّتِ ٱلسَّاقُ بِٱلسَّاقِ ﴿٢٩﴾

और (मौत की तकलीफ़ से) पिन्डली से पिन्डली लिपट जाएगी

إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ ٱلْمَسَاقُ ﴿٣٠﴾

उस दिन तुमको अपने परवरदिगार की बारगाह में चलना है

فَلَا صَدَّقَ وَلَا صَلَّىٰ ﴿٣١﴾

तो उसने (ग़फलत में) न (कलामे ख़ुदा की) तसदीक़ की न नमाज़ पढ़ी

وَلَـٰكِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ ﴿٣٢﴾

मगर झुठलाया और (ईमान से) मुँह फेरा

ثُمَّ ذَهَبَ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ يَتَمَطَّىٰٓ ﴿٣٣﴾

अपने घर की तरफ इतराता हुआ चला

أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰ ﴿٣٤﴾

अफसोस है तुझ पर फिर अफसोस है फिर तुफ़ है

ثُمَّ أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰٓ ﴿٣٥﴾

तुझ पर फिर तुफ़ है

أَيَحْسَبُ ٱلْإِنسَـٰنُ أَن يُتْرَكَ سُدًى ﴿٣٦﴾

क्या इन्सान ये समझता है कि वह यूँ ही छोड़ दिया जाएगा

أَلَمْ يَكُ نُطْفَةًۭ مِّن مَّنِىٍّۢ يُمْنَىٰ ﴿٣٧﴾

क्या वह (इब्तेदन) मनी का एक क़तरा न था जो रहम में डाली जाती है

ثُمَّ كَانَ عَلَقَةًۭ فَخَلَقَ فَسَوَّىٰ ﴿٣٨﴾

फिर लोथड़ा हुआ फिर ख़ुदा ने उसे बनाया

فَجَعَلَ مِنْهُ ٱلزَّوْجَيْنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰٓ ﴿٣٩﴾

फिर उसे दुरूस्त किया फिर उसकी दो किस्में बनायीं (एक) मर्द और (एक) औरत

أَلَيْسَ ذَٰلِكَ بِقَـٰدِرٍ عَلَىٰٓ أَن يُحْـِۧىَ ٱلْمَوْتَىٰ ﴿٤٠﴾

क्या इस पर क़ादिर नहीं कि (क़यामत में) मुर्दों को ज़िन्दा कर दे

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 1 सफर
الجمعة 1 صفر
هلال متزايد बढ़ता हुआ अर्धचंद्र दिन 2.7 / 29.5
रोशनी 8%
12 दिनों में पूर्णिमा
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं