क़ुरआन का रुकू 319 पढ़ें

रुकू 319 सूरह Ash-Shuara (आयत 53 से 69) से है। इसमें 17 आयतें हैं और यह जुज़ 19 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 319

17
आयतें
1
सूरह
19
जुज़
v.53 – v.69
आयतें

रुकू 319 में सूरह

الشعراء · जुज़ 19
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سورة الشعراء
जुज़ 19 32.2% (109/339)
हिज़्ब 37 65.3% (109/167)

فَأَرْسَلَ فِرْعَوْنُ فِى ٱلْمَدَآئِنِ حَـٰشِرِينَ ﴿53﴾

तब फिरऔन ने (लश्कर जमा करने के ख्याल से) तमाम शहरों में (धड़ा धड़) हरकारे रवाना किए

إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ لَشِرْذِمَةٌۭ قَلِيلُونَ ﴿54﴾

(और कहा) कि ये लोग मूसा के साथ बनी इसराइल थोड़ी सी (मुट्ठी भर की) जमाअत हैं

وَإِنَّهُمْ لَنَا لَغَآئِظُونَ ﴿55﴾

और उन लोगों ने हमें सख्त गुस्सा दिलाया है

وَإِنَّا لَجَمِيعٌ حَـٰذِرُونَ ﴿56﴾

और हम सबके सब बा साज़ों सामान हैं

فَأَخْرَجْنَـٰهُم مِّن جَنَّـٰتٍۢ وَعُيُونٍۢ ﴿57﴾

(तुम भी आ जाओ कि सब मिलकर ताअककुब (पीछा) करें)

وَكُنُوزٍۢ وَمَقَامٍۢ كَرِيمٍۢ ﴿58﴾

ग़रज़ हमने इन लोगों को (मिस्र के) बाग़ों और चश्मों और खज़ानों और इज्ज़त की जगह से (यूँ) निकाल बाहर किया

كَذَٰلِكَ وَأَوْرَثْنَـٰهَا بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ ﴿59﴾

(और जो नाफरमानी करे) इसी तरह सज़ा होगी और आख़िर हमने उन्हीं चीज़ों का मालिक बनी इसराइल को बनाया

فَأَتْبَعُوهُم مُّشْرِقِينَ ﴿60﴾

ग़रज़ (मूसा) तो रात ही को चले गए

فَلَمَّا تَرَٰٓءَا ٱلْجَمْعَانِ قَالَ أَصْحَـٰبُ مُوسَىٰٓ إِنَّا لَمُدْرَكُونَ ﴿61﴾

और उन लोगों ने सूरज निकलते उनका पीछा किया तो जब दोनों जमाअतें (इतनी करीब हुयीं कि) एक दूसरे को देखने लगी तो मूसा के साथी (हैरान होकर) कहने लगे

قَالَ كَلَّآ ۖ إِنَّ مَعِىَ رَبِّى سَيَهْدِينِ ﴿62﴾

कि अब तो पकड़े गए मूसा ने कहा हरगिज़ नहीं क्योंकि मेरे साथ मेरा परवरदिगार है

فَأَوْحَيْنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنِ ٱضْرِب بِّعَصَاكَ ٱلْبَحْرَ ۖ فَٱنفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍۢ كَٱلطَّوْدِ ٱلْعَظِيمِ ﴿63﴾

वह फौरन मुझे कोई (मुखलिसी का) रास्ता बता देगा तो हमने मूसा के पास वही भेजी कि अपनी छड़ी दरिया पर मारो (मारना था कि) फौरन दरिया फुट के टुकड़े टुकड़े हो गया तो गोया हर टुकड़ा एक बड़ा ऊँचा पहाड़ था

وَأَزْلَفْنَا ثَمَّ ٱلْـَٔاخَرِينَ ﴿64﴾

और हमने उसी जगह दूसरे फरीक (फिरऔन के साथी) को क़रीब कर दिया

وَأَنجَيْنَا مُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُۥٓ أَجْمَعِينَ ﴿65﴾

और मूसा और उसके साथियों को हमने (डूबने से) बचा लिया

ثُمَّ أَغْرَقْنَا ٱلْـَٔاخَرِينَ ﴿66﴾

फिर दूसरे फरीक़ (फिरऔन और उसके साथियों) को डुबोकर हलाक़ कर दिया

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ﴿67﴾

बेशक इसमें यक़ीनन एक बड़ी इबरत है और उनमें अक्सर ईमान लाने वाले ही न थे

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ ﴿68﴾

और इसमें तो शक ही न था कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन (सब पर) ग़ालिब और बड़ा मेहरबान है

وَٱتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ إِبْرَٰهِيمَ ﴿69﴾

और (ऐ रसूल) उन लोगों के सामने इबराहीम का किस्सा बयान करों

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 18 जुमादा अल-अव्वल
الجمعة 18 جمادى الأولى
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10 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद