रुकू 516 सूरह Al-Mursalat (आयत 1 से 40) से है। इसमें 40 आयतें हैं और यह जुज़ 29 में है।
05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया
पूरा पृष्ठ पढ़ें : क़ुरआन का रुकू 516 पढ़ें →
وَٱلْمُرْسَلَـٰتِ عُرْفًۭا ﴿1﴾
हवाओं की क़सम जो (पहले) धीमी चलती हैं
فَٱلْعَـٰصِفَـٰتِ عَصْفًۭا ﴿2﴾
फिर ज़ोर पकड़ के ऑंधी हो जाती हैं
وَٱلنَّـٰشِرَٰتِ نَشْرًۭا ﴿3﴾
और (बादलों को) उभार कर फैला देती हैं
فَٱلْفَـٰرِقَـٰتِ فَرْقًۭا ﴿4﴾
फिर (उनको) फाड़ कर जुदा कर देती हैं
فَٱلْمُلْقِيَـٰتِ ذِكْرًا ﴿5﴾
फिर फरिश्तों की क़सम जो वही लाते हैं
عُذْرًا أَوْ نُذْرًا ﴿6﴾
ताकि हुज्जत तमाम हो और डरा दिया जाए
إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌۭ ﴿7﴾
कि जिस बात का तुमसे वायदा किया जाता है वह ज़रूर होकर रहेगा
فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتْ ﴿8﴾
फिर जब तारों की चमक जाती रहेगी
وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتْ ﴿9﴾
और जब आसमान फट जाएगा
وَإِذَا ٱلْجِبَالُ نُسِفَتْ ﴿10﴾
और जब पहाड़ (रूई की तरह) उड़े उड़े फिरेंगे
وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْ ﴿11﴾
और जब पैग़म्बर लोग एक मुअय्यन वक्त पर जमा किए जाएँगे
لِأَىِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ ﴿12﴾
(फिर) भला इन (बातों) में किस दिन के लिए ताख़ीर की गयी है
لِيَوْمِ ٱلْفَصْلِ ﴿13﴾
फ़ैसले के दिन के लिए
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ﴿14﴾
और तुमको क्या मालूम की फ़ैसले का दिन क्या है
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿15﴾
उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है
أَلَمْ نُهْلِكِ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿16﴾
क्या हमने अगलों को हलाक नहीं किया
ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿17﴾
फिर उनके पीछे पीछे पिछलों को भी चलता करेंगे
كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ ﴿18﴾
हम गुनेहगारों के साथ ऐसा ही किया करते हैं
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿19﴾
उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है
أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍۢ مَّهِينٍۢ ﴿20﴾
क्या हमने तुमको ज़लील पानी (मनी) से पैदा नहीं किया
فَجَعَلْنَـٰهُ فِى قَرَارٍۢ مَّكِينٍ ﴿21﴾
फिर हमने उसको एक मुअय्यन वक्त तक
إِلَىٰ قَدَرٍۢ مَّعْلُومٍۢ ﴿22﴾
एक महफूज़ मक़ाम (रहम) में रखा
فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ ٱلْقَـٰدِرُونَ ﴿23﴾
फिर (उसका) एक अन्दाज़ा मुक़र्रर किया तो हम कैसा अच्छा अन्दाज़ा मुक़र्रर करने वाले हैं
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿24﴾
उन दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًا ﴿25﴾
क्या हमने ज़मीन को ज़िन्दों और मुर्दों को समेटने वाली नहीं बनाया
أَحْيَآءًۭ وَأَمْوَٰتًۭا ﴿26﴾
और उसमें ऊँचे ऊँचे अटल पहाड़ रख दिए
وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَـٰمِخَـٰتٍۢ وَأَسْقَيْنَـٰكُم مَّآءًۭ فُرَاتًۭا ﴿27﴾
और तुम लोगों को मीठा पानी पिलाया
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿28﴾
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ﴿29﴾
जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो
ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ ظِلٍّۢ ذِى ثَلَـٰثِ شُعَبٍۢ ﴿30﴾
(धुएँ के) साये की तरफ़ चलो जिसके तीन हिस्से हैं
لَّا ظَلِيلٍۢ وَلَا يُغْنِى مِنَ ٱللَّهَبِ ﴿31﴾
जिसमें न ठन्डक है और न जहन्नुम की लपक से बचाएगा
إِنَّهَا تَرْمِى بِشَرَرٍۢ كَٱلْقَصْرِ ﴿32﴾
उससे इतने बड़े बड़े अंगारे बरसते होंगे जैसे महल
كَأَنَّهُۥ جِمَـٰلَتٌۭ صُفْرٌۭ ﴿33﴾
गोया ज़र्द रंग के ऊँट हैं
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿34﴾
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
هَـٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ ﴿35﴾
ये वह दिन होगा कि लोग लब तक न हिला सकेंगे
وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ ﴿36﴾
और उनको इजाज़त दी जाएगी कि कुछ उज्र माअज़ेरत कर सकें
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿37﴾
उस दिन झुठलाने वालों की तबाही है
هَـٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَـٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَ ﴿38﴾
यही फैसले का दिन है (जिस में) हमने तुमको और अगलों को इकट्ठा किया है
فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌۭ فَكِيدُونِ ﴿39﴾
तो अगर तुम्हें कोई दाँव करना हो तो आओ चल चुको
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿40﴾
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है