रुकू 521 सूरह An-Naziat (आयत 27 से 46) से है। इसमें 20 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।
05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया
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ءَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ ٱلسَّمَآءُ ۚ بَنَىٰهَا ﴿27﴾
भला तुम्हारा पैदा करना ज्यादा मुश्किल है या आसमान का
رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّىٰهَا ﴿28﴾
कि उसी ने उसको बनाया उसकी छत को ख़ूब ऊँचा रखा
وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَىٰهَا ﴿29﴾
फिर उसे दुरूस्त किया और उसकी रात को तारीक बनाया और (दिन को) उसकी धूप निकाली
وَٱلْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَىٰهَآ ﴿30﴾
और उसके बाद ज़मीन को फैलाया
أَخْرَجَ مِنْهَا مَآءَهَا وَمَرْعَىٰهَا ﴿31﴾
उसी में से उसका पानी और उसका चारा निकाला
وَٱلْجِبَالَ أَرْسَىٰهَا ﴿32﴾
और पहाड़ों को उसमें गाड़ दिया
مَتَـٰعًۭا لَّكُمْ وَلِأَنْعَـٰمِكُمْ ﴿33﴾
(ये सब सामान) तुम्हारे और तुम्हारे चारपायो के फ़ायदे के लिए है
فَإِذَا جَآءَتِ ٱلطَّآمَّةُ ٱلْكُبْرَىٰ ﴿34﴾
तो जब बड़ी सख्त मुसीबत (क़यामत) आ मौजूद होगी
يَوْمَ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَـٰنُ مَا سَعَىٰ ﴿35﴾
जिस दिन इन्सान अपने कामों को कुछ याद करेगा
وَبُرِّزَتِ ٱلْجَحِيمُ لِمَن يَرَىٰ ﴿36﴾
और जहन्नुम देखने वालों के सामने ज़ाहिर कर दी जाएगी
فَأَمَّا مَن طَغَىٰ ﴿37﴾
तो जिसने (दुनिया में) सर उठाया था
وَءَاثَرَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا ﴿38﴾
और दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह दी थी
فَإِنَّ ٱلْجَحِيمَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ ﴿39﴾
उसका ठिकाना तो यक़ीनन दोज़ख़ है
وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ وَنَهَى ٱلنَّفْسَ عَنِ ٱلْهَوَىٰ ﴿40﴾
मगर जो शख़्श अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता और जी को नाजायज़ ख्वाहिशों से रोकता रहा
فَإِنَّ ٱلْجَنَّةَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ ﴿41﴾
तो उसका ठिकाना यक़ीनन बेहश्त है
يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلسَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَىٰهَا ﴿42﴾
(ऐ रसूल) लोग तुम से क़यामत के बारे में पूछते हैं
فِيمَ أَنتَ مِن ذِكْرَىٰهَآ ﴿43﴾
कि उसका कहीं थल बेड़ा भी है
إِلَىٰ رَبِّكَ مُنتَهَىٰهَآ ﴿44﴾
तो तुम उसके ज़िक्र से किस फ़िक्र में हो
إِنَّمَآ أَنتَ مُنذِرُ مَن يَخْشَىٰهَا ﴿45﴾
उस (के इल्म) की इन्तेहा तुम्हारे परवरदिगार ही तक है तो तुम बस जो उससे डरे उसको डराने वाले हो
كَأَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَهَا لَمْ يَلْبَثُوٓا۟ إِلَّا عَشِيَّةً أَوْ ضُحَىٰهَا ﴿46﴾
जिस दिन वह लोग इसको देखेंगे तो (समझेंगे कि दुनिया में) बस एक शाम या सुबह ठहरे थे