क़ुरआन का रुकू 462 पढ़ें

रुकू 462 सूरह An-Najm (आयत 33 से 62) से है। इसमें 30 आयतें हैं और यह जुज़ 27 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 462

30
आयतें
1
सूरह
27
जुज़
v.33 – v.62
आयतें

रुकू 462 में सूरह

النجم · जुज़ 27
पृष्ठ 527
रुकू 462
سورة النجم
जुज़ 27 27.8% (111/399)
हिज़्ब 53 56.6% (111/196)

أَفَرَءَيْتَ ٱلَّذِى تَوَلَّىٰ ﴿٣٣﴾

भला (ऐ रसूल) तुमने उस शख़्श को भी देखा जिसने रदगिरदानी की

وَأَعْطَىٰ قَلِيلًۭا وَأَكْدَىٰٓ ﴿٣٤﴾

और थोड़ा सा (ख़ुदा की राह में) दिया और फिर बन्द कर दिया

أَعِندَهُۥ عِلْمُ ٱلْغَيْبِ فَهُوَ يَرَىٰٓ ﴿٣٥﴾

क्या उसके पास इल्मे ग़ैब है कि वह देख रहा है

أَمْ لَمْ يُنَبَّأْ بِمَا فِى صُحُفِ مُوسَىٰ ﴿٣٦﴾

क्या उसको उन बातों की ख़बर नहीं पहुँची जो मूसा के सहीफ़ों में है

وَإِبْرَٰهِيمَ ٱلَّذِى وَفَّىٰٓ ﴿٣٧﴾

और इबराहीम के (सहीफ़ों में)

أَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٌۭ وِزْرَ أُخْرَىٰ ﴿٣٨﴾

जिन्होने (अपना हक़) (पूरा अदा) किया इन सहीफ़ों में ये है, कि कोई शख़्श दूसरे (के गुनाह) का बोझ नहीं उठाएगा

وَأَن لَّيْسَ لِلْإِنسَـٰنِ إِلَّا مَا سَعَىٰ ﴿٣٩﴾

और ये कि इन्सान को वही मिलता है जिसकी वह कोशिश करता है

وَأَنَّ سَعْيَهُۥ سَوْفَ يُرَىٰ ﴿٤٠﴾

और ये कि उनकी कोशिश अनक़रीेब ही (क़यामत में) देखी जाएगी

ثُمَّ يُجْزَىٰهُ ٱلْجَزَآءَ ٱلْأَوْفَىٰ ﴿٤١﴾

फिर उसका पूरा पूरा बदला दिया जाएगा

وَأَنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلْمُنتَهَىٰ ﴿٤٢﴾

और ये कि (सबको आख़िर) तुम्हारे परवरदिगार ही के पास पहुँचना है

وَأَنَّهُۥ هُوَ أَضْحَكَ وَأَبْكَىٰ ﴿٤٣﴾

और ये कि वही हँसाता और रूलाता है

وَأَنَّهُۥ هُوَ أَمَاتَ وَأَحْيَا ﴿٤٤﴾

और ये कि वही मारता और जिलाता है

وَأَنَّهُۥ خَلَقَ ٱلزَّوْجَيْنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰ ﴿٤٥﴾

और ये कि वही नर और मादा दो किस्म (के हैवान) नुत्फे से जब (रहम में) डाला जाता है

مِن نُّطْفَةٍ إِذَا تُمْنَىٰ ﴿٤٦﴾

पैदा करता है

وَأَنَّ عَلَيْهِ ٱلنَّشْأَةَ ٱلْأُخْرَىٰ ﴿٤٧﴾

और ये कि उसी पर (कयामत में) दोबारा उठाना लाज़िम है

وَأَنَّهُۥ هُوَ أَغْنَىٰ وَأَقْنَىٰ ﴿٤٨﴾

और ये कि वही मालदार बनाता है और सरमाया अता करता है,

وَأَنَّهُۥ هُوَ رَبُّ ٱلشِّعْرَىٰ ﴿٤٩﴾

और ये कि वही योअराए का मालिक है

وَأَنَّهُۥٓ أَهْلَكَ عَادًا ٱلْأُولَىٰ ﴿٥٠﴾

और ये कि उसी ने पहले (क़ौमे) आद को हलाक किया

وَثَمُودَا۟ فَمَآ أَبْقَىٰ ﴿٥١﴾

और समूद को भी ग़रज़ किसी को बाक़ी न छोड़ा

وَقَوْمَ نُوحٍۢ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ هُمْ أَظْلَمَ وَأَطْغَىٰ ﴿٥٢﴾

और (उसके) पहले नूह की क़ौम को बेशक ये लोग बड़े ही ज़ालिम और बड़े ही सरकश थे

وَٱلْمُؤْتَفِكَةَ أَهْوَىٰ ﴿٥٣﴾

और उसी ने (क़ौमे लूत की) उलटी हुई बस्तियों को दे पटका

فَغَشَّىٰهَا مَا غَشَّىٰ ﴿٥٤﴾

(फिर उन पर) जो छाया सो छाया

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكَ تَتَمَارَىٰ ﴿٥٥﴾

तो तू (ऐ इन्सान आख़िर) अपने परवरदिगार की कौन सी नेअमत पर शक़ किया करेगा

هَـٰذَا نَذِيرٌۭ مِّنَ ٱلنُّذُرِ ٱلْأُولَىٰٓ ﴿٥٦﴾

ये (मोहम्मद भी अगले डराने वाले पैग़म्बरों में से एक डरने वाला) पैग़म्बर है

أَزِفَتِ ٱلْـَٔازِفَةُ ﴿٥٧﴾

कयामत क़रीब आ गयी

لَيْسَ لَهَا مِن دُونِ ٱللَّهِ كَاشِفَةٌ ﴿٥٨﴾

ख़ुदा के सिवा उसे कोई टाल नहीं सकता

أَفَمِنْ هَـٰذَا ٱلْحَدِيثِ تَعْجَبُونَ ﴿٥٩﴾

तो क्या तुम लोग इस बात से ताज्जुब करते हो और हँसते हो

وَتَضْحَكُونَ وَلَا تَبْكُونَ ﴿٦٠﴾

और रोते नहीं हो

وَأَنتُمْ سَـٰمِدُونَ ﴿٦١﴾

और तुम इस क़दर ग़ाफ़िल हो तो ख़ुदा के आगे सजदे किया करो

فَٱسْجُدُوا۟ لِلَّهِ وَٱعْبُدُوا۟ ۩ ﴿٦٢﴾

और (उसी की) इबादत किया करो (62) सजदा

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