रुकू 433 सूरह Ad-Dukhan (आयत 43 से 59) से है। इसमें 17 आयतें हैं और यह जुज़ 25 में है।
05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया
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إِنَّ شَجَرَتَ ٱلزَّقُّومِ ﴿43﴾
(आख़ेरत में) थोहड़ का दरख्त
طَعَامُ ٱلْأَثِيمِ ﴿44﴾
ज़रूर गुनेहगार का खाना होगा
كَٱلْمُهْلِ يَغْلِى فِى ٱلْبُطُونِ ﴿45﴾
जैसे पिघला हुआ तांबा वह पेटों में इस तरह उबाल खाएगा
كَغَلْىِ ٱلْحَمِيمِ ﴿46﴾
जैसे खौलता हुआ पानी उबाल खाता है
خُذُوهُ فَٱعْتِلُوهُ إِلَىٰ سَوَآءِ ٱلْجَحِيمِ ﴿47﴾
(फरिश्तों को हुक्म होगा) इसको पकड़ो और घसीटते हुए दोज़ख़ के बीचों बीच में ले जाओ
ثُمَّ صُبُّوا۟ فَوْقَ رَأْسِهِۦ مِنْ عَذَابِ ٱلْحَمِيمِ ﴿48﴾
फिर उसके सर पर खौलते हुए पानी का अज़ाब डालो फिर उससे ताआनन कहा जाएगा अब मज़ा चखो
ذُقْ إِنَّكَ أَنتَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْكَرِيمُ ﴿49﴾
बेशक तू तो बड़ा इज्ज़त वाला सरदार है
إِنَّ هَـٰذَا مَا كُنتُم بِهِۦ تَمْتَرُونَ ﴿50﴾
ये वही दोज़ख़ तो है जिसमें तुम लोग शक़ किया करते थे
إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى مَقَامٍ أَمِينٍۢ ﴿51﴾
बेशक परहेज़गार लोग अमन की जगह
فِى جَنَّـٰتٍۢ وَعُيُونٍۢ ﴿52﴾
(यानि) बाग़ों और चश्मों में होंगे
يَلْبَسُونَ مِن سُندُسٍۢ وَإِسْتَبْرَقٍۢ مُّتَقَـٰبِلِينَ ﴿53﴾
रेशम की कभी बारीक़ और कभी दबीज़ पोशाकें पहने हुए एक दूसरे के आमने सामने बैठे होंगे
كَذَٰلِكَ وَزَوَّجْنَـٰهُم بِحُورٍ عِينٍۢ ﴿54﴾
ऐसा ही होगा और हम बड़ी बड़ी ऑंखों वाली हूरों से उनके जोड़े लगा देंगे
يَدْعُونَ فِيهَا بِكُلِّ فَـٰكِهَةٍ ءَامِنِينَ ﴿55﴾
वहाँ इत्मेनान से हर किस्म के मेवे मंगवा कर खायेंगे
لَا يَذُوقُونَ فِيهَا ٱلْمَوْتَ إِلَّا ٱلْمَوْتَةَ ٱلْأُولَىٰ ۖ وَوَقَىٰهُمْ عَذَابَ ٱلْجَحِيمِ ﴿56﴾
वहाँ पहली दफ़ा की मौत के सिवा उनको मौत की तलख़ी चख़नी ही न पड़ेगी और ख़ुदा उनको दोज़ख़ के अज़ाब से महफूज़ रखेगा
فَضْلًۭا مِّن رَّبِّكَ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ ﴿57﴾
(ये) तुम्हारे परवरदिगार का फज़ल है यही तो बड़ी कामयाबी है
فَإِنَّمَا يَسَّرْنَـٰهُ بِلِسَانِكَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ ﴿58﴾
तो हमने इस क़ुरान को तुम्हारी ज़बान में (इसलिए) आसान कर दिया है ताकि ये लोग नसीहत पकड़ें तो
فَٱرْتَقِبْ إِنَّهُم مُّرْتَقِبُونَ ﴿59﴾
(नतीजे के) तुम भी मुन्तज़िर रहो ये लोग भी मुन्तज़िर हैं